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बसंत पंचमी मनाने का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

बसंत पंचमी इस वर्ष 30 जनवरी 2020 को मनाई जाएगी। आईए जानकर लें, बसंत पंचमी मनाने का शास्त्रीय आधार!

श्री सरस्वती देवी की व्युत्पत्ति एवं अर्थ
‘सरसः अवती’, अर्थात् एक गति में ज्ञान देने वाली अर्थात् गति मति । निष्क्रिय ब्रह्मा का सक्रिय रूप; इसी लिए उन्हें ‘ब्रह्मा-विष्णु-महेश’, तीनों को गति देने वाली शक्ति कहते हैं ।

बसंत पंचमी पर श्री सरस्वती पूजन का शास्त्रीय आधार क्या है ?
उत्तर भारत में बसंत पंचमी पर श्री सरस्वती पूजन किया जाता है । इसका शास्त्रीय आधार इस प्रकार है – गणेश जयंती पर कार्यरत ‘इच्छा’ संबंधी गणेश तरंगों के प्रभाव से नव निर्मित ब्रह्मांड में एक मंडल (‘विद्यासे संबंधित पुरुषतत्त्व) कार्यरत होता है । इस मंडल की आकर्षण शक्ति के सूक्ष्म परिणाम से शक्ति रूपी तरंगें उत्पन्न होती हैं । इन्हें ‘प्रकृति स्वरूप विद्या से संबंधित सरस्वती-तरंगें’ कहा गया है । श्री गणेश जयंतीके उपरांत आनेवाले इस विद्यमान कनिषठरूपी तारक तरंगों के प्रवाह में (‘विद्यमान’ अर्थात् तत्काल निर्मित होकर कार्य हेतु सिद्ध हुआ; ‘कनिष्ठ रूपी’ अर्थात् संपूर्ण तारक प्रवाह का अंश), ब्रह्मा की इच्छा का सरस्वती रूपी अंश होता है । इसलिए सरस्वती पूजन से जीव को इस अंशतत्त्व का आवाहन कर, जीव के देह में बुद्धि केंद्र को जागृत कर, उसे सात्त्विक कार्य की दिशा प्रदान की जाती है ।

श्री सरस्वती देवी को ब्रह्मा की शक्ति क्यों मानते हैं ?
महासरस्वती देवी एवं श्री सरस्वतीदेवी ने क्रमशः निर्गुण एवं सगुण, दोनों स्तरों पर ब्रह्मा की शक्ति बनकर ब्रह्मांड की निर्मिति में ब्रह्मदेव का सहयोग किया । श्री सरस्वती देवी अर्थात् ब्रह्मा की निर्गुण अथवा सगुण स्तर पर कार्यरत शक्ति । ‘ब्रह्मा की शक्ति उससे एकरूप ही होती है । आवश्यकता अनुसार वह कार्यरत होती है ।’ मानव इस बात को समझ पाए, इसलिए कहते हैं, ‘श्री सरस्वती देवी ब्रह्मा की शक्ति हैं ।’

संदर्भ : सनातन-निर्मित लघुग्रंथ ‘श्रीसरस्वती’
कृतिका खत्री, सनातन संस्था, 9990227769

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