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संवैधानिक अधिकारों के मायने

आज भारत में ऐसी विकट स्थिति उत्पन्न हो चुकी है ।जो भारत की जटिल समस्याओं में से एक है ।यहाँ महिलाओं को संविधान के तहत मिलने वाले अधिकार बौने नजर आ रहे है ।आज लड़कियों अपने ही घर में कैद रहने को विवश है । जिसका सीधा जिम्मेदार सरकार , प्रशासन और न्याय व्यवस्था है ।आज भारतीय संविधान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बौने पड़ गए है ।कुछ लोगों की अवधारणा बन गई है कि छोटे कपड़े पहनने के कारण आज बलात्कार हो रही है ।इसे पूरी तरह सार्थक कहना अनुचित होगा ।क्योंकि लोगों की मानसिकता इतनी गिर चुकी है कि छोटी बच्ची के साथ भी ऐसी घिनौनी हरकत हो रही है ।हाँ आज कुछ हद तक लड़कियों के पहनावे और फिल्मी जगत की अश्लीलता भी जिम्मेदार है , लोगों की मानसिकता परिवर्तन में ।लेकिन हैरत की बात है अगर छोटे कपड़ें इसके कारक है तो उनके घर में ऐसी हरकत क्यों नहीं होती ।लोग केवल अपने पर बीतने पर सोचते है लेकिन दूसरों की इज्जत को अपनी घिनौनी हरकत से अंजाम देते है ।आज ऐसे असभ्य समाज का निर्माण हो रहा है जिसमें घृणित सोच वाले युवा पीढ़ी पनप कर मान – मर्यादा को धूमिल करती जा रही है ।आज लड़कियाँ अपनी शैक्षणिक योग्यता के लिए केवल ट्यूशन जाती है तो उनको कई मनचलों की घिनौनी हरकत और अभद्र टिप्पणी का सामना करना पड़ता है ।क्या यही हमारा मधुमय देश है ? क्या यही वो गांव / शहर है जहाँ भारत माँ निवास करने की बात कही गई है ?आज महिला / लड़कि /बच्ची घर के बाहर पाँव रखते ही कभी प्रियंका , ट्विंकल ,निर्भया के रूप में सड़कों पर जली मिलती है ।और इससे अंजाम देने वाले कई महीनों तक बेखोफ घूमते रहते है ।तो कई वर्षों तक कानूनी करवाई में ।तो कई वर्षों न्याय व्यवस्था में फूलते रहते है ।जिसका परिणाम है कि आज निरन्तर कभी गार्गी दुष्कर्म , तो कभी मुजफ्फरपुर बालिका दुष्कर्म कांड के रूप में अपराध बढ़ते जा रहे है और इस पर रोक लगाना अंसभव होता जा रहा है ।उदाहरणतया ज्ञात हो कि एक छोटे से झगड़े में त्वरित कार्यवाही के कारण ही बड़े अपराध में तब्दीली नहीं पाती है ।ठीक इसी प्रकार यदि त्वरित करवाई हो तो निःसंदेह इस तरह की घिनौनी हरकत पर रोक लग सकेगा ।आज हम सब इस भयावह स्थिति को दरकिनार कर संविधान की समता , स्वत्रंत्रता ,मौलिकता और मानवाधिकार के तहत मिलने वाले अधिकारों का उल्लंघन / हनन कर रहे है ।
गाँधी जी का बहुचर्चित युक्ति था – “जब हमारे देश की महिलाएँ रात के बाहर बजे सड़कों पर भी सुरक्षित महसूस करे तब समझ लेना ,पूर्ण रूप से हम आजाद हो गए ” ।अंततः सवाल यह है कि नारी के इस स्थिति में आ जाने के कारण भारत का सवैधानिक देश होने का क्या औचित्य है ?हमारे समाज के माता / पिता / अभिभावकों/ शिक्षकों का कर्त्तव्य बनाता है कि लड़कियों को उनके संवैधानिक अधिकार को बताएँ तथा आत्मनिर्भरता के गुड़ सिखाएँ तथा आत्मरक्षा के लिए आईपीसी की धारा 100 को जरूर बताएँ जिसमें आत्मरक्षा के लिए (जीवन रक्षा ) के लिए दरिंदों के प्राणों का हरण भी कर सकते है जिसके लिए उन्हें (लड़कियों)को कोई सजा नहीं दी जा सकती है । क्योंकि भारतीय संविधान सबों को समता , स्वतंत्रता , मौलिकता और मानवाधिकार का पूर्ण अधिकार देता है ।चाहे स्त्री हो या पुरुष ! ऐसे कृत्य का परिणाम ही है की राष्ट्र भी शर्मसार है ।

मनकेश्वर महाराज “भट्ट”
रामपुर डेहरू, मधेपुरा , बिहार

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