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Tag: Dharvik Naman Shaurya

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क्या तू सचमुच अंत:प्रेरित, अकुलाई है ?

अप्रैल का महीना समाप्ति की ओर है। मात्र तीन दिन बचे हैं, अप्रैल का महीना खत्म होने में। अप्रैल में बारिश होते हुए कम ही देखी है मैंने। आज फिर

सत्य, अहिंसा और पवित्रता के साकार रूप- महावीर स्वामी

छह अप्रैल को भगवान महावीर स्वामी जी की जयंती थी। कुछ व्यस्तताओं के चलते देरी से ही सही, अहिंसा, सत्य और पवित्रता के साकार रूप तथा जैन धर्म के चौबीसवें

मैंने ओढ़ी थी चांदनी….

वसीम बरेलवी जी ने क्या खूब कहा है जी- “जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता” इसी तरह से रौशनी पर एक अन्य बहुत ही

अप्रैल फूल बनाया, तो तुमको गुस्सा आया….

मोहम्मद रफी जी की सुंदर,सुरीली आवाज में रेडियो पर गाना बज रहा था- “अप्रैल फूल बनाया, तो तुमको गुस्सा आया, इसमें मेरा क्या कसूर, ज़माने का कसूर, जिसने दस्तूर बनाया,

दुख को मांजना है अंतःकरण के संकल्प से…

लॉकडाउन के चलते पूरा देश अपने अपने घरों में बंद है। सरकार द्वारा जारी विभिन्न दिशा निर्देशों का पालन देशवासियों द्वारा किया जा रहा है। इसी बीच, पूरे में हर

तुसी ग्रेट हो लेखक जी…!

लॉकडाउन के बीच घर में अच्छा समय बीत रहा है।सरकार के निर्देशों का हर भारतवासी पालन कर रहा है।कल रात खाना खाने के बाद घर की छत पर आकर प्रकृति

मन की बात… आप भी जऱा सुनें, पढ़ें….!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश में इक्कीस दिनों का लॉकडाउन किया है। फिलहाल लॉकडाउन ही कोरोना को रोकने का एकमात्र हथियार है,

खुला पत्र अदृश्य कोरोना के नाम…!

हे कोरोना जी नमस्ते ! हम आपको डिटॉल से अपने हाथ साफ करने के बाद अपने सेनेटाइज हाथ जोड़कर दूर से ही विशालकाय नमस्ते फेंकते हैं जी। हमारी सनातन संस्कृति

चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह

दुनिया के सबसे पावरफुल कहलाने वाले अमरीका ने हाल ही में लॉकडाउन(बंद) से इनकार किया है और अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि लॉकडाउन से मुल्क बर्बाद

नव संवत्सर- हमारी सनातन संस्कृति और परंपरा

सर्वप्रथम आप सभी को हिंदू नववर्ष की रामा श्यामा। अजी, हिंदू नववर्ष शुरू होने जा रहा है। अंग्रेजी नववर्ष के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे, जनवरी से

व्यंग्य : अहिंसावादी रामलुभाया जी और लेखक

जैसा कि आप सभी को यह मालूम ही होगा कि हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी ने अहिंसा को जीवन में बहुत बड़ा स्थान दिया था। अहिंसा, वास्तव में है

ऐ गौरैया जाने तुम कहां चली गई…?

सर्दी हो या गर्मी, बारिश हो या तूफान, रामलुभाया जी जो कि हमारे लंगोटिया हैं, उनकी एक आदत बहुत अच्छी है, वे रोजाना पक्षियों को दाना चुग्गा जरूर डालते हैं।

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