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व्यंग्य : नोट के बदले वोट नहीं…

‘चुनाव’ नाम का एक शहर था। वहां के सभी लोग सहमे हुए थे। कुछ दिन पहले तक वे मिलजुलकर रहते थे। लेकिन अचानक नेताओं की बढ़ती आवाजाही से वे खतरे में आ गए।
पिछले कुछ दिनों से नेता छिप-छिपकर उनके घर आने-जाने लगे। नेता कब, कैसे और कहां से आ रहे हैं, यह कोई नहीं जानता था। जनता चौकस नेताओं के झूठे वायदों से बचने की कोशिश कर रही थी। लेकिन नेतागण इतने होशियार थे कि वो हर बार की तरह जनता को बेवकूफ बनाने की सभी कोशिशें करने पर अड़े थे। झूठे वायदों का सिलसिला रुका नहीं। जनता ने आखिर यह निर्णय लिया कि कुछ भी हो इस बार हम नेताओं के झूठे वायदों के चंगुल में नहीं फंसेंगे।
उसी शहर में एक लड़की है, जिसे शिक्षा के नाम से जाना जाता था। वह अत्यंत बुद्धिमान लड़की थी। उसका मानना था कि जो भी व्यक्ति उसका साथ देगा वह उन्हें नेताओं के झूठे वायदों से निजात दिला सकती है। वह सभी लोगों के घर गई। उसने पाया कि नेताओं ने बड़ी चालाकी से झूठे-झूठे वायदे कर भोली-भाली जनता को अपने चंगुल में फँसा लिया था।
वह सोचने लगी कि जनता को कैसे समझा जाए। उसे एक उपाय सूझा। उसे पता चल गया था कि जनता बड़ी लालची है। वह नेताओं के झूठे वायदों में यूँ ही फँस जाती है।
ओह…तो नेतागण जनता के इसी लालच को भुनाने में लगे हैं। उसे अब यह पता लगाना था कि नेता-नेता कैसे वायदे कर रहे हैं।

वह मानती थी कि कुछ नेता बड़े धूर्त होते हैं। कुछ नेता अच्छे होते हैं। फिर धूर्त और अच्छे नेताओं को पहचाने कैसें? भोली-भाली जनता को बचाए कैसे? इसके लिए उसने जनता को कुछ उपाय बताए। उसने जनता को सिखाया कि अबकी बार नेता आपके घर आएँ तो उनसे क्या, कहाँ, कब, कैसे, कौन और कितना जैसे प्रश्न करे।
उसने जनता को बताया कि जो नेता आपको रहने के लिए बंगला, खाने के लिए फाई स्टार भोजन, पीने के लिए शराब, जरूरतों के लिए सोना-चाँदी, टी.वी., मिक्सी, कूकर बाँटते फिरेंगे, वे धूर्त नेता होंगे। इनकी बातों में आकर यदि उन्हें वोट दे दिया तो वे आपको आने वाले पाँच वर्षों तक जीते जी नरक के दर्शन करवा देंगे।
जब शिक्षा से यह पूछा गया कि वे किन्हें वोट दें तो इसके बदले में उसने उत्तर देते हुए कहा, हमें उन्हीं लोगों को वोट देना चाहिए जो हमें वोट के बदले नोट न देकर अगले पाँच वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती-बाड़ी, सुप्रशासन तथा आम लोगों के सुखद जीवन व्यापन के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। यदि इसके बदले वे आपको दिन में रात के सपने दिखाते हैं तो समझ जाना चाहिए कि आने वाले दिनों में चुनाव शहर का बेड़ा गर्क हो जाएगा।
शिक्षा ने आगे कहा कि भोली-भाली जनता को जागरुक बनकर नेताओं से यह प्रश्न करें वे समाज की भलाई के लिए क्या कर सकते हैं, कब तक कर सकते हैं, कौन कर सकते हैं, कहाँ तक कर सकते हैं, कैसे कर सकते हैं, कितना कर सकते हैं और अंतिम प्रश्न पूछना अवश्य पूछना चाहिए कि वे यह सब क्यों नहीं कर सकते हैं।
शिक्षा बिटिया की बातें धीरे-धीरे समझ में आ रही थी। अब बारी आपकी है। क्या आप इस बार नोट के बदले वोट की जगह समाज हित के लिए वोट करने के लिए तैयार हैं?

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त
सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाना सरकार
चरवाणीः 73 8657 8657, Email: [email protected]
(https://hi.wikipedia.org/s/glu8)

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