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प्रेम का बदला स्वरुप

प्रेम । सांसारिक शब्दकोश का यह शब्द बहुत ही पावन और महान माना जाता है । प्रेम के कई प्रकार दुनिया में पाए गए हैं । मां का बेटे के प्रति दुलार और बेटे का मां के प्रति प्यार, पिता का पुत्र के प्रति स्नेह, बहन का भाई पर विश्वास, दोस्तों की दोस्ती, प्रेमियों की मुहब्बत इत्यादि सभी प्रेम के ही अपरुप हैं
इस एक शब्द ने दुनिया को अपनी मुठ्ठी में कर रखा है । इसी शब्द से संबंधित लाखों कहानियां दुनिया के सभी कोने में तैर रहीं हैं । यह पुरातन काल से ही एक स्थायी विषय रहा है । इसे सदैव ही महान विभूतियों अथवा हस्तियों के द्वारा पवित्र और पावन माना गया है । इसकी पवित्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया सकता है कि, लीला पुरुषोत्तम भगवान कृष्ण एवं राधा रानी की प्रेम कहानी आज भी प्रासंगिक है तथा युवा मन को रोमांचित करती है । उनका प्रेम इतना पावन था कि भले ही श्री कृष्ण की पत्नी होने का गौरव महारानी रुक्मणी को मिला लेकिन कृष्ण के साथ राथा का नाम हमेशा के लिए जुड़ गया । प्रेम की अगर और बातें करें तो लैला-मजनू, हीर-रांझा, शीरी-फरहाद, रोमियो-जूलियट इत्यादि ऐसे युगल नाम हैं जिन्होनें पूरी दुनिया को सच्चे प्रेम का वास्तविक और विस्तारित मतलब समझाया है । इन्होंने पूरी दुनिया को ये बताने का काम किया कि प्रेम आखिर होता क्या है और इसे किया कैसे जाता है । सही मायनों में सच्चे प्रेम की परिभाषा दे पान अत्यंत मुश्किल कार्य है इसलिए आजतक सच्चे प्रेम की परिभाषा कोई नहीं दे पाया , हां प्रेम की व्याख्या सभी ने अपने अपने तरीके से जरूर किया । किसी प्रेम को खुशी , किसी ने गम, किसी ने दर्द, किसी ने मरहम, किसी ने याद, किसी ने फरियाद, किसी ने जन्नत तो किसी ने भगवान बताया है । प्रेम ने सदा ही दो जिस्मों को एक जान बनने का अवसर दिया है । प्रेम को ही आधार मानकर कई गजलकारों ने गजलें लिखीं । प्रेम पर आधारित ही कई चलचित्रों का भी निर्माण हुआ और इनके माध्यम से प्रेम का भरपूर प्रचार-प्रसार हुआ । इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रेम दुनिया की सबसे हसीन चीजों में से एक है । आज की युवा पीढ़ी ने सदियों पुराने प्रेम की परिभाषा की जो छीछालेदर किया है वह बड़ा ही चिंतनीय है । आज की पीढ़ी के लिए प्यार का मतलब बिस्तर और ईच्छापूर्ति है जो कि बहुत ही गलत है । कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि आज प्रेम का दूसरा अर्थ स्वार्थसिद्धि हो गया है तो भी गलत नहीं होगा । पूरे भारतभर में प्यार के नाम पर जो खिलवाड़ हो रहें है उनसे सीख लेने एवं सतर्क रहने की जरूरत है । प्रेम पुराने जमाने में होता था तो साथ जीने मरने की कसमें खायीं जाती थी । अपने प्रियतम पर सर्वस्व लुटा देने का जज्बा तब के प्रेमियों में होता था । प्रेम का जब स्वरुप बदला तब यह स्वार्थ एवं कामना की राह से होते हुए बिस्तर तक आ पहुंची और तब शुरु हुए प्यार के नाम पर घिनौने खेल । ऐसी कई खबरें आईं जहां इस पाप भरे प्रेम के जाल में लड़कियों को फांसकर बेच दिया गया या जबरन नर्क की ओर ढ़केल दिया गया । कई मामलों में तो आपत्तिजनक विडियो को विभिन्न माध्यमों से फैला दिया गया । प्यार का एक रूप यह भी देखने को मिला कि लड़का लड़की से एक तरफा प्यार करता था । लड़की ने ना बोल दिया तो उस पर तेजाब से हमला कर दिया गया । ये कैसा प्यार था भाई ? अगर इन कुत्सित प्रयासों को प्यार कहा जाए तो फिर शैतानी या हैवानियत किसे कहेंगे ? यकीन मानिए प्यार के नाम पर की गई इन कुत्सित प्रयासों ने प्रेम के उन पुजारियों को भी शर्मिंदा कर दिया जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपने नि:स्वार्थ प्रेम को समर्पित कर दिया था ।
आज के दौर में निस्वार्थ प्रेम की परिकल्पना काल्पनिक मात्र लगने लगीं है । हमें इस पर विशेष रूप सोचने की आवश्यकता है ।

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली

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