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Tag: Dr. Suresh Kumar Mishra Urratapt

Total 47 Posts

भाई! यह कोरोना भला कब जाएगा?

सुना था केवल फिल्मों के सिक्वेल होते हैं। यहाँ तो कोरोना का सिक्वेल भी निकल आया। न जाने यह कोरोना कहाँ से फंडिंग कराता है कि धड़ल्ले से एक के

जी.डी.पी. यानी गरीबी दिवालिया और पागलपन!

एक दिन भजनखबरी से उसका दोस्त टाइमपास टकला पूछ बैठा कि यह जीडीपी क्या होता है? भजनखबरी ने थोड़ी देर सोचने के बाद कहा – अरे यार! यह भी कोई

मजबूत नहीं मजबूर हैं मजदूर

1 मई – मजदूर दिवस के अवसर पर खो बैठा एक दिन की मजदूरी, आज एक मजदूर मजबूरी में रोया था। जाने किसके लिए मई दिवस ये आता है, परिवार

हास्य-व्यंग्य : झूठ की नींव पर सच की इमारत

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। शायद आपने भी पढ़ी होगी। वही जिसमें एक गड़रिया भेड़ों को चराता था। रह-रहकर गाँव वालों से मजाक करता था- शेर आया, शेर आया।

जनाब लॉकडाउन नहीं अनलॉक कहिए

लॉकडाउन के चलते कइयों का जीवन दुश्वार हो गया है। न घर में रहे बनता है और न ही बाहर। इंसान करे तो क्या करे? सोशल मीडिया में लॉकडाउन के

अब और तब का रामायण

रामायण के पुनर्प्रसारण से संबंधित लेख पिता एक बार फिर से टी.वी. पर चलाए जा रहे रामायण धारावाहिक का आनंद उठा रहे थे। उन्हें अपने दिन याद गए। वे अपने

स्वास्थ्य का ख्याल – जीवन बने खुशहाल

7 अप्रैल – विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति ही नहीं बल्कि एक पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक

भीतर-बाहर का अंधेरा

मैं टी.वी. पर देश के प्रधानमंत्री का संदेश सुन रहा था। वे कह रहे थे कि 5 अप्रैल की रात 9 बजे सभी लोग अपने घरों की लाइट बंद करके

व्यंग्य : जिंदगी का लॉकडाउन

हृदय को छू लेने वाली व्यंग्य रचना सुबह से दिमाग खराब था। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। लॉकडाउन के चलते न घर में रहे बनता था न

1 अप्रैल – मूर्ख दिवस के अवसर पर व्यंग्य : मूर्ख की पहचान

एक दिन मुझे लगा कि मेरे चारों ओर मूर्खों की संख्या अधिक हो गयी है। मुझे इन मूर्खों का पता लगाने की इच्छा हुई। इसके लिए मैंने अपने एक घनिष्ठ

व्यंग्य लेख  : श्री श्री श्री कोरोना महाराज!

यशवंत फिल्म का एक डायलॉग है- एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है। गनीमत मनाइए कि कम-से-कम यहाँ एक मच्छर तो है, जो हमें नंगी आँखों से दिखायी

पानी कुछ कहना चाहता है…

22 मार्च – विश्व जल दिवस के अवसर पर वैचारिकी मैं पानी हूँ। हर जिंदगी की कहानी हूँ। किसी का अफसाना तो किसी का तराना हूँ। आपके शरीर में 70

गूँगे भारत के बहरे लोग

संसद में राहुल गांधी ने तमिल भाषा के पक्ष में अपनी आवाज उठाई। उसके प्रति अपनी चिंता व्यक्त की। यह बड़ी प्रसन्नता की बात है कि इस बहाने कम से

हर बच्चा खास है

स्टाफ रूम में बैठे भवानीदास कक्षा की तैयारी कर रहे थे। यह देख उनके साथी अध्यापक मोहन ने उन्हें टोका- “आप हर दिन कक्षा में इतना गला फाड़कर पढ़ाते हैं।

हास्य-व्यंग्य : चलो सेमिनार-सेमिनार खेलते हैं…

मेरे एक अच्छे मित्र हैं। ऊँचे पद पर काम करते हैं। उनकी पत्नी भी काफ़ी पढ़ी-लिखी हैं। शिक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। दोनों के प्रति मेरे हृदय में सम्मान

व्यंग्य : अथ श्री ‘जूँ’ पुराण कथा

वर्तमान देश की स्थिति पर कटाक्ष करने वाला हास्य-व्यंग्य जूँ पुराण आरंभ करने से पहले दुनिया के समस्त जुँओं को मैं प्रणाम करता हूँ। मुझे नहीं लगता कि लेख समाप्त

जिंदगी की होली में खुशियों के रंग

होली त्यौहार पर विशेष  कहते हैं जिंदगी दो दिन का तराना है। आज आना और कल जाना है। इतने छोटे से जीवन पर कैसा अहंकार? हमें नहीं पता कि जन्म

बिन नारी सब सून…

8 मार्च – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष लेख “अभी रौशन हुआ जाता है रास्ता वो देखो एक औरत आ रही है” शकील जमाली की इन पंक्तियों में महिला की

व्यंग्य : पढ़े-लिखे इंसान नहीं शैतान कहो

दिल्ली में भड़की हिंसा पर व्यंग्य लेख  खून…खून…खून…खून! जहाँ देखो वहाँ खून ही खून। पूर्वी दिल्ली के मौजपुर और जाफराबाद सुर्खियों में थे। दंगे हिंदू-मुस्लिम के नाम पर हो रहे

व्यंग्य : किराये की कोख का सौदा

रामरतन बाबू बड़े ध्यान से टी.वी. पर समाचार देख रहे थे। समाचार में ऐसा कौनसा अलाउद्दीन का खजाना मिल गया कि वे तुरंत अपनी धर्मपत्नी को जोर-जोर से आवाज देने

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