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सिस्टम की लापरवाही ने लील ली कई दर्जन जिंदगियां

-शाॅर्ट सर्किट से हुआ हादसा
-बिल्डिंग और कारखाना दोनों थे अवैध

रमेश ठाकुर, नई दिल्ली
दिल्ली के अनाजमंडी में रविवार को तड़के घटी दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने दिल्ली के सबसे बड़े उपहार सिनेमा आगकांड की यादें ताजा कर दीं। सुबह करीब सवा चार बजे उस वक्त घटी जब पूरी दिल्ली गहरी नींद में सो रही थी। लोगों की जब आंखें खुली तो कई लोग हमेशा के लिए अपनी आंखे बंद कर चुके थे। फिल्मीस्तान इलाके में जहां आग लगी वहां के स्थानीय लोग थोड़ी के लिए समझ ही नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या। पूरे इलाके में धुंआ का गुब्बार छाया हुआ था। धुंआ जब कुछ शांत हुआ तो लोगों को अंदाजा हुआ कि आग लगी है। घटना में हताहत लोग अपनी जान बचाने की भीग मांग रहे थे। लेकिन किसी का बस नहीं चल रहा था कि उन्हें कोई बचा सके। आग की लपटें और काला धुंआ अपने सबाव में था। मौत और आग का तांड़व करीब दो घंटे तक चला। स्थानीय लोगों ने धुंआ से दम घुटकर मरते हुए लोगों को अपनी आंखों से देखा। लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सके।
घटना के करीब पौने घंटे बाद बचाव और राहतकर्मी पहुंचे। लेकिन तब तक कई जिंदगियां तबाह हो चुकीं थी। घटना के 22 मिनट बाद फायर की चार गाड़िंयां पहुंची। उन्होंने देखा मामला बड़ा है तो 26 फायर ब्रिगेड की गाडियां और मौके पर बुलाया। उसके बाद पुलिस और नेताओं जमावड़ा शुरू होने लगा। राजनीतिक दलों के नेता हमेशा की तहर एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए।

शाॅर्ट सर्किट होने का कारण
जिस मकान में घटना घटी वह छह मंजिला है। जबकि बिजली मीटर लगाने की इजाजत तीसरे मंजिल तक ही थी। लेकिन भवन मालिक ने बिजली जबरदस्ती सभी मंजिलों पर लगाई पहुंचाई हुई थी। मीटरों पर ज्यादा लोड़ पड़ने के कारण ही शाॅट सर्किट हुआ जो हादसे का कारण बना। एक बिजली अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में नोटिस भी किया गया था। लेकिन चुपके से बिजली की चोरी की जा रही थी। बिल्डिंग कर्मिशियल थी तो मीटर भी कर्मिशियल लगा था। हाईटेंशन तार के कारण आग कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया।

फायर ब्रिगेट की एनओसी भी नहीं
हादसे का एक और कारण निकल कर आया। कर्मिशियल गतिविधियों के लिए फायर ब्रिगेड से एनओसी लेनी होती है वह भी नहीं ली गई। घटना के तुरंत बाद अरेस्ट किए गए मकान मालिक से पुलिस ने शुरूआती जांच में फायर ब्रिगेड से संबंधित कागजात मांगे, वह नहीं दे सके। कुल मिलाकर पूरी बिल्डिंग गैरकानूनी तरह से इस्तेमाल हो रही थी।

वर्करों का पुलिस सत्यापन भी नहीं था
नियम के मुताबिक सभी व्यवसायिक क्षेत्रों में काम करने और किराए पर रहने वालों का दिल्ली में पुलिस सत्यापन अनिर्वाय है। लेकिन बिल्डिंग में कितने लोग रहते थे और कितने काम करते थे, पुलिस के पास कोई रिकाॅर्ड नहीं है। खामियां ही खामियां सामने निकल कर सामने आई हैं। पुलिस, स्थानीय प्रशासन, मकान मालिक, नेता, अधिकारी व सरकार सभी अपनी जिम्मेदारियों से भागते नजर आ रहे हैं। आवासीय इलाकों में व्यवसायिक गतिविधियों को चलाना पूर्ण प्रतिबंध है लेकिन उस संकरी गली में बने उस मकान में बच्चों के खिलौने बनाने का कारखाना चल रहा था। यह सब एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा था। रिश्वत का मोटा कमिशन मंथली के तौर पर एमसीडी अधिकारियों और पुलिस में जाता था।

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