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ऐसे बना बंदर कोरोना विशेषज्ञ

बाहर चारों और कोरोना छलांग लगा रहा था। नंदनवन अपार्टमेंट में एक बंदर कोरोना के सरकारी आंकड़ों की तरह गुलांटी मारा करता। वह लोगों को सरकारी कोरोना की तरह दांत दिखाता और कोरोना के नए-नए वेरिएंट जैसे खीं-खीं करके चिढ़ाता। अपार्टमेंट के गार्डन में लगे आम के पेड़ पर दिन भर धमाचौकड़ी मचाता। एक दिन एक चुहिया पेड़ पर जा चढ़ी और वह बंदर से दो डाली ऊपर जाकर बैठ गई। तब बंदर ने पूछा- अभी मर-मरा जाओगी। ऊपर क्यों आई हो? चुहिया बोली- चीकू खाने! बंदर बोला- लेकिन ये तो आम का पेड़ है। चुहिया बोली- तू ज्यादा सरकारी पटवारी मत बन। अभी खोपड़ी में बटका भरूंगी तो सारी गिरदावरी खत्म कर दूंगी। तुझे पता नहीं लॉकडाउन से पहले मैंने बहुत सारे चीकू जमा कर लिए थे। मैं चीकू अपने साथ लाई हूं। कहकर चुहिया चौथी डाल पर बैठ ऐसे गरजने लगी जैसे वह कोरोना की चौथी लहर हो। बंदर ने गुस्से में पूरे पेड़ को हिलाया। तब चुहिया नीचे गिर पड़ी। फिर बंदर लॉकडाउन में छुपते-छुपाते नंदन वन पहुंच गया। वहां एक पेड़ पर की डाली पर बैठ गया। तभी उसने देखा कि पेड़ के नीचे एक गहरे गड्ढे में एक शेर धंसा पड़ा है। वह इस गड्ढे से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है; लेकिन कोरोना गड्ढे में फंसी पूरी दुनिया के समान उसे भी कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

तभी बंदर की आंखें शेर से टकराई। बंदर ने शेर को गड्ढे में फंसा देख ललकारा। वह इस डाली से उस डाली पर उछलते-कूदते गुर्राते हुए कहने लगा- अरे ओ गधे! जंगल का राजा! स्साले सबको बेवकूफ बनाता है! राजा बनता फिरता है! लग गई न तेरी अकल ठिकाने! अब देखना मैं तेरी खालड़ी खींच डालूंगा। फिर उसमें नमक-मिर्च भरकर चमड़ी आजाद कर दूंगा। तेरे नाखून और बाल काटकर कोरोना मेडिकल मार्केट में बेच दूंगा। जहां तू कालाबाजारिओं के हत्थे चढ़ जाएगा। फिर इधर से उधर बेचा जाएगा। तुझे गधा बनाकर…। तभी उछल-कूद में बंदर का पंजा स्लिप हो गया और शेर के साथ वह भी गहरे गड्ढे में गिर पड़ा। बंदर तब घबराकर उठा। उसने शेर दो हाथ जोड़ते हुए कहा- विद्या माता की सौगंध! इस पेड़ की डाली की सौगंध! मैं तो सिर्फ माफी मांगने के लिए तुम्हारे पास कूदा हूं। गिरगिट की तरह बंदर अपनी बयानबाजी जारी कर रहा था। उसी पेड़ पर दो मुस्टंड चमगादड़ एक टहनी पर उल्टे लटके हुए कोरोना वैक्सीन के मीठे-मीठे गीत गा रहे थे। दोनों ने ही अभी-अभी ताजा राजनीतिक पार्टी ज्वाइन की थी। एक चमगादड़ ने आंख मारते हुए कहा- क्या कहते हो डियर? दूसरे चमगादड़ ने अपनी खोपड़ी कुचरते हुए कहा- कुछ नहीं इस बंदर को हमारी राष्ट्रीय दल-दल पार्टी (आरडीपी) का प्रवक्ता बना दिया जाए। यह बात सुनकर पहले चमगादड़ के दस्त लग गए। दस्त का दस्तूर जैसे ही बंदर पर गिरा वह जोश में आ गया और वह खड्डे से बाहर निकल कर हूक-हूक करने लगा। बाहर एक पक्का गधा राष्ट्रीय दल-दल पार्टी का आलाकमान खड़ा था। वह बंदर को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता संबंधी दायित्व का जॉइनिंग लेटर देकर हाथ जोड़ रहा था। आजकल यही बंदर राष्ट्रीय दल-दल पार्टी का मुख्य प्रवक्तानंद बन कर ‘कल सबको खा जाऊंगा’ (केएसकेजे) न्यूज़ चैनल पर कोरोना विशेषज्ञ के रूप में अपनी बातें बघार रहा है।

 

रामविलास जांगिड़

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