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सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे मुफ्त का चन्दन घिस मेरे नंदन

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में 576 सरकारी बंगलों पर रिटायर्ड अधिकारियों और पूर्व सांसदों के अवैध कब्जे को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और ऐसे लोगों का सामान सड़क पर फेंक कर बंगला खाली करवाने को कहा है।
सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे मुफ्त का चन्दन घिस मेरे नंदन की कहावत को चरितार्थ करता है क्योंकि यहाँ पानी बिजली सहित बहुत सी सुविधाएं सस्ती और मुफ्त मिलती है। देश की सर्वोच्च अदालत सहित विभिन्न प्रदेशों के न्यायालयों ने अनेक बार सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जों को लेकर अपने फैसलों में सख्त रुख अपनाया मगर हमारे कथित जन प्रतिनिधियों और नौकरशाहों पर कोई असर नहीं हुआ। कानून बनाने वाले वर्ग ने ही कानून की धज्जिया उड़ाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। यह प्रकरण केवल देश की राजधानी दिल्ली तक ही सीमित नहीं है अपितु विभिन्न प्रदेशों की राजधानियों में भी माननीय लोगों ने जन सम्पति को अवैध रूप से कब्जा रखा है। कुछ लोगों ने कानून की गलियां निकाल रखी है तो कुछ दादागिरी से रह रहे है। बहुत से लोगों ने सरकारी सम्पतियों को किराये पर उठा रखा है। सरकारें भी असहाय है। अनेक प्रदेशों में पूर्व मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने कानून को ठेंगा दिखाकर अवैध कब्जों का रास्ता निकाल रखा है। दिल्ली की बात करें तो नई लोकसभा के बहुत से सदस्य अब तक पात्र होते हुए भी सरकारी मकान प्राप्त नहीं कर सके है वहीँ चुनाव हारने वाले अब तक मुफ्त सुविधाओं का लुत्फ उठा रहे है। लोकसभा चुनाव के बाद से 8 माह से भी ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन दर्जनों नए सांसदों को सरकारी आवास नहीं मिल पाया है। वे अपने प्रदेशों के अतिथिगृहों या वेस्टर्न कोर्ट में रहने को विवश हैं। जनप्रतिनिधियों के बारे में आम धरना है कि वो एक उच्च मानदंड स्थापित करेंगे। लेकिन व्यावहारिक तौर पर तस्वीर कुछ अलग ही है। दिल्ली के हाई प्रोफाइल लुटियन जोन में रहना सभी को अच्छा लगता है। अगर ये सुविधा सरकार की तरफ से मुफ्त या सस्ती दर पर मिले तो क्या कहने है । ऐसे लोग जो किसी सदन के सदस्य नहीं है मगर जोर जबरदस्ती से कानून को ठेंगा दिखाते है उन्हें जबरिया बेदखल करना सर्वथा उचित और न्याय संगत है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी बंगलों में अवैध कब्जे को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने 550 से अधिक सरकारी बंगलों में सेवानिवृत्त अधिकारियों और पूर्व सांसदों के अवैध रूप से रहने के मामले में आवास मंत्रालय को और केंद्र को दो सप्ताह के भीतर खाली कराने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ ने कई वर्षों से सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे को ‘साजिश’ के समान बताया। पीठ ने सरकार को अवैध निवासियों पर बकाया लाखों रुपये की वसूली का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगर सरकारी आवास को खाली कराने के खिलाफ किसी अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा रोक लगाई जाती है तो ऐसे आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा आवास तुरंत खाली कराए जाएं। अदालत ने आवास मंत्रालय के सचिव पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को केंद्र से पूछा था कि ऐसे कितने सरकारी बंगले हैं, जिन पर पूर्व सांसदों, विधायकों या नौकरशाहों का कब्जा है और ये कब्जा कितने समय से है।
अदालत ने यह आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पूर्व सांसदों, विधायकों और नौकरशाहों ने कई सरकारी आवासों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। कोर्ट ने टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी का जिक्र करते हुए कहा, यदि कोई स्टे नहीं है (किसी अन्य कोर्ट से खाली करने को लेकर), वे खुद आवास खाली नहीं करते हैं तो दो सप्ताह में उनका सारा सामान सड़क पर रख दें। कोर्ट ने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसे से आप उन्हें सालों से मुफ्त घर, बिजली और पानी दे रहे हैं। कुछ मामलों में आवंटियों की मृत्यु हो चुकी है और उनके वारिस इन घरों में रह रहे हैं। कोर्ट ने इसे मंत्रालय की अक्षमता बताया। कोर्ट ने कहा यहां तक कहा कि आपके अधिकारियों का आपका सुस्त रवैया मिलीभगत की ओर इशारा करता है और इतने लंबे समय तक मिलीभगत आईपीसी के तहत साजिश है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी .32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

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