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किसान संगठन और सरकार की 15 जनवरी को होने वाली बैठक को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली. किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या 15 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच होने वाली बैठक होगी या नहीं. यह सवाल इस वजह से उठा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में एक कमेटी का गठन कर दिया है जिसके समक्ष जाकर किसान संगठन और सरकार चर्चा कर सकते हैं. लेकिन सवाल यह है कि अगर चर्चा कमेटी के सामने होनी है तो क्या अभी तक सरकार और किसान संगठनों के बीच जो बातचीत हो रही थी वो अभी भी उसी तरह से जारी रहेगी या बंद हो जाएगी.

अंतिम फैसला लिया जाना अभी बाकी
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब 15 तारीख को होने वाली बैठक को लेकर सरकार चर्चा करेगी और उसके बाद तय किया जाएगा कि 15 जनवरी को बैठक होगी या नहीं. कैलाश चौधरी का यह बयान इस वजह से भी मायने रखता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कमेटी का गठन कर दिया है. उस कमेटी का मकसद यही है कि सरकार और किसानों को एक मंच पर लाकर बातचीत शुरू हो सके. ऐसे में क्या सरकार अभी भी किसानों से अलग बातचीत करेगी या कमेटी के सामने ही बातचीत होगी इसको लेकर अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के अमल पर लगाई है रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इसके साथ ही केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के अमल पर भी रोक लगाई हुई है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बात करते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि वैसे तो सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश हमारे पक्ष में भी नहीं है क्योंकि इस आदेश में कृषि कानून के अमल पर रोक लगाई गई है और हम भी इस अंतरिम आदेश से पूरी तरह सहमत नहीं है. लेकिन फिर भी केंद्र सरकार खुले मंच से किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है. क्योंकि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करती है लिहाजा सरकार की तरह है किसान संगठनों को भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए कमेटी के समक्ष आकर अपनी शंकाओं को रखना चाहिए और विचार विमर्श कर उन शंकाओं को दूर करना चाहिए.

कैलाश चौधरी ने ट्रैक्टर रैली को लेकर कही ये बात
कैलाश चौधरी ने इसके साथ ही किसानों द्वारा 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने को लेकर कहा कि किसानों को अगर अपना आंदोलन जारी भी रखना है तो उसको शांतिपूर्वक रखना चाहिए. क्योंकि अगर इस तरीके से कोई रैली निकाली जाती है तो वह देश की छवि को नुकसान भी पहुंचा सकती है

देश कांग्रेस को नकार चुका है और उसकी सच्चाई जान चुका है
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्यों के नामों पर किसान संगठनों ने भी ऐतराज जताया है तो उसके साथ ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं. कांग्रेस द्वारा सवाल उठाये जाने को लेकर कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कांग्रेस आज जो इस कानून का विरोध कर रही है जब सत्ता में थी तो इसी तरह के कानून लाने की बात कर रही थी. खुद कांग्रेस के नेता राहुल गांधी इस तरह के कानून को लेकर बात कह चुके हैं.लेकिन अब जब मोदी सरकार यह कानून ले आई है तो वह इसका विरोध कर रहे हैं. देश कांग्रेस को नकार चुका है और उसकी सच्चाई जान चुका है.

ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि अगर किसान कमेटी के सामने जाने को तैयार नहीं और सरकार के साथ बातचीत कमेटी बन जाने के बाद ही सीधे तौर पर होगी नहीं. तो क्या यह गतिरोध और ज्यादा बढ़ जाएगा क्योंकि ऐसे माहौल में तो बातचीत पूरी तरह से बंद हो जाएगी और अगर बातचीत की नहीं होगी तो यह मसला सुलझेगा कैसे.

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