National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

मूवी रिव्यू : शिकारा

बीस साल पहले निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा रितिक-संजय दत्त अभिनीत ‘मिशन कश्मीर’ लाए थे। एक बार फिर वे शिकारा के जरिए दर्शकों को नब्बे के उस दशक में ले चलते हैं, जब तकरीबन 4 लाख कश्मीरी पंडितों को अपने घरों से निकाल कर विस्थापित कर दिया गया था। फिल्म के संवेदनशील विषय के कारण फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी, मगर फाइनली फिल्म को रिलीज की मंजूरी मिल गई है।
कहानी फ्लैशबैक से शुरू होती है, जहां कश्मीर में अमन चैन था और खूबसूरत वादियों में कश्मीरी पंडित कवि और प्रफेसर शिव धर (आदिल खान) के मन में शांति (सादिया खान) के प्रति प्रेम पनपता है। वह अपने दिल का हाल अपने जिगरी दोस्त को बताता है और दोस्त उन दोनों के प्यार को शादी की मंजिल तक ले जाता है। फिर अलगाव की चिंगारी फूटती है और वह एक ऐसी भीषण आग को जन्म लेती है, जिससे बचने के लिए शिव और शांति ही नहीं बल्कि लाखों कश्मीरी पंडितों को अपने घर से बेघर होने पर मजबूर कर दिया जाता है। इस सिलसिले में शिव और शांति कई अपनों को भी खोते हैं। इन लोगों को विस्थापित हुए 30 हो चुके हैं, मगर अब भी इन्हें अपनी घर वापसी की उम्मीद है। इस बीच इनकी जिंदगियां कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरती हैं, मगर शिव और शांति का एक -दूसरे के प्रति प्यार समर्पण कम नहीं होता।

निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की तारीफ करनी होगी, जो उन्होंने एक अटूट प्रेम कहानी के जरिए कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के मुद्दे को उठाया। कहानी में कई परतें हैं, जो दर्शाती हैं कि किस तरह से अलगाववादी और स्वार्थी तत्वों ने कश्मीर की अखंडता को खंडित किया, मगर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती जाती है, वह एक मुद्दे वाली फिल्म कम प्रेम कहानी ज्यादा नजर आती है। निर्देशक ने इस मुद्दे को उठाया जरूर मगर सेफ होने के चक्कर में वे इसकी गहराई में नहीं उतरे। फिल्म का नरेटिव सुस्त है, मगर रंगराजन रामबरदन की सिनेमटोग्राफी खूबसूरत है। इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी खिंच जाती है और क्लाइमैक्स का अंदाजा आपको पहले ही हो जाता है। ए आर रहमान का बैकग्राउंड स्कोर विषय की संवेदनशीलता को इस खूबी से दर्शाता है कि दिल में उतर जाता है। संदेश शांडिल्य का संगीत फिल्म को मजबूती प्रदान करता है।

आदिल खान और सादिया खान जैसे दोनों ही नए चेहरों ने सशक्त अभिनय अदायगी की है। कहानी में दोनों ही किरदार 30 साल के टाइम फ्रेम को अदा करते नजर आते हैं अतः युवा सादिया जितनी खूबसूरत और मासूम लगी हैं, उतनी ही अधेड़ अवस्था में भी जंची हैं। आदिल ने भी यंग और अडल्ट दोनों ही पार्ट को बखूबी निभाया है। जैन खान दुर्रानी और प्रियांशु चटर्जी ने अपने यादगार किरदारों से कहानी को बल दिया है। सहयोगी किरदार औसत हैं।

क्यों देखें-प्रेम कहानियों के शौकीन और कश्मीरी पंडितों के प्रति उत्सुक लोग यह फिल्म देख सकते हैं।

Print Friendly, PDF & Email
Translate »