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पॉर्न से महिलाओं अपराधों में इजाफा

इंटरनेट के इस युग में जहां एक तरफ देश ज्ञान विज्ञान की नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं इसका दुरूपयोग बेहद डरावना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश का युवा वर्ग इंटरनेट के माध्यम से पॉर्न देखने का आदी हो चुका है। भारत में पॉर्न बेबसाइटों पर प्रतिबन्ध के बावजूद इन्हें रोक पाना भारी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में 2019 में लगभग 89 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स ने अपने फोन पर पॉर्न देखा। फोन पर पोर्न देखने की रैंकिंग में भारत सबसे आगे है, इसने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। सस्ते इंटरनेट डेटा से जहाँ पोर्न देखने वालों की संख्या बढ़ी है वहां दुष्कर्म वारदातें भी उसी तेजी से बढ़ी है। यह भी कहा जाता है जिस चीज पर रोक लगती है उसकी डिमांड उसी अनुपात में बढ़ जाती है। पॉर्न के मामलों में भी यही हो रहा है। भारतीयों में पॉर्न देखने की लत बढ़ रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक इसके शिकार हो रहे हैं। इस कारण समाज में अपराध बढ़ रहा है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन और मोबाइल की संख्या बढ़ रही है वैसे वैसे इसकी चाहत भी निरंतर बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 46 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जो कुल आबादी का लगभग 26 फीसदी है। यह तादाद वर्ष 2021 तक बढ़ कर 63 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है।
देश की सर्वोच्च अदालत में एक वकील द्वारा दायर किए गए हलफनामे में बताया गया कि देश में 3 करोड़ बच्चे और 7 करोड़ वयस्क पॉर्न की लत के शिकार हैं। इस कारण ये हिंसक हो रहे हैं। ऐसे में इस पर तुरंत एक्शन की जरूरत है। यह भी कहा गया पॉर्न विडियो देखने की लत शराब और ड्रग्स की तरह है।
इंटरनेट पर पॉर्न देखना (अश्लील सामग्री) खराब माना जाता है। कुछ लोग इसे रेप और गलत रास्ते पर भटकाने की भी वजह मानते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी पॉर्न वेबसाइट पॉर्नहब के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के बाद भारत में सबसे ज्यादा पॉर्न देखा जाता है। इंटरनेट पॉर्नोग्राफी भारत में काफी लोकप्रिय है। भारत में पॉर्न वेबसाइटों से कुल इंटरनेट ट्रैफिक 30 से 70 प्रतिशत तक आता है। इंटरनेट पर पॉर्न कॉन्टेंट को बैन करना भारत सरकार के लिए चुनौती बन गया है। पिछले साल अक्टूबर में भारत सरकार ने पॉर्नहब समेत 857 पॉर्न साइट्स को बैन कर दिया था। हाइकोर्ट के आदेश को मानते हुए सरकार ने 857 पॉर्न वेबसाइट्स को यह कहते हुए बैन किया था कि उनके कॉन्टेंट अनैतिक और अश्लील हैं।
देश में पिछले कुछ सालों में पॉर्न एडिक्शन के चलते ही महिलाओं के प्रति अपराधों में तेजी से इजाफा हुआ है। रेप की सभी घटनाओं को उठाकर देखे तो उसके पीछे अपराधियों की पॉर्न देखने की लत और शराब को बड़ा कारण पाया गया है चाहे वह पहले भोपाल में मासूम से रेप की घटना हो या हैदराबाद या रांची की घटना इन सभी में अपराधियों ने पोनोग्राफी और शराब की लत के चलते अपराध को अंजाम दिया है।
पिछले कुछ सालों से भारत में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है। इंटरनेट को मनोरंजन और शिक्षा का माध्यम माना जाता था। एक बटन दबाते ही हमें वांछित सामग्री सुलभ हो जाती थी। इसे ज्ञान का प्रवाह भी माना गया। युवाओं ने अपनी शिक्षा-दीक्षा में इंटरनेट का व्यापक उपयोग किया जिसके मनवांछित परिणाम भी हमें मिले। मगर ज्ञान के साथ-साथ वह सामग्री भी हमें मिलने लगी जिससे हम कोसों दूर भागते थे। विज्ञान के चमत्कार ने जहाँ अच्छाई को प्रकट किया वहाँ बुराई भी हमारे सामने आई।
अनेक अपराधियों ने यह कबूल किया है कि नंगी और अश्लील फिल्मों को देखकर ही हमने अपराधों को अंजाम दिया है। छेड़खानी, दुष्कर्म ओर बलात्कार के पीछे अश्लील फिल्मों के प्रदर्शन को माना गया है। ये फिल्में अपराध की कारक हैं और समाज में कलंक हैं। अश्लील फिल्मों के प्रदर्शन को रोकने के लिए कई प्रकार के कानूनों का प्रावधान है। मगर पोर्न फिल्मों को रोकने एवं प्रचारित करने से रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इंटरनेट की साइटों से लगातार पोर्न फिल्मों का प्रचलन बढ़ रहा है और बच्चों और युवाओं को पोर्न फिल्में अज्ञानतावश अपनी ओर खींच रही है। हर चीज को कानून बनाकर नहीं रोका जा सकता, विशेष कर पोर्न फिल्मों को रोका जाना तो लगभग असंभव है। समाज में चेतना, जागरूकता और निगरानी के माध्यम से ही ऐसी फिल्मों पर अंकुश लग सकता है।
माँ-बाप और अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों की सतत निगरानी रखें और कम्प्यूटर अथवा लेपटाप पर उन्हें देर रात्रि तक नहीं बैठने दें। स्वयं भी समय-समय पर कम्प्यूटर को देखते रहें ताकि बच्चों के मन में यह भय बना रहे कि उन्होंने कुछ भी अनुचित देखा तो माँ-बाप की नजर में आ जायेंगे।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी .32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

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