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Tag: nirmla Rani

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महंगा तेल ,ये कैसा खेल ?

देश के इतिहास में तेल को लेकर कई कीर्तिमान नए स्थापित हुए हैं। एक तो यह कि डीज़ल की क़ीमत कभी भी पेट्रोल से अधिक नहीं हुई परन्तु पिछले दिनों

मिलावटखोरी के इस दौर में खाएं क्या न पिये क्या ?

हमारा देश विशेषकर राजनैतिक,आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में इस समय संकट व अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहा है इस का उल्लेख अनेक आलोचकों व संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा

अपने नौनिहाल को योग्य बनाइये धर्मोन्मादी नहीं

इन दिनों पूरे देश में एक अजीब क़िस्म का उन्माद छाया हुआ दिखाई दे रहा है। जिन युवाओं पर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने का ज़िम्मा है देश के वही

‘मार्ग दर्शकों ‘ की बदजुबानी की इन्तेहा ?

कभी विश्व को मार्ग दर्शन देने जैसा स्वर्णिम अतीत रखने वाले हमारे देश में इन दिनों कथित ‘मार्ग दर्शकों ‘ द्वारा ही देश व भारतीय समाज को विभाजित करने के

संकीर्णता नहीं उदारवाद है भारत की पहचान

नागरिकता संशोधन विधेयक आख़िरकार लोकसभा के बाद राज्य सभा में भी पारित हो गया। इस विधेयक के समर्थन तथा विरोध में संसद के दोनों सदनों में ज़ोरदार बहस हुई। राज्यसभा

तेज बहादुर यादव का मैदान-ए-सियासत से बेआबरू होना

हमारे देश की सीमाओं के प्रहरी भारतीय सैनिकों व सीमा बल के जवानों द्वारा चौबीसों घंटे विपरीत एवं दुर्गम परिस्थितियों में भी की जाने वाली सीमा की निगरानी की बदौलत

असंगठित जनता को लूटते संगठित व्यवसायी ?

लगभग दस बारह वर्ष पूर्व आपने मोबाईल नेटवर्क उपलब्ध करने वाली एयरटेल जैसी कई कम्पनीज़ के ऑफ़र्स में लाइफ़ टाइम ऑफ़र दिए जाने के बारे में ज़रूर सुना होगा। मेरे

“विशिष्ट” लोगों के अवैज्ञानिक कुतर्क

भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी योग्यता के बल पर चन्द्रमा पर पताका फहराने के लिए अपनी कमर कस ली है। देश के शिक्षित व योग्य युवाओं के घोर परिश्रम की बदौलत

नोटबंदी:उपलब्धि या महाघोटाला?

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए पांच सौ व एक हज़ार रुपये के नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की

‘कलंकी माननीयों’ से मुक्ति का शुभ अवसर है चुनाव

भारतीय लोकतंत्र के महापर्व अर्थात् लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद हो चुका है। चुनाव संपन्न होने तक देश के सीधे-सादे व शरीफ मतदाताओं को बहलाने, बहकाने, फुसलाने तथा वरगलाने का

‘देवी पूजक’ देश के सबसे खतरनाक महिला विरोधी 

‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ जैसी कहावत न केवल हमारे देश की प्राचीन कहावतों में शामिल हैं बल्कि हमारा समाज बहुतायत में इस कहावत को चरितार्थ करता हुआ भी प्राय: दिखाई

अच्छे दिन:आम लोगों के या सत्ता के चहेतों के?

अच्छे दिन:आम लोगों के या सत्ता के चहेतों के?निर्मल रानी इस समय हमारे देश की राजनीति झूठ,भ्रष्टाचार तथा अनैतिकता के ज़बरदस्त दौर से गुज़र रही है। ‘अच्छे दिन आने वाले

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