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कविता : नारी

नारी

घर देखो बाहर देखो
देखो दुनिया संसार।
नारी बिना किसी का नहीं
हो सकता है बेड़ा पार।
जन्म देती है नारी सबको
पालन पोषण करती है।
जब कोई आता आफत
डटकर मुकाबला करती है।
दुर्गा काली सरस्वती रुप में
कभी लक्ष्मीबाई,रजिया सुल्तान।
देख संकट में देश परिवार को
खड़ा हो जाए भृकुटी तान।
नारी दया है नारी दुआ है
बिन नारी जहां में क्या हुआ है।
नारी सहनशीलता है
नारी सिखलाती शर्म हया है।
इस दुनिया में नारी जितना
बता किस को मोह माया है।
नारी जीवनदायिनी है
नारी ही वसुंधरा की पहचान।
बिन नारी नहीं अस्तित्व प्रकृति का
नारी से चल रहा है दुनिया जहान।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
देवदत्तपुर दाउदनगर औरंगाबाद बिहार
व्हाट्सएप नंबर 950 734 1433

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