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कविता : तुम्हीं खुशियों में हो मेरे

तुम्हीं खुशियों में हो मेरे, उदासी में बसे तुम हो
बसे तुम ही हो अंगड़ाई में , उबासी में बसे तुम हो
तुम्हीं दिल का सूकूं मेरे, तड़पना दिल का तुम ही हो
तुम्हें पाके हुआ पूरा , वो सपना दिल का तुम ही हो
तुम्हें देखा था जबसे तबसे तुम इस दिल की चाहत हो
तुम्हीं से दिल में बेचैनी , तुम्हीं इस दिल की राहत हो
शराफत मेरे अंदर और शरारत भी तुम्हीं से है
करुं दिन रात जो पूजा , इबादत भी तुम्हीं से है
तुम्हीं हो हरकतें मेरी ,मचलना दिल का तुम ही हो
तुम्हें पाके हुआ पूरा , वो सपना दिल का तुम ही हो
मेरे सपने, मेरी खुशियां ,मेरे जज्बात तुमसे है
सुनहरी सुबह है तुमसे सुहानी रात तुमसे है
तुम्हीं हो गम की बदली में तुम्ही खुशियों की आहट में
तुम्हीं आंसू में हो आते,तुम्हीं हो खिलखिलाहट में
तुम्हीं तो जान हो मेरी धड़कना दिल का तुम ही हो
तुम्हें पाके हुआ पूरा , वो सपना दिल का तुम ही हो

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली

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