न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

“याद रखना परमेश्वर एक ही है और हम सभी मानव उसकी संतान हैं”

हमारे भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक कहे जाने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म आज ही के दिन यानी की 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सातारा जिले में माली जाति के एक परिवार में हुआ ,ये एक महान चिंतक , कार्यकर्ता, समाज सुधारक, लेखक, दार्शिनक, संपादक और क्रांतिकारी थे। ये अपने जीवन भर निम्न जाति, महिलाओं और दलितों के उद्धार के लिए कार्य करते रहे ,इनके कार्य में इनकी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले ने भी हमेशा योगदान देती रही थी। साथियों महात्मा ज्योतिबा कहते थे की आर्थिक असमानता के कारण ही किसानों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है ,जो की आज इतने वर्षो के बाद भी इन की कही हुई बातें शत प्रतिशत प्रासंगिक है।एक बार ज्योतिबा फुले के जीवन में एक ऐसा मौका आया था जब वह गरीब किसानों की आवाज उठाने में पीछे नहीं हटे थे , ज्योतिबा फुले के एक दोस्त थे जिनका नाम हरि रावजी चिपलुनकर था, उन्होंने ब्रिटिश राजकुमार और उसकी पत्नी के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, ब्रिटिश राजकुमार महारानी विक्टोरिया का पोता था,उस कार्यक्रम में ज्योतिबा फुले भी पहुंचे। वहां जाकर किसानों का दर्द बयान कर सके, इसके लिए वह कार्यक्रम में किसानों जैसा कपड़ा पहनकर गए थे और भाषण दिए थे । उन्होंने अपने इस भाषण में धनाढ्य लोगों पर टिप्पणी की जो हीरे के आभूषण पहनकर अपने वैभव और धन-दौलत का प्रदर्शन कर रहे थे, ज्योतिबा फुले ने मौके पर मौजूद गणमान्य हस्तियों को चेताते हुए कहे थे कि ये जो धनाढ्य लोग हैं, वे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राजकुमार वाकई में इंग्लैंड की महारानी की भारतीय प्रजा की स्थिति जानना चाहता है तो वह आसपास के गांवों का दौरा करे,उन्होंने राजकुमार को उन शहरों में भी घूमने का सुझाव दिया जहां वे लोग रहते हैं जिनको अछूत समझा जाता है, जिनके हाथ का पानी पीने, खाना खाने, जिसके साथ खड़े होने पर लोग खुद को अपवित्र मानने लगते हैं। उन्होंने राजकुमार से आग्रह किया कि वह उनके संदेश को महारानी विक्टोरिया तक पहुंचा दे और गरीब लोगों को उचित शिक्षा मुहैया कराने का बंदोबस्त करे। ज्योतिबा फुले के इस भाषण से समारोह में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए थे। साथियों आज भी अगर हम अन्नदता के दर्द को नही समझे तो बड़ा ही मुश्किल होंगी, हमे विश्व गुरु बनने में , साथ ही याद रखना हमारे भारत में राष्ट्रीयता की भावना का विकास तब तक नहीं होगा, जब तक खान -पान एवं वैवाहिक सम्बन्धों पर जातीय बंधन बने रहेंगे ।
देश से छुआछूत को खत्म करने और समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाने में अहम किरदार निभाने वाले ज्योतिबा फुले का निधन 28 नवंबर, 1890 को हो गया , इनका पूरा जीवन ही क्रांति से भरा रहा था, उन्होंने समाज के निचले तबके को सशक्त बनाने की लड़ाई लड़ी, इसके लिए उनको स्थापित नियमों और परंपराओं के सामने डटकर खड़ा होना पड़ा, उन्होंने महिला शिक्षा के मैदान में भी काफी योगदान दिए है , उन्होंने समाज के दबे-कुचले वर्ग के लिए ब्रिटिश शासन से भी टकराने में हिचकिचाहट महसूस नहीं किए ,समाज के दबे-कुचले, शोषित और बेसहारा वर्ग की आवाज बनने वाले ज्योतिबा फुले का सामाजिक सुधार को लेकर किए गए उनके कार्यों से हमे आज भी काफी मदद मिलती हैं ,महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने और युवाओं के बीच शिक्षा को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट थी, कहते थे कि अनपढ़ , अशिक्षित जनता को फंसाकर वे अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं और यह वे प्राचीन काल से कर रहें हैं . इसलिए आपको शिक्षा से वंचित रखा जाता है .” आज हम सभी मिलकर ऐसे महान चिंतक ज्योतिबा फुले को सादर नमन करते हैं।

 

विक्रम चौरसिया

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar