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लघुकथा : चपन का सपना

मिस्टर सुरेश सौरभ अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे।इसी बीच उन्हें एक वित्त रहित इंटर कॉलेज में पढ़ाने की जिम्मेदारी मिल गई। जिससे घर-परिवार चलाने का इंतजाम हो चुका था।पर सुरेश अपने बचपन से ही चाहते थे,दुनिया उन्हें उनके लेखनी से पहचाने।उन्हें शुरुआत से ही पत्र-पत्रिकाओं में लिखने का शौक था।उनकी छोटी-छोटी रचनाएं छपती भी थी।जिससे वे काफी खुश होते थे।लेकिन बाद में पढ़ाई की व्यस्तता और नौकरी की तलाश में लेखन थम चुका था।इसी बीच उनकी शादी भी हो गई थी।अब उनके घर एक प्यारी सी बिटिया भी थी।कॉलेज और घर परिवार की जिम्मेवारी से फुर्सत ही नहीं मिलता था।जब कभी एकांत में होते तो बचपन का सपना टूटता हुआ नजर आता।जिसे सोच कर उनका जी घबराता रहता था।एक दिन अभिन्न मित्र चितरंजन गोप और गोपेंद्र गौतम से मुलाकात हुई।जहां बातों ही बातों में इन्होंने अपने मन में छुपे हुए दर्द को उन लोगों के सामने रख दिया।दोनों ने कहा इस समस्या से निपटने का उपाय खुद आपके पास है।वही आपके उम्मीद की किरण है जो आपको पसंद भी है। सुरेश ने पूछा वह क्या?उन लोगों ने बताया आपका पसंदीदा लेखन!जिसके सहारे आप फिर से देश दुनिया में अपनी लेखनी का जलवा बिखेर सकते हैं,तो क्यों नहीं फिर से लिखना शुरु कर देते हैं? सुरेश को तो मन मांगी मुराद मिल गई,क्योंकि उनके मित्रों ने उन्हें उनका पसंदीदा सलाह जो दे दिया था।उसी दिन से सुरेश फिर से लिखने लगे।अब उनकी साहित्य के हर विधा में प्रतिदिन देश-दुनिया की पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएं लगातार छप रही हैं।आज सुरेश सौरभ साहित्य जगत के चमकता हुआ सितारा बने हुए हैं।

गोपेंद्र कुमार गौतम
देवदत्तपुर दाऊदनगर
औरंगाबाद बिहार
9507341433

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