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रोशन ख्वाबों और अधूरी उम्मीदों के साथ 2019 अलविदा

एक और साल बीत रहा है। साल 2019 कई अफसाने देकर कहीं गम तो कहीं खुशी के बहाने देकर, हमसे बिदा ले रहा हे। देश की आंखों ने जो ख़्वाब बुने थे, उनमें कुछ को ये साल रौशन भी कर गया है। किसानों , मजदूरो , बेरोजगारों, गरीबों और मध्यम वर्ग की उम्मीदों को ये साल फिर अधूरी छोड़ गया। कई र्निभया इस साल भी बिना इंसाफ के रह गयी। तेलंगाना में महिला पशु चिकित्सक
की बलात्कार के बाद हत्या की बर्बर घटना ने देश को हिलाकर रख दिया। देश उबला तो पुलिस ने उसी जगह पर मुठभेड़ मे आरोपियों को ढ़ेर कर दिया। तेलंगाना पुलिस ने जहां एक ओर वावाही लूटी तों ये सवाल भी उठा कि क्या कानून वाकई अंधा होता है?इस साल कई माओं ने अपने बेटे सरहद और मातृ भूमि की हिफाजत मे खोये तो देश के भीतर भी कई माएं अपने लाडलों की तस्वारें ले कर उनको तलाशती रही। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, जम् कश्मीर मे धारा 370 हटाने और फ्रांस के साथ अरबों डॉलर की राफेल लड़ाकू
विमान खरीद सौदे का रास्ता साफ करने तथा तीन तलाक की व्यवस्था खत्म करने वाले उच्चतम न्यायालय के 2019 के फैसले ऐतिहासिक रहे।
वहीं अंतरिक्ष में अपने कारनामे से दुनिया को हैरान करने वाले इसरो के लिए यह साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा। ये बात अलग है कि इसरो का मिशन चंद्रयान-2 अपेक्षा के अनुरूप भले ही सफल न हो सका हो,लेकिन विश्व पटल पर वह अपनी धाक जमाने में कामयाब जरूर हुआ। ये कहना गलत नही होगा कि भारतीय वैज्ञानिकों के सितारों से आगे जाने के मजबूत इरादों को दुनिया ने भी मान लिया है। भारतीय रेल की पटरियों पर तेजस और वंदे भारत जैसी आधुनिक सुविधाओं वाली ट्रेनो का हवा से बातें करना गौरवशली पल था। तो मेल-एक्प्रेस ट्रेनों की लेटलतीफी और कोहरे से मुकाबले मे नाकामी इस साल भी रेलवे के साथ जुड़ी रही।रेल के साधारण् और स्लिपर डब्बे मे यात्रा आज भी उतनी ही मुश्किल है जितनी 6-7 साल पहले थी।राजनीतिक रूप से साल 2019 चुनावी वर्ष भी था। साल के शुरू मे जहां
लोकसभा चुनाव में राजनीतिक विरोधियों को पछाड़ते हुए नरेंद्र दामोदर दास मोदी सबसे बड़े नेता बनकर उभरे और सत्ता के महानायक बने। लेकिन अलविदा होते साल ने उन्हीं मोदी को महाराष्ट्र और झारखंड मे राजनीतिक झटके तो दिये ही। एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून के आने के बाद देश मे पहली बार जनसमुदाय सरकार के खिलाफ सड़कों पर भी उतरता दिखा। खट्टे-मीठे और तकलीफदेह अनुभव के साथ ये साल कुछ उम्मीद और सपने फिर से जीवन में भर गया।
साल 2019 सचमुच बदलाव वाला साल भी कहा जायेगा। कहीं देश बदलता दिखा तो कहीं लोगों की सोच भी बदलती दिखी। साल के बीच मे सोशल मीडिया में एक शब्द, हां, मैं भी चौकीदार यह लिखने की बाढ़ सी आई थी।लेकिन ये आज तक पता नहीं चल सका कि यह किसकी चौकीदारी की बात हो रही थी। ये सही है कि देश प्रगति कर रहा है, सड़कें बन रही हैं और उस पर विदेशी गाड़ियाँ दौड़ रही हैं। महिलाओं के उत्थान और बेटी बचाने की बात भी हो रही है और बेटी बचाव का नारा भी जोरशोर से बुलंद हुआ। शहरों और कस्बों की
दीवारें इस नारे से रंगी दिखती थी। लेकिन ये सवाल सन 2019 मे भी ज्यों का त्यों खड़ा हुआ है कि आखिर ऐसे कैसे बचेंगी बेटियां? क्यों कि महिलाओं के प्रति अपराध के आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े देश को आईना दिखा रहे हैं। अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने अपने सालाना आंकडें जारी करने मे काफी देरी कर दी। लेकिन जो पुराने आंकडें जारी किये वह चौकाने वाले हैं। ताजा रिपोर्ट ने कई राज्यों के दावों की पोल खोल दी। अपराध के मामले में उत्तर भारत के राज्यों को इस रिपोर्ट ने जिस तरह से आईना दिखाया है, वह गौर करने वाली बात है। देश भर मे तीन लाख 59 हज़ार 849 मामले महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित हैं।जो ये बताने के लिए काफी हैं कि 70 साल का आजाद भारत का खुला आसमान और मजबूत लोकतंत्रीय ढ़ांचा भी बदलाव की राह पर चल रहे देश मे महिलाओं की ठीक से हिफाजत नही कर पा रहा है। उन्नाव के कांड और तेलंगाना मे महिला पशु चिकित्सक के साथ बर्बरता की दर्दनाक घटना आंकड़ों को गवाही दे रही हैं। मानों ये कह रही हैं कि अब ये समय आगया है कि स्त्री को अपनी सुरक्षा
की चौकीदार स्वयं बनना पड़ेगा। दरअसल साल 2019 को मोदी सरकार के कुछ साहसिक कदम के लिए देश के इतिहास मे जरूर याद किया जायेगा। इस साल मोदी वह काम कर गये जो दूसरे प्रधानमंत्रियों की सोच से आगे नही बढ़ सका था। दूसरी बार 2019 मे सत्ता में आते ही नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए जिससे देश का इतिहास, भूगोल और यूं कहें कि भारत को
लेकर दुनिया की सोच भी बदल दी। हालांकि अयोध्या विवाद, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को लेकर लिए गए निर्णय काफी चुनौतीपूर्ण भी रहे। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने अपने इन तीन फैसलों पर बाखूबी अमल कर के दिख्राया।दुनियां के दर्जनों इस्लामिक देशों ने तीन तलाक को बहुत पहले ही नकार दिया था। पर भारत के मुस्लिम समाज मे ये बदस्तूर जारी था,जिसे कानून बना कर मोदी सरकार ने गैर कानूनी घोषित कर दिया। इस साल जम्मू-कश्मीर का मुद्दा देश में सबसे ऊपर रहा। 5 अगस्त 2019 को कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला धारा 370 हटा दिया गया। इस फेसले ने देश का भूगोल बदल दिया। इन तमाम फैसलों के बीच 2019 को सबसे ज्यादा याद किया जाएगा अयोध्या  विवाद को सुलझाने के लिए। शीर्ष अदालत ने इस साल अपने फैसले में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का समाधान निकाला। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें पूरे 40 दिन तक सुनीं। यह सुप्रिम कोर्ट के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है।राम की जन्मभूमि में उनके जन्म को साबित करने के लिए देश की आजादी के पहले से चल रहा विवाद आखिरकार साल 2019 मे सुलझ ही गया। इस साल उच्चतम न्यायालय ने सूचना का अधिकार के तहत सूचनाएं साझा करने को लेकर भी नरम रुख अपनाया और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यालय सार्वजनिक प्राध्णिकार है और वह भी इस कानून के तहत आता है। तथा उसे सूचनाएं साझा करनी चाहिए।इस साल सुप्रिम
कोर्ट ने खुद को भी विवादों में पाया।जब भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश पर एक महिला ने आरोप लगया।बहरहाल, बाद में उन्हें इस मामले में क्लिन चिट मिल गई।
उच्चतम न्यायालय ने इस साल महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उसने 2012
निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या कांड के चार दोषियों में से एक की मौत की सजा बरकरार रखी। साथ ही निर्देश दिया कि जिन जिलों में पॉक्सो के तहत 100 से ज्यादा प्राथमिकियां दर्ज हैं वहां तत्काल प्रभाव से विशेष अदालतों का गठन किया जाए, जो सिर्फ इन्हीं मामलों की सुनवाई करेंगी। भाजपा के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद जैसे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों को यौन उत्पीड़न के मामलों में अदालती मार झेलनी पड़ी। न्यायालय ने सेंगर से जुड़े उन्नाव बलात्कार मामले की सुनवाई लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करवाई। दिल्ली की अदालत ने सेंगर को इस मामले में जीवन
पर्यंत कैद की सजा सुनाई। इस साल अदालत का चाबुक अनिल अंबानी जैसों पर भी चला। इस साल नये मोटर व्हीकल एक्ट ने भी देश मे खलबली मचा दी। इस कानून में जुर्माने की राशि इतनी तय की गई, जिसे लेकर देश भर में हड़कंप जैसी स्थिति है। चालान की राशि के चलते कई जगहों पर लोगों ने अपना वाहन ही पुलिस के पास छोड़ना मुनासिब समझा। वहीं देश मे आर्थीक मंदी की आवाजों के
बीच मोदी सरकार ने कुछ बेंकों के विलय का फरमान भी जारी किया। नागरिकता संशोधन बिल के कानून बनने के बाद से देश भर मे धरना प्रदर्शनों का लम्बा दौर चला।हिंसा भी हुयी और पुलिस-छात्र मे भी टकराव हुआ। ये साल भारत की बहादुर सेना के लिए भी दमखम दिखने वाला रहा। सीमा पार के आतंकी ठिकाने तहस-नहस किये और 139 से अधिक आंतकवादियों ढ़ेर किया। बताया जाता है कि
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ के नए प्रयास किए गए। इस साल के प्रथम आठ महीनों में पाकिस्तान द्वारा कुल 1,889 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया।लेकिन देश के जवानों ने हर बार करारा जवाब दिया। और जाते-जाते इस साल ने ठंड के रिकार्ड को भी तोड़ दिया। दिल्ली मे 1901 के बाद 2019 का दिसंबर का महीना सबसे सर्द महीना साबित हुआ।। वहीं राजस्थान के माउंट आबू में तापमान ज़ीरो डिग्री से भी नीचे चला गया।उम्मीद है कि 2020 के सूरज का उजास जब फैलेगा तो भारत नई
बुलंदियों की ओर उड़ान भरेगा।

शाहिद नकवी

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