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महिला काव्य मंच की मातृ दिवस पर काव्य गोष्ठी

माँ होकर सारे फर्ज निभाऊंगी: गरिमा गर्ग

नई दिल्ली। महिला काव्य मंच की पंचकूला इकाई ने मातृ दिवस पर ऑन लाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन किया।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता मोहाली इकाई की सचिव श्रीमती उपासना रामपाल ने की एवं सानिध्य मंच के संस्थापक श्री नरेश नाज एवं राशि श्रीवास्तव (अध्यक्ष ट्राइसिटी ) का रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन व पुष्प अर्पण कर श्रीमती आभा मुकेश साहनी की सुमुधर सरस्वती वंदना के साथ हुआ। पंचकूला इकाई की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता गर्ग ने काव्य गोष्ठी का बेहतरीन व सुंदर संचालन किया।

काव्य गोष्ठी में पंचकूला, हरियाणा की प्रसिद्ध कवयित्री गरिमा गर्ग की माँ पर पंक्तिया इस प्रकार थी-
मैं माँ हूँ माँ होकर सारे फ़र्ज़ निभाउंगी
सहूंगी सारे ताप बच्चों का स्वरक्षा चक्र बन जाऊँगी।।
मंच की अध्यक्षा सुनीता गर्ग ने कहा-
माँ से बढ़कर न कोई, माँ तो ख़ुद भगवान है।
सींचती है अपने खून से, चलना भी सिखलाती है ।।

रेणु अब्बी” रेणु” के गीत की पंक्तिया-
मांं – बचपन का एहसास
पल पल दिल के पास मां रहती हो ।।
कवयित्री संगीता शर्मा कुंद्रा, चंडीगढ़ ने कहा-
माँ भी तो हम जैसी ही होगी।
यह ना कभी सोचा हमने।।

गोष्ठी में कवयित्री राशि श्रीवास्तव
उपासना रामपाल, सुनीता गर्ग, गरिमा गर्ग ,सुदेश नूर, संगीता राय, आभा मुकेश साहनी,मंजू
बिसला,अचला डिंगले, सरोज चोपड़ा,मोहिनी सचदेवा,रेणु अब्बी,उषा गर्ग, सोनिमा सत्या, सीता श्याम, संगीता कुंद्रा,मोहिनी मदान, मोनिका कटारिया ने अपनी कविताओं से माहौल को रंगारंग और सुरमई कर दिया।
अंत मे महिला काव्य मंच पंचकुला इकाई की अध्यक्ष सुनीता गर्ग ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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