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पर्पल पेन लघुकथा कार्यशाला सम्पन्न

विजय न्यूज़ नेटवर्क। डाॅ. इंदिरा शर्मा
नई दिल्ली। पर्पल पेन साहित्यिक समूह द्वारा ‘लघुकथा कार्यशाला’ का आयोजन क्नाॅट प्लेस स्थित ‘कैफ़े काॅफ़ी डे, द् स्क्वायर’ में सफलतापूर्वक किया गया । सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं कथाकार श्री सुभाष चन्दर की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में सबसे पहले श्री चन्दर ने लघुकथा विधा पर एक सार्थक वक्तव्य दिया। आपने लघुकथा के सिद्धांतों और विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की । लघुकथा और कहानी में अंतर बताया । लघुकथा के कथ्य, शिल्प, प्रकार, और उसके मुख्य तत्वों की जानकारी उदाहरण सहित दी । साथ ही साथ लघुकथाओं में अक्सर पाये जाने वाले दोषों, जैसे कालखंड दोष, भाषा, वाक्य विन्यास आदि की भी चर्चा की ।

तदोपरान्त पर्पल पेन के सदस्यों — सर्व श्री/सुश्री मीनाक्षी भटनागर, रजनी रामदेव, शारदा मदरा, अंजु खरबंदा, निशि शर्मा जिज्ञासु, सुषमा शैली, इंदिरा शर्मा, जगदीश मीणा, ओम प्रकाश शुक्ल और आयोजन संयोजक, पर्पल पेन की संस्थापक वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने अपनी-अपनी लघुकथाकाओं का पाठ किया । एक-एक लघुकथा की श्री सुभाष चन्दर ने विस्तृत समीक्षा की तथा सुधार के सुझाव दिये ।

श्री सुभाष चन्दर ने लघुकथा पाठ सुनते हुए सभी लेखकों को अपनी-अपनी लघुकथाओं की स्वयं समीक्षा करने के लिये भी प्रोत्साहित किया । लेखकों को लघुकथा के लक्षण स्पष्टता से समझ आये, इसका आंकलन करते हुए आपने लघुकथा के हरेक तत्व पर, उसके गुग-दोष पर प्रकाश डाला । श्री चन्दर ने अपनी दो लघुकथाओं का भी पाठ किया ।

कार्यशाला के आरंभ में सुश्री वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने बताया कि केवल दस लेखकों के छोटे समूह के साथ कार्यशाला आयोजित करने के पीछे यही उद्देश्य था कि से सभी को अपनी लघुकथाओं पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा सुनने का सुअवसर मिले । सभी सदस्यों ने पर्पल पेन की इस पहल का स्वागत करते हुए वसुधा ‘कनुप्रिया’ की साहित्यिक निष्ठा की भूरी-भूरी प्रशंसा की । वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने बताया की भविष्य में भी गद्य (लघुकथा/कहानी), पद्य की पारंपरिक विधाओं जैसे दोहा, चौपाई, गीतिका, गीत आदि और नवीन विधाओं जैसे
हाइकु पर भी कार्यशालाएँ आयोजित की जायेंगी।

काॅफी और स्नैक्स का दौर साथ-साथ चला । ‘लघुकथा कार्यशाला’ में श्री सुभाष चन्दर ने अपने समापन उद्बोधन में प्रत्येक लेखक को उसकी लेखन शैली और स्वाभाविक प्रकृति के अनुसार लेखन करने का सुझाव दिया । पर्पल पेन की संस्थापक एवं संचालक सुश्री वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।

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