न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

छिः! छिः! 

  गुब्बारे वाला निकला। बच्चा अपनी माँ से बोला गुब्बारा… गुब्बारा! गुब्बारा! लूँगा।… छीः! छीः! इसके सारे गुब्बारे नाले में गिर गए थे। छीः छीः लग गई थी। मत लेना।’ माँ उसे समझाते हुए बोली। बच्चा शान्त हो गया। थोड़ी देर बाद दरवाजे से चने मसाले वाला, आवाज लगाते हुए निकला..चने.ऽऽऽ..मसाले वाले चने। बढ़िया चने!… बच्चे ने माँ से जिद की-चने! चने! चने! मम्मी चने लूँगा।… छिः छिः इसके सारे चने गंदी नाली में गिर गये थे, वहीं से निकाल कर लाया है, मत लेना। अच्छे बच्चे गंदी नाली के चने नहीं खाते। बच्चा शान्त हो गया।… वह किराने की दुकान पर राशन लेने गई। बच्चे ने फिर जिद की-चाकलेट! चाकलेट! चाकलेट!़..छिः छिः छिः…अब बच्चा शान्त हो गया। रात को बच्चा खाना खा रहा था, खाते-खाते वह अचानक रोने लगा।.. क्या हुआ! क्या हुआ! बेटा, क्या हुआ मेरे लाल!.. मम्मी उसे समझाते हुए बोलीं। नहीं खाऊंगा सब छीः! छीः! लग रहा है। फिर खासे जोर-जोर से वह रोने लगा। मजूरी करके लौटा उसका पति हैरत से बोला-क्या बात है? सावित्री! मुन्ना खाना क्यों नहीं खा रहा?..‘इसके दिमाग खराब हो रहे हैं। रहेगा झोपड़ी में, ख्वाब देखेगा घंटा घर के।-चिढ़ते हुए माँ बोली।.. बच्चा रोए जा रहा।
’अबे!खा-खा वर्ना दूंगा एक जोर से कनपटी पर-बाप ने घुड़कते हुए मुन्ने को डांटा,तो मुन्ना धीरे-धीरे रोते हुए टूंगने लगा।
’कहाँ से हराम का इतना आऊँ, जो तुझे दिन-रात चटाऊँ-झल्लाते हुए माँ बोली।
अब बाप दुखी दिल से बोला-हम गरीब बेबस मजदूरों के लिए, तो दो जून की रोटी के अलावा सब छिः छिः ही है। यही हमारा नसीब ही है।
सुरेश सौरभ
Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar