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Tag: ManKeshwar Maharaj Bhatt

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उत्सव की रात

… बात उन दिनों की है। जब मैं (काल्पनिक सम्बोधन) 12 वीं कक्षा में था। इस उम्र में पढ़ाई के साथ इश्क की किताबें पढ़ने लगना आम बात है। हर

आखिरी फोन का इंतजार ….

सर्द के मौसम की शुरूआत हो चुकी थी , निरंतर बढ़ती ठंढ़ी के कारण सुबह की धूप भाने लगी थी ।इस ठंढ़ की कपकपाहट में भी मेरी इश्क पनपती जा

…. और साहब

बिहार सरकार की नीति पर आज कई सारे सवाल खड़े होना लाजमी हैं।आज के समय में सरकार केवल जनता को दिग्भ्रमित करने का कार्य कर रही है ।जिसका अनुमान इस

कविता : मुबारक हो तुम्हें ..

मुबारक हो तुम्हें .. फाल्गुन की पहली फुहार , मुबारक हो तुम्हें… ये फाल्गुन की बीती यादें , मुबारक हो तुम्हें … इश्क , फिजा ,ये नज्म की बहार ,

अश्लील , अपराध की जड़

आज भारत में आए दिनों रेप और उसके बाद निर्मम हत्या की वारदातें सामने आती है ।ऐसा केवल सिर्फ युवतियों के साथ ही नहीं कि बच्चियाँ के साथ भी हो

संवैधानिक अधिकारों के मायने

आज भारत में ऐसी विकट स्थिति उत्पन्न हो चुकी है ।जो भारत की जटिल समस्याओं में से एक है ।यहाँ महिलाओं को संविधान के तहत मिलने वाले अधिकार बौने नजर

शिक्षा का गिरता स्तर

आज जिस नव भारत की परिकल्पना की आस कर रहें हैं वो बिना गुणवत्तापूर्ण सुलभ शिक्षा के कतई सम्भव नहीं है ।भारतीय संविधान की 86 वां संविधान संशोधन – 2002

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