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व्यंग्य : चमचा हर पल राखिए चमचा जीवन फूल

सड़क से लेकर सत्ता के गलियारे तक। चढ़ती दोपहर से लेकर अमावस के अंधियारे तक। सर्वत्र चमचों का ही राज चलता है। चमचों से ही सारा काज फलता है। बिन चमचा हर कोई ठंडे जल से ही जलता है। बिन चमचा साधे कभी कोई कार्य संभव नहीं हो पाया है। कहा कि गुलाम लोग ही सबसे अधिक गुलामी कराना चाहते हैं। यह बात चमचों पर ही लागू होती है। दूसरों की चमचागीरी करनेवालों को भी अपनी चमचई करनेवाले प्रिय होते हैं। दलाल देव कहते हैं कि मेरे घर चमचा आया कुछ मंगल गीत गाओ सखि! दलाल देव हाथ-पांव जोड़ के सबको तैयार करता है। स्वामी और चमच देव दोनों का मिलन हुआ है। स्वामी के पास चमचा दौड़ कर जाता है। चमचे के पास स्वामी दौड़कर जाता है। चमचा नंगे पांव दौड़ के चला आता है। जब स्वामी उसको पुकार लगाते हैं तो चमचा कुत्ते की माफिक चरण चाटने के लिए चमचासन लगाकर ध्यान मग्न हो जाता है। चमचा छोटा हो या बड़ा। हल्का हो या भारी। नर हो या नारी। इसमें झुक-झुक कर कोर्निश करने वाले गुण अवश्य होते हैं। गिरते हुए जब मैंने चमचा नाम लिया है तब मुझे जल्दी से थाम लिया है। मेरे कुछ भी ऐसा काम हो जाए। मुझ चमचे के भी चमचा हो जाए।

चमचे के एक बार शरण में जाने की देर है। एक बार शरण में जाते ही चमचे की कृपा आनी शुरू हो जाती। जिसे चमचागीरी आती हो उसे कोई भी तरक्की से नहीं रोक सकता। चमचागर्दी मचाने पर मंत्री पद पाने से कोई नहीं रोक सकता। स्वामी खुद भी एक विशिष्ट प्रकार का चमचा होता है। तब चमचागीरी सीखना बहुत जरूरी है। चमचारण्य अकादमी में अपने चमचत्व के चमत्कार करते रहने चाहिए। चमचापुराण में कहा गया- ‘जी हुजूरी डट कर करिए। भले ही काम कभी मत कीजिए। बॉस इज आलवेज राइट मंत्र का निरंतर जाप करते रहिए। जी-जान से चमचई के काम में लग जाइए।’ तुम अपने स्वामी पर कृपा करते हो श्री चमचे! उनको अपने माथे पर रखते हो श्री चमचे! तुम्हारे चरणों में मेरा भी इंतजाम हो जाए। हे चमचे! चलो अब चमचा चमचा हो जाए। जय चमचा, जय चमचा, जय चमचा! जय श्री चमचे! चमचा भवसागर को पार कराने वाला है। चमचा सारे संसार सागर के सारे कष्टों को दूर कराने वाला है। चमचे में सहस्त्र गुण चमचा सदा सहाय। रात हो या दिन या फिर तपती धूप। चमचा हर पल राखिए चमचा जीवन फूल। जिसके पास चमचे होते हैं वह आठ भुवन नव खंडों का राजा होता है। खीसे में धर लीजिए चमचे चार हजार। चापलूसी की बीन पर नाच उठे संसार।

रामविलास जांगिड़,
18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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