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धनु राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: वर्ष के प्रारम्भ में स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है, आपको सावधानी रखनी होगी। वर्ष के प्रारम्भ से 19 सितम्बर तक यात्रा को टालना होगा। आकस्मिक चोट लग सकती है। अप्रत्याशित संकट एवं कठिनाईओं का सामना करना पड़ सकता है। इस समय मृत्युतुल्य घातक रोग उत्पन्न हो सकता है। आपकी दिनचर्या में पर्याप्त मात्रा में सकारात्मक परिवर्तन लाना ही होगा। अपने हठी स्वाभाव को नियन्त्रित करें एवं मानसिक उद्वेगता में वृद्धि न होने दें।

आर्थिक स्थिति: स्मरण रहे कि इस वर्ष कोई भी वस्तु एवं समाग्री उधार में क्रय न करें 24 जनवरी से 13 फरवरी तक आर्थिक परिस्थिति अधिक दुर्बल रह सकती है। धन व्यय करने में सावधानी रखें, अनावश्यक व्यय हो सकता है। 30 मार्च से 30 जून के मध्य पारिवारिक व्यय हेतु किसी से ऋण लेना पड़ सकता है। कुटुम्ब एवं सामाजिक व्यवहार हेतु भी आर्थिक व्यय हो सकता है। यदि आपके जन्म का शनि बलवान हो, तो समस्याओं का समाधान कर पायेंगे।

व्यवसाय: आपको दैनिक व्यापार-वाणिज्य में इस वर्ष अधिक ध्यान देना होगा। अपना सम्पूर्ण व्यापार श्रमिकों के विश्वास पर न करें, विश्वासघात हो सकता है। 14 मई से 19 सितम्बर तक कुछ उथल-पुथल हो सकती है, सावधान रहें। जो जातक अस्थायी रूप से किसी कम्पनी या संस्था से जुड़े हैं, उन्हें नौकरी में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि सम्भव हो तो नौकरी स्थायी करने का प्रयास करें अथवा स्थायी प्रमाणपत्र बनवा लें। यदि आपका व्यवसाय सन्तान के नाम पर चल रहा है तो आय में वृद्धि होगी।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: मानसिक रूप से यह वर्ष चिन्ताजनक रहेगा साथ ही परिवार में क्लेश रहेगा। विवाहित जातकों के लिये यह समय थोड़ा चिन्तादायक है तथा अविवाहित जातको के विवाह में विलम्ब हो सकता है। भाई एवं पिता से विवाद एवं कुटुम्ब में कलह का वातावरण रहने से भी तनाव व्याप्त होगा। कही पर आपको दोषी ठहराया जायेगा। अधिकाशतः घर की स्त्रियाँ विवाद का कारण बनेंगी। वातावरण एवं गृह परिस्थियों को ध्यान में रखते हुये आपको मात्र मौन रहने की सलाह दी जाती है। यदि आपके जन्म के ग्रहों ने आपका साथ दिया तो सामाजिक मान-सम्मान भी प्राप्त हो सकता है।

प्रणय जीवन: दाम्पत्यसुख यथावत बना रहेगा। आपको सन्तान के स्वास्थ्य को लेकर चिन्ता बनी रहेगी। घर में छोटी-मोटी बातों को लेकर विवाद हो सकता है एवं पत्नी का स्वाभाव विवादी हो सकता है। आपके जीवन साथी इस पर पूर्णतः ध्यान रख रहें कि आप क्या बोलते हैं एवं क्या वास्तविक जीवन में क्या करते हैं। प्रेम सम्बन्ध में अपनी प्रियतमा के समक्ष पुरानी प्रियतमा अथवा किसी अन्य स्त्री का गुणगान न करें। प्रियतमा की रुष्टता का शान्तिपूर्ण निवारण कर उनसे जुड़े रहने का प्रयास करें।

स्त्री जातक फल: महिलाओं को इस वर्ष गुप्त रोग हो सकता है। गृह वातावरण कलहप्रद रहने की सम्भावना अधिक रहेगी। सन्तान से मानसिक पीड़ा होगी। दाम्पत्यजीवन में असन्तोष तथा पारिवारिक अलगाव भी सम्भव है। अविवाहित स्त्रियों का सम्बन्ध निर्धारित होने के पश्चात् टूट सकता है अथवा उसमें व्यवधान आ सकते हैं। सावधानी रखें एवं अपने होने वाले जीवनसाथी से दूरभाष पर बात करने में संयम रखें। गर्भवती स्त्रियों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता रहेगी।

राजकीय स्थिति: यदि आप राजकार्य से सम्बन्धित हैं तो निःसन्देह आपको सफलता प्राप्त होगी एवं आपका वर्चस्व रहेगा। किन्तु अपने जन्म ग्रहों की स्थिति का अवलोकन करें कि वह आपका कितना साथ देंगे। संगठन अथवा पार्टी में अच्छा पद प्राप्त हो सकता है। निर्बल एवं निःसहाय व्यक्तियों का दुःख दर्द बाँटें तथा उन्हें सरकारी लाभ दिलवायें, वैद्यकीय व आजीवका के सन्दर्भ में अवगत करायें।

विद्यार्थी जीवन: विद्यार्थियों को इस वर्ष उनकी आशाओं के अनुरूप फल काम ही प्राप्त होंगे। परिश्रम के अनुसार सफलता नहीं मिलने से असन्तुष्ट रहेंगे। मानसिक तनाव एवं बाधायें उत्पन्न होंगी। 22 मार्च से 14 मई तक कम्प्यूटर इन्जीनियरिंग से जुड़े जातकों का समय अनुकूल रहेगा। आप अपना उत्साह बनाये रखें लक्ष्य प्राप्ति में सरलता होगी। यदि आप विश्विद्यालय के छात्र हैं, तो अपनी वाणी पर संयम रखें, प्रेम-जाल में न फसें।

सारांश: वर्ष 2020 आपके लिये मिश्र फलदायी रहेगा। इस वर्ष आपके जीवन में समस्याओं का आवागमन बना रहेगा। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिससे मन में गम्भीर विचार उत्पन्न होंगे। स्वयं के व्यवसाय में एवं शेयर-बाजार में परिस्थिति का अवलोकन करने के पश्चात् ही आगे बढ़ें। अनावश्यक धन का व्यय न करें। पैतृक सम्पत्ति में हस्तक्षेप अथवा विक्रय करने का विचार त्याग दें। विद्यार्थीजन जितना परिश्रम करेंगे उतने ही उत्तम परिणाम प्राप्त होंगे। प्रणय जीवन में स्वयं की आय के अनुसार ही व्यय करें। अनावश्यक वचन देने से विश्वास में कमी आ सकती है। यदि आप राजकीय सेवा से सम्बन्धित हैं, तो सर्वप्रथम अपने स्वास्थ्य एवं कुटुम्ब के सदस्यों को अग्र स्थान दें। इस वर्ष सन्तान प्राप्ति के योग बन रहे हैं। सामाजिक स्तर से यह वर्ष आपके लिये सामान्य रह सकता है। सौहार्द एवं सबका साथ, सबका विकाश की युक्ति से कार्य करें।

मर्यादा:

  1. 24 जनवरी तक साढ़ेसाती का स्वर्ण पद ह्रदय पर से होगा, जो कि चिन्ताकारक होगा। 24 जनवरी से पैर से उतरती ही साढ़ेसाती रजत पद से प्रारम्भ होगी, जो कि राजपथ से सम्मान, धन-धान्य, समृद्धि, व्यापारिक उन्नति, एवं शुभ-मंगल दायक होगी।
  2. वर्ष के प्रारम्भ में ही आर्थिक योजना एवं आय-व्यय का विचार करें तथा अनावश्यक व्यय टाल दें।
  3. अचार-विचार की शुद्धता के साथ-साथ इस वर्ष आहार-विहार भी शुद्ध ही रखें।
  4. यथा सम्भव अनैतिक सम्बन्धों से दूरी बनाकर रखें।
  5. यदि इस वर्ष आप स्पर्धात्मक परीक्षा दे रहे हैं अथवा अभ्यास के अन्तिम वर्ष में हैं, तो परिश्रम में वृद्धि करके इच्छित परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
  6. दाम्पत्य जीवन अथवा प्रणय जीवन में “समाधान” को ही परम मित्र समझें।
  7. साझेदारी में विघ्न आ सकते हैं एवं मनमुटाव भी हो सकता है। साझेदारी में किसी प्रकार की भ्रामक स्थिति होने पर आमने सामने बैठ कर तत्काल निवारण करें।

समाधान:

  • एक गौरीशंकर रुद्राक्ष निम्नलिखित मन्त्र से भगवान शिव का पूजन व अभिषेक करके, पण्डित जी से पूजा करवा के सोमवार के दिन धारण करें। इस प्रयोग से वैवाहिक जीवन में सुख, सम्बन्ध में मधुरता एवं चित्त में आकर्षण की वृद्धि होती है :- ॐ गौरीशंकराभ्यां नमः।
  • प्रणय जीवन में तनाव व मनमुटाव के निवारण हेतु एवं प्रेम व आकर्षण प्राप्त करने हेतु किसी प्रकाण्ड पण्डित जी के परामर्श से “प्रेम वृद्धि यन्त्र” बनवा कर निम्नलिखित मन्त्र से जप व प्रतिष्ठा करवायें :- क्लीं कामदेवाय नमः।
  • घर में नकारात्मक शक्ति का नाश एवं सकारात्मक शक्ति का संचार करने हेतु घर में स्फटिक की गेंद रखें।
  • बुद्धवार को बुद्ध की होरा में गोमेद लॉकेट को निम्नलिखित मन्त्र से यथोचित पूजन करके धारण करें :- ॐ रां राहवे नमः।
  • गेहूँ, गोमेद रत्न, नीले वस्त्र, कम्बल, तिल, तेल, लोहा, अभ्रक एवं दक्षिणा ससंकल्प किन्हीं वृद्ध पण्डित जी को रात्रि के समय दान करें –

-दाम्पत्यजीवन की बाधाओं एवं कष्टों के निवारण हेतु निम्नलिखित मन्त्र का 108 बार 41 दिनों तक जप करें-
अभि त्वा मनुजातेन दधामि मम वाससा।
याथाऽसो मम केवलो नान्यासां कीर्तयाश्चन॥

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