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कहानी : बदले की भावना

एक लड़का था । उसका नाम रवि था । वह अपने माँ बाप का इकलौता बेटा था । उसका बाप अमीर था । उसने अपने बेटे को हर चीज की छूट दे रखी थीं ।पर रवि को पढ़ाई पर ध्यान कम रहता था ।बड़े बाप एकलौता बेटा होने से वो काफी बिगड़ैल था।
वह कॉलेज में पढ़ता था कॉलेज के लड़के उससे डरते थे । बहुत लड़के उससे मुँह नही लगते।उसी कॉलेज में एक लड़का और पड़ता था उसका नाम प्रेम था ।वह अपने नाम के अनुरूप था
वह किसी से ज्यादा बात नहीं किया करता ।अपने काम से मतलब रखता था। कॉलेज में परीक्षा का दिन था सब अपनी अपनी जगह पर बैठ कर अपने पेपर का इंतजार कर रहे थे ।
आज रवि कॉलेज नही आया था प्रेम लिखने पढ़ने में तेज था
वह जल्दी ही अपनी कॉपी भर दिया वह कॉपी जमा करने जा ही रहा था कि इतने में रवि आ गया । उसने प्रेम से उसकी कॉपी छीन ली ।उसपर प्रेम ने रवि को समझया की यह मेरी कॉपी है वह अपनी कॉपी लेकर लिखे ।फिर भी रवि नहीं माना । जोरजबरदस्ती में प्रेम ने रवि को एक थप्पड़ जड़ दिया ।गुस्से से
आग बुलबुला हो गया वह उसपर झपटा ।तब तक कॉलेज के प्रोफेसर आ गए वह भी रवि पर गुस्सा हुए ।रवि पैर पटकता हुआ वहाँ से घर आ गया । उसने यह सब अपने पिता को कहा पिता ने कहा कोई बात नहीं वह पैसे देकर उसे नंबर दिला देगे ।पर बदले की आग ने रवि को चैन से सोने नहीं दिया ।सुबह वह कॉलेज गया ।और प्रेम को खोजने लगा प्रेम किसी काम से छत पर गया था रवि भी वहाँ पहुंच गया उसने प्रेम को पीछे से धक्का देना चाहा ।पर जैसे ही उसने उसे धक्का देना चाहा वह वहाँ से हट गया और रवि नीचे गिर गया ।हर ओर सोर मच गया सब उसे हॉस्पिटल ले कर गये। उसके पिता ने डॉक्टर से जितना पैसा खर्च हो वो देगे पर उसका बेटा ठीक हो जाये ।
ऑपरेशन हुआ डॉक्टर ने जबाब दे दिया वह अब कभी चल नही
सकता । प्रेम ने उसके पिता को कहा रवि के लिए डिग्री तो खरीद ली पर बेटे को अपाहिज बना दिया ।उसका बाप माँ सब रोने लगा कि काश उसने अपने बेटे को इतना लाड़ प्यार नही किया होता तो वो इतना बिगड़ता नही । रवि भी बहुत शर्मिंदा था
कल तक वो कॉलेज की शान हुआ करता था ।
आज उसके बदले की भावना ने उसे अपाहिज बना दिया था ।

गुलशन पाण्डेय
“पंचायत शिक्षिका”
हिंदी लेखिका
रामपुर डेहरू ,मधेपुरा , बिहार

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