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Tag: Mangal Vyas Bharti

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कविता : होली आई रे आयी रे होली आयी रे

होली आई रे आयी रे होली आयी रे होली आई रे, फागण री मस्ती छाई रे रंग बिरगी होली और रगं बसंती छायी रे। पड़ी ढोल पर थाप नहीं कि

कविता : आओं फगुआ के गीत सुनाएँ

आओं फगुआ के गीत सुनाएँ आओं सभी मनायें होली फाग सुनाते ढोल बजाते, बजता झांझ-मंजीरा प्रेम भाव की बोले बोली। तीज पर्व खुशियाँ होली आज बने हैं मात्र ठिठोली। कष्ट

कविता : दुनियां की भीड़ में मुसाफिर

दुनियां की भीड़ में मुसाफिर दुनियां की इस भीड़ में.खोया इक मुसाफिर वो। इंसान मगर इंसानों में क्यों अजनबी वो। रिश्तों के रंगों की कोई पहचान नहीं सबकों वो। जान

कविता: माटी म्हारे देस री

पिऊं जी थानै हेलो देरही नैणा मं आंसू लाय घर आओ नी बितया दिन बरस हजार फागुन फूलो आय। रूठी नैण संगी सहेलियां ओ फागुन म्हानै आय सूरज चिमके रूलाय

कविता : तेरे कदमों की धूल बन जाये

ऐ मालिक तेरी तस्वीर. हमारे दिल में बन जाये। कोई तो तेरा वजूद तेरे. सहारे का उम्र भर बन जाये। प्यास सिर्फ तेरी दुआ की हो. तुम्हारे अक्स में बस

कविता : बसंत का अभिनंदन

ऋतु बसंत का चंचल मन जब. विपुल हर्ष से भरने लगता। हर प्राणी के अंतर्घट से. हास्य मोद रस झरने लगता। इंद्रधनुष की चपल रशियां. रूप छटा को दमका देती।

कविता : छब्बीस जनवरी हैं आई

मन पटल पर बनी सलोनी. सुंदर सी छाया। सुख  समृद्धि नव जागृति ले. छब्बीस जनवरी आया। दुखी न कोई. मस्त सभी. लिये तिरंगे रंगरलियों में। गूँजेगे वैभवी तराने. गाँवों गलियों

गणतंत्र दिवस मनाएंगे

हम सुबह की नई किरण बन गणतंत्र दिवस मनाएंगे। गावं गांव और शहर शहर तिरंगा हम लहरायेंगे। संविधान के नए सुमन बन खुशियां खूब सजायेंगे। गाँधी, सुभाष और लोकमान्य के

कविता : उड़ी उड़ी रे पतंग

मस्ती भरी उमंगों से अंगड़ाई ले अड़ी पतंग। गुजारिश कर चली चली रे रंगीन सपनों की लहरी के रंग। नहीं किसी के गम ओ सितम उड़ती जिंदगी जाने बन पतंग।

कविता : नववर्ष उज्जवल भविष्य

नववर्ष उज्जवल भविष्य ले आ रहा नववर्ष उल्लास उमंगे. लाने आ रहा. स्वणिम सुख स्वप्न संजोए जाने आ रहा। रंगीन कल्पनाओं के दीप. जाने आ रहा. आँखों में मंद पड़ा

जाने किस महफिल में आयेंगे

अब कहां वो किस महफिल में आयेंगे। किस नजर से उन्हें देखें वो नहीं आ पायेंगे।। गीत गजल कविता के लिखे पन्नों में याद कर पायेंगे। जिंदगी की राह में

कविता : छाछ राबड़ी भूल गया

स्वार्थी बणग्या सगळा, साख सम्बन्ध भूलग्या पीसै लारै भाज्या फिरै, सेवा करणी भुभूलग्या । झूठ सूं व्यौपार चाले सच बोलणो भूलग्या पेंट बुशर्ट पैरन लाग्या , धोती कुरतो भूलग्या ।

कविता : दिल के दरिया में ढूंढते है जिंदगी

जिंदगी जाने कितने आईने बदलती हैं बनते बिगड़ते हालातों को परखती है जिंदगी। उम्र की दरिया में जाने कितने नकाब छल देखती हैं बदलती रहती वक्त की नजरें और सकल

कविता : अंतर मन की ज्योति जलाएं

आओ साथी आज प्रेम से हिलमिल अक्षय दीप जलाएं दिवाली मनाएं। देश प्रेम की मधुमय वाणी जन जन तक पहचाएं। लक्ष्मी पूजा में दीप नये अनगिनत मिल जलाएं। जन जन

कविता: नेता हिंदुस्तान का

मूर्ख महोदय ध्यान से सुणरया गरधब राग सगलां मोथा हो सुणकर आया भाग। भासा भाव विचित्र है अद्भुत है सुर ताल ढपड़ी ढोलक घूघरा खूब बजावै गाल। आप आपकी राग

कविता : दीपों का त्योहार दिवाली

मन से मन का दीप जलाओ खुशियों का त्योहार मनाओ। सबका मित्र हितैषी दीपक अमीर गरीब सबका दीपक । हर खुशी में ज्योति जलाऊं घर घर पूजन आरती उतारूं। जिस

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