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संविधान और नागरिकता विषय पर विचार गोष्ठी संपन्न

विजय न्यूज़ नेटवर्क। शाहिद नक़वी
प्ररयागराज। सीएए, एनआरसी, एनआरपी के विरूद्ध रोशन बाग के मंसूर अली पार्क का संघर्ष उतार चढाव के बीच ५०वे दिन में प्रवेश करने पर खुशी इजहार कर संघर्ष को सहयोग कर रही सभी प्रगतिशील ताकतो को सलाम करते हुए सभा की कार्यवाही आगे बढ़ाया।उधर शहर मे ही सीएए एनआरसी एनपीआर विरोधी अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद द्वारा संविधान और नागरिकता विषय पर विचार गोष्ठी दौलत हुसैन इंटर कॉलेज नूरुल्ला रोड इलाहाबाद पर आयोजित हुयी।99 पर्सेंट लोगों की लड़ाई एक परसेंट लोगों से है एक परसेंट लोग 99 परसेंट लोगों को अलग अलग करके राज कर रहे हैं। इतनी बड़ी ताकत से लड़ने के लिए हमें महात्मा गांधी अंबेडकर, भगत सिंह, सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, पेरियार के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। उस बातें महाराष्ट्र के पूर्व न्यायाधीश मा. कोलसे पाटिल ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि संविधान की शुरुआत कई तरह से हो सकती थी लेकिन उस समय बहुत बहस के बाद ‘ हम भारत के लोग ‘ से शुरु किया गया। जिससे जनता की ताकत स्थापित होती है।उन्होने आरोप लगाया कि उस समय जो संविधान के खिलाफ थे वही ये कानून लाए हैं।जिससे वे संविधान को ख़त्म करना चाहते हैं क्योंकि संविधान समानता का अधिकार देता है जिसको सत्ता बर्दास्त नहीं करना चाहती है।उन्होंने कहा कि आज एक बड़ी आबादी को दोयम दर्जे की शिक्षा प्रदान की जा रही है,ताकि लोग बराबरी की लड़ाई न लड़ सकें। सत्ता धारी ताकतें हमें वास्तविक दुनिया के बजाय काल्पनिक दुनिया की ओर ले जाना चाहते हैं ताकि वास्तविक लड़ाई न लड़ी जा सके। उन्होंने जजों से जस्टिस मुरलीधरन की तरह बनने की अपील करते हुए कहा कि हम सब को इंसानियत व मानवता के लिए लड़ना है, काम करना है इसके लिए घर – घर, गांव -गांव जाना होगा।

मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल अजीज कुरेशी ने न पाने पर दुःख व्यक्त करते हुए अपने वक्तव्य को रिकार्ड कर भेजा, जिसमे उन्होंने सीएए को संविधान विरोधी बताया और इसके खिलाफ हो रहे आंदोलन को देश की रक्षा का आंदोलन बताया।सम्मेलन को हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वेश ने संबोधित करते हुए इसके नागरिकता के बारे में संविधान के प्रावधानों की चर्चा की। सम्मेलन को प्रो. अली अहमद फातमी ने संबोधित करते हुए साझा संस्कृति बारे में अनेक उदाहरण रखा। सम्मेलन को पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी,जावेद मोहम्मद,सहित विभिन्न जिलों से आये अधिवक्ताओं सहित अधिवक्ता मोहम्मद सईद, नाथूराम बौद्ध, राम कुमार गौतम , राकेश प्रसाद, आदि ने संबोधित किया।सम्मेलन में एक आठ सूत्रीय प्रस्ताव पास भी किया गया, जिसमें,प्रस्ताव पारित करते हुए कई मांगे मांगी गई।कहा गया कि शांतिपूर्ण ढंग से महीनों से प्रदर्शन कर रहे लोगों को प्रताड़ित करने, इनपर हमला करने, धमकी देने, उन्हें बार-बार नोटिस भेजने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।इसके अलावा न्यायधीशों पर सरकारी दबाव डालने, न्याय की प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप रोकने की भी मांग की गयी।

सम्मेलन के दूसरे सत्र का संचालन अधिवक्ता माता प्रसाद पाल ने किया तथा तीसरे सत्र का संचालन काशन सिद्दीकी और नौशाद गयूर ने किया।इस दौरान अधिवक्ता आशुतोष तिवारी सरताज अहमद सिद्धकी आकिब अख्तर खान, रेहान जैदी, शमीमुद्दीन, मोहम्मद उस्मान, डी. एन. यादव, बदिउज्जमा, धीरेन्द्र यादव, बिपिन बिहारी, नफीस खान आदि सैकड़ो अधिवक्ता उपस्थित रहे।सम्मेलन के बाद पुलिस द्वारा किये जा रहे उत्पीडन के खिलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए प्रदेशव्यापी अधिवक्तों की लीगल सेल बनाने का फैसला लिया गया।

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