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प्राचीन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान द्वारा सामाजिक रूपांतरण संभव:  दिव्य ज्योति वेद मंदिर

नई दिल्ली. गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा संस्थापित दिव्य ज्योति वेद मंदिर एक शोध व अनुसंधान संस्था है जिसका एकमात्र ध्येय प्राचीन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान द्वारा सामाजिक रूपांतरण करना है। वैदिक संस्कृति के प्रसार एवं वेदमंत्रोच्चारण की मौखिक परम्परा को कायम करने तथा संस्कृत भाषा को व्यवहारिक भाषा बनाने हेतु दिव्य ज्योति वेद मंदिर देश भर में कार्यरत है। इसी कड़ी में वैश्विक महामारी COVID-19 के लॉकडाऊन अवधि में भी दिव्य ज्योति वेद मंदिर द्वारा विश्व स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी की नियमित कक्षाएं प्रारंभ की गई जिनमें वेद मंत्रों के विशुद्ध व सस्वर उच्चारण को सिखाया गया। इसी श्रृंखला में शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी की कक्षा के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर दीक्षांत समारोह तथा प्रशस्ति-पत्र वितरण का आयोजन किया गया। स्वामी अर्जुनानंद जी ने समारोह की शुरुआत करते हुए वैश्विक स्तर पर चल रहे वेद मंत्रों के शुद्ध उच्चारण के विषय में सभी को अवगत कराया। मंत्रों  की महिमा को व्यक्त करते हुए स्वामी जी ने बताया  कि संगीत ईश्वर के नजदीक होता है व वेद मंत्रों के शुद्ध एवं व्याकरण युक्त उच्चारण से सकारात्मक प्रभाव होते हैं। आगे स्वामी जी ने बताया कि किस प्रकार महाराज जी की कृपा से सभी को वेद मंत्रों के उच्चारण का सुअवसर मिल पाया एवं लॉकडाउन के कठिन समय में भी वेद मंत्रों के उच्चारण का एक सत्र संपन्न हो पाया है।

साथ ही वेद मंत्र उच्चारण कार्यक्रम के संचालन सम्बंधी चुनौतियों के विषय में प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने ग्रामीण स्थानों में इंटरनेट एवं स्थानीय भाषा की कठिनाईओं को श्रोतागण के सामने रखते हुए बताया की किस प्रकार दिव्य ज्योति की संपूर्ण टीम ने सञ्चालन सम्बन्धी चुनौतियों का डटकर सामना किया और फलस्वरूप वेद मंत्रों की कक्षाएँ निरंतर बाधा रहित चलती रही।  कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया तथा वेदपाठी विद्यार्थियों ने अपने अनुभव एवं विचार सभी के साथ साझा किये। आसाम ब्रांच से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की प्रचारक साध्वी देवेशी भारती जी ने वेद मंत्रों के उच्चारण में प्रांतीय भाषा से सम्बन्धित कठिनाइयों  को सबके सामने रखते हुए बताया कि किस प्रकार निरंतर प्रेरणाओं के माध्यम से आसाम प्रान्त के वेदपाठी बंधुओं को प्रेरित किया गया कि वे वेदपाठ की गतिविधि को जारी रखें। बरेली ब्रांच से साध्वी सुरजीता भारती जी ने भी वेद पाठन से सम्बंधित अपने विचार श्रोतागणों के सामने रखते हुए बताया की किस प्रकार लॉक डाउन जैसे तनावपूर्ण वातावरण में भी महाराज जी कृपा से सभी को घर बैठे वेदपाठ का लाभ मिल पाया जिससे न केवल वेदपाठियों ने मंत्रोच्चारण सीखा अपितु तनाव एवं नकारात्मक परिस्थिति पर विजय प्राप्त की और शांति व सकारात्मकता का अनुभव किया।   ग्वालियर ब्रांच से साध्वी मदालसा भारती जी ने वेद शास्त्रों की महत्ता का गुणगान करते हुए बताया की वेद शास्त्रो को कभी नहीं बदला जा सकता किन्तु वेद शास्त्र व्यक्ति को ज़रूर बदल सकते है जिससे सृष्टि में एक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। तत्पश्चात देहरादून से साध्वी अरुणिमा भारती जी ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के सम्बन्ध में महाराज जी द्वारा व्यक्त किये गए विचारों को सबसे साझा करते हुए बताया कि स्वामी  जी का यह एक स्वप्न्न था कि संस्कृत भाषा तथा वेद मंत्रों का ज्ञान समाज के हर वर्ग, हर जाति एवं विशेषकर नारियों तक पहुंचे एवं आज हम उनके उस स्वप्न्न को साकार होते देख सकते हैं। 

दिव्य ज्योति वेद मंदिर के कार्य क्षेत्र की पहुँच के बारे में श्रोतागणों को अवगत कराने के लिए एक लघु वीडियो का प्रसारण किया गया जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में हो रही वेद पाठ, श्लोकाद्याय, शोध संशोधन, शब्दावली, प्रशिक्षण, एवं शिक्षक प्रशिक्षण इत्यादि से सम्बंधित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गयी।  तत्पश्चात मेरठ से साध्वी लोकेशा भारती जी ने बताया कि किस प्रकार महाराज जी ने हतोत्साहित लोगों को समय समय पर प्रेरणाएँ प्रदान कर उनका उत्साह वर्धन किया एवं उन्हें सतत अभ्यासशील रहने के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात स्वामी हृदेशानन्द जी ने रुद्रीपाठ के पाठन से सम्बंधित महाराज जी की एक प्रेरणा को संगत के सामने हुए कहा कि जब एक व्यक्ति सच्चे गुरु की शरण में जाता है तब उसे अपने गुरु से एक औषधि प्राप्त होती है जिससे उसके रोगो का निदान संभव होता है। अंत में साध्वी दीपा भारती जी ने कार्यक्रम को समापन की ओर ले जाते हुए एक लघु वीडियो के द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं परिणाम को सबके साथ वर्चुअल माध्यम से सांझा किया।  साध्वी जी ने अंत में सभी श्रोतागणों, शिक्षकों, प्रचारकों , गुरुभाई , गुरुबहनो एवं सेवादारों का आभार व्यक्त किया एवं अंत में शांति पाठ के पाठन के पश्चात कार्यक्रम को विराम दिया गया।

 

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