न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता : नारी शक्ति

नारी शक्ति

हे नारी! जग हित के लिए, है आज यही आह्वान मेरा,
जागो, उठकर जीवन से अपने, दूर करो ये अंधेरा!

ये नव प्रभात की नई सुनहरी, किरणें तुम्हें पुकार रहीं!
जो राह तुम्हारी है अभीष्ट, मिलकर ये उसे सँवार रहीं!

तोड़ो जकड़ी जंजीरें ये, पूर्वांचलनिकलो अब बंद सलाखों से!
तुम नए सुबह की नई रोशनी, देखो अपनी आँखों से!

पथ में आए अवरोधों को, करके विनष्ट तुम चले चलो!
कंकड़, पत्थर, चट्टानों को, रौंदो पग से अब बढ़े चलो!

रुकना मत होकर तुम हताश, तूफानों – झंझावातों से!
करना न कभी तुम समझौता, टूटे – बिखरे हालातों से!

तुम बनके महाकालिका, अपने हाथों में लेकर खप्पर!
धरती के ऊपर पग रखकर, छा जाओ ऊँचे अंबर पर!

पर याद रहे तुमको नारी! रिश्तों की हो तुम स्नेह डोर!
मानुषी रूप सुमधुर वाणी, प्रण पालन करने में कठोर।

तुम ममता की सुंदर मूरत, निर्मल मृदु भावों की धात्री!
हो अतुल शक्ति भूमंडल की, संपूर्ण सृष्टि की निर्मात्री।

डाॅ० अतिराज सिंह
बीकानेर, राजस्थान

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar