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कविता : आंसू देकर चले गए तुम

 आंसू देकर चले गए तुम


(इरफान खान जी की स्मृति को समर्पित)
विलख रहे हैं आज सभी हम
ना जाने क्यूं चले गए तुम
अभिनय की दुनिया भी सूनी
हलचल देकर चले गए तुम..।।
भूल नहीं पाएंगे हम सब
आपके उम्दा अभिनय को
करके हम सबको बेगाना
आखिर चले गए क्यूं तुम..।।
रंग मंच पर हर मंचन से
विजयी होकर निकले थे
अपने ही जीवन मंचन से
क्यूं फिर ऐसे हार गए तुम..।।
अभिनय कला को मिली ऊंचाई
कितनों के आदर्श बने
आज हुईं सबकी नम आंखें
आंसू देकर चले गए तुम..।।
आंसू देकर चले गए तुम..।।
विजय कनौजिया
ग्राम व पत्रालय-काही
जनपद-अम्बेडकर नगर (उ0 प्र0)
मो0-9818884701
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