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शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की याद में कवि सम्मेलन

देश पे यूं क़ुर्बान था बिस्मिल

संजय कुमार गिरि
नई दिल्ली। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार) के सौजन्य से व शहीद राम प्रसाद बिस्मिल शिक्षा समिति ने अमर बलिदानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और रोशन सिंह के बलिदान दिवस एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सफाई अभियान के अंतर्गत एक कवि सम्मेलन का आयोजन विश्वकर्मा पब्लिक स्कूल शिव विहार में किया गया। जिसकी अध्यक्षता देश के लब्ध प्रतिष्ठित गीतकार डॉ जय सिंह आर्य ने की। मुख्य अतिथि रहे दिल्ली के पूर्व मेयर मास्टर आजाद सिंह। संचालन झांसी से पधारे ओजस्वी कवि मदन मोहन मार्तंड ने किया। सभी अतिथियों का सम्मान शाल और प्रतीक चिन्ह व पुष्प गुच्छ भेंट कर विश्वकर्मा पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष राजकुमार पांचाल ने किया।
मेरठ से पधारी सुप्रसिद्ध कवियत्री सुषमा सवेरा ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा:-
तू शक्ति है तू भक्ति है तू मन भी है तू प्राण भी
तू हर सुबह की धूप है ,तू छांव है हर सांझ की
अध्यक्ष राष्ट्रीय गीतकार डॉक्टर जयसिंह आर्य ने राम प्रसाद बिस्मिल के बलिदान को नमन करते हुए कुछ ये कहा:-
भारत मां का मान था बिस्मिल
देश धर्म की जान था बिस्मिल
देशभक्ति ठीक थी खून में उसके
देश पे यूं कुर्बान था बिस्मिल
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सफाई अभियान की प्रशंसा करते हुए दिल्ली लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ राम सरण गौड़ को भी बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने एक जागरण अभियान सफाई के प्रति चलाया है वह राष्ट्र के प्रति शुभ संकेत है।
उन्होंने सफाई व स्वच्छता पर अपने मुक्तक में कहा:
-स्वच्छ भारत का मान कर ले तू
राष्ट्र का मन से गान कर ले तू
आप महकोंगे दिल भी महकेगा
कुछ सफाई पे ध्यान कर ले तू
बहादुरगढ़ (हरियाणा) से पधारे देश के बड़े गीतकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी जी ने अपनी कविता में अपने भारत के लिए कहा:-
जी रहे हैं वतन के लिए
इक तिरंगे कफन के लिए
हम बनेंगे नयी रोशनी
इस पुराने भवन के लिए
आगरे से पधारे गीतकार धर्मेंद्र शर्मा ने अपने भाव अपने देश के लिए कुछ यूं व्यक्त किए:-
जंगे मैदान की जब घड़ी हो
शत्रु की सेना सम्मुख खड़ी हो
रक्त वन चक्षुओं में दौड़ना भवानी
शत्रु की मुण्डी धरण पर पड़ी हो
झांसी से पधारे ओजस्वी कवि मदन मोहन माकन ने शहीद की बेटी पर अपनी पंक्तियों में कहा
उस बलिदानी बेटी की जब भी शादी और विदाई हो।
वंदे मातरम की धुनि गूंजे जन गण, मन शहनाई हो।।
युवा कवियत्री सुश्री रजनी अवनी ने बेटियों पर मार्मिक मुक्तक प्रस्तुत किया बानगी दिखी:-
बेटियां घोर अंधेरों में एक उजाला है
बेटियां खुशियों भरी मोतियों की माला है
बेटियां प्रार्थना, उपासना सी पावन है
धन्य वो घर जहां बेटियों को पाला है
गजलकार राम श्याम ‘हसीन ‘ के इस शेर ने खूब वाहवाही लूटी:-
बंद है मुट्ठी तो है यह जिंदगी
रेत सी वरना फिसलती जाएगी
गजलकार कर्ण सिंह ‘करण’ के इस शेर ने समा बांध दिया:-
दर्द, आहे, कराहें, पीड़ाएं
तूने किस चीज की कमी दी है
पत्रकार- चित्रकार- कवि संजय गिरी ने कहा:-
यहां संजय तुम्हारी बात पर जिनको भरोसा है
चलेंगे साथ वही जान जो तुम पर लुटाते हैं
गुरुग्राम से पधारे सुप्रसिद्ध राष्ट्र चिंतक कवि डॉ अशोक ‘ज्योति’ ने अपनी कविताओं से सभी में राष्ट्रीयता का जोश भर दिया।
डॉक्टर सत्यदेव रुहिल व पटना से पधारे युवा कवि अनुराग ठाकुर ने वीर शहीदों पर अपनी कविताओं से उनको नमन किया और सभी को उनके मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कवि सम्मेलन के इस सफलता पर संस्था रामप्रसाद बिस्मिल शहीद स्मृति शिक्षा समिति के अध्यक्ष मास्टर रवीन्द्र ने सभी आमंत्रित कवियों अतिथियों श्रोताओं व खासतौर से दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के चेयरमैन डॉ रामशरण गौड़ वह श्री राजकुमार पांचाल का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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