National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

कैंसर दिवस पर विशेष : ‘जो डर गया समझो मर गया

वह कैंसर की महामारी से ग्रस्त थी। दो बार हमला हुआ। वह शुरू में पीड़ित थी लेकिन उसे कोई खतरा नहीं था। फिर भी डरी हुई थी। मजाल जो कोई उसका मनोबल गिरा सकें। मुस्कान बनाए रखी। हौसला सातवें आसमान पर था। मानव कैंसर उससे कह रहा था कि वह अपने दिलबर से मुझे हराने का प्रयास करो। उसे आज अपने जीवन की कहानी को प्रेरणास्रोत बनना ज़रूरी हो गया था। कैंसर की बीमारी ने उसे कुछ इस कदर घाट पहुंचाया था कि आज वह चोटी करने लायक नहीं रह गई या दूसरे शब्दों में कहें तो उसके सिर पर बाल ही नहीं रह गए थे। सारे बाल झड़ चुके थे।
उसका नाम राधा था। उसे प्यार से रानी कहकर पुकारते थे। तेलंगाना से थे। वे कुछ दशक पहले सिंगापुर चले गए और वहीं बस गए। उसने दो बार कैंसर से लड़ाई लड़ी और जीती। पहला है ब्रेस्ट कैंसर, दूसरा है लीवर और स्पाइनल कैंसर। कई साल पहले कीमोथेरेपी से गुजरने के बाद, उसने अपना पूरा शरीर खो दिया था। स्वाभाविक रूप से कोई भी आदमी अपनी शादी के दिन खूबसूरत दिखना चाहता है। इसमें काफी मेहनत लगती है। लेकिन कैंसर पीड़ितों के लिए यह आसान नहीं है। विशेष रूप से, कैंसर से बचे लोगों के लिए महिलाओं के लिए अधिक कठिन है। डॉक्टरों ने कैंसर के कारण उसके स्तनों को हटा दिया। कीमोथेरेपी के बाद, केश झड गए। शरीर कमजोर हो गया।

हालांकि, कई अन्य लोग जो कैंसर से जूझ रहे हैं, वह अब एक इंटरनेट प्लेटफॉर्म से जुड़कर सहायता की गुहार लगाते हैं। राधा ने दुल्हन की तरह कपड़े पहने और फोटोशूट करवाया। मजे की बात यह है कि उसने इस शूट में किसी भी फोटो में अपना हेयरलेस हेड छिपाने की कोशिश नहीं की। सभी तस्वीरों में उसका सिर दिखाई दे रहा था। रीति रिवाज के अनुसार कुछ स्थानों पर उसे अपना सिर ढकना पड़ता था। किंतु उसका दुर्भाग्य कहिए या फोटो की मजबूरी कि हर जगह पर बिना बालों का उसका सर दिखाई पड़ जाता था। ऐसे फोटो में कहीं भी राधा के चेहरे पर शिकन दिखाई नहीं दी। उसने ये तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थी। अपने पोस्ट में, राधा ने ऐसे शब्द लिखे जो दूसरों को मुश्किल समय में बहादुर बनने और उदास न होने के लिए प्रेरित करते थे। सबसे पहले उसे डर था कि कहीं सिंगापुर में एक भारतीय परिवार की 28 साल की लड़की डर जाएगी तो देश के बारे में क्या सोचेंगे। मम्मी, पापा और बड़ी बहुत घबरा रहे थे। इस घबराहट में वे बहुत रोते थे। उनका रोना मुझसे देखा नहीं जाता था। मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। मैंने कई वर्षों तक इंजीनियर के रूप में काम किया। मुझे कुचिपुड़ी नृत्य पसंद था। मुझे रसोई और कर्नाटक संगीत पसंद था। यात्राएँ करना और नए दोस्त बनाना, मेकअप करना भी पसंद था। 2015 में, मुझे स्तन कैंसर का पता चला था। तब वह आरंभिक दशा में था। यह कुछ ऐसा नहीं था जो जीवन को गंभीरता से लेने की ज़रूरत थी। लेकिन वह सब कैंसर के इलाज के बाद बदल गया। यह डरावना था, लेकिन इससे बाहर निकलने की उम्मीद थी। कुछ सालों तक इलाज कराने के बाद तबीयत खराब हो गई। लेकिन 2018 में, कैंसर फिर से शुरू हो गया। इस बार यह स्तन से रीढ़ की हड्डी तक फैल गई। इसके कारण, मैं अधिक चिंतित हो गई। ऐसा लग रहा था कि मौत की ओर जा रही थी। कैंसर मनुष्य को शारीरिक और भावनात्मक रूप से कमजोर कर देता है। मुझे अकेला न होने का आभास दिलाने के लिए परिवार और करीबी रिश्तेदार मेरे साथ था। कैंसर के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता था। वास्तव में आदमी कैंसर से कम घबराहट से ज्यादा मरता है। इसके घबराहट से हमारे शरीर और मस्तिष्क पूरी तरह से बदल जाते हैं। उन परिस्थितियों का सामना करना एक मुश्किल काम था। मैं अब तक 16 बार कीमोथेरेपी करवा चुकी हूं। मनोवैज्ञानिक शिथिलता के अलावा, नकारात्मक विचार घेर लेते हैं। मेरा परिवार और कुछ दोस्त मेरा समर्थन करने के लिए वहां थे। लेकिन, बाकी दुनिया मुझसे दूर जाती दिख रही थी। इसलिए हमारी सास उन चीजों के बारे में बाहर किसी से बात नहीं करती थी। मुझे डर है कि मेरी बीमारी मुझे बेहतर महसूस नहीं कराएंगी। हालाँकि, मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं थी। मैंने इंस्टाग्राम पर कैंसर के बारे में बातें पोस्ट करना शुरू कर दिया। जनता से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। जबकि यह चल रहा था … एक दिन बिस्तर पर लेटे हुए और टीवी पर एक फिल्म देखते हुए, मेरे दिमाग में कई विचार आ रहे थे। मैं जीवित रहूंगी या नहीं, मुझे पता नहीं। किंतु मैं आप सभी से एक बात कहना चाहती हूं…ज़िन्दगी उसी को गले लगाती है जो इसका सामना करने के लिए तैयार हूं। हो सकता है कैंसर मेरे शरीर को खत्म कर दे लेकिन मेरे आत्मबल, आत्मविश्वास और धैर्य को मिटाने की शक्ति इस दुनिया में किसी में नहीं है। क्योंकि
जिंदगी अकड़ दिखाती है, हर बार मुझे गिराकर।
उरतृप्त मैं खड़ी हो जाती हूं, साहस की उंगली थामकर।।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त
सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाना सरकार
चरवाणीः 73 8657 8657, Email: [email protected]
https://hi.wikipedia.org/s/glu8

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar