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Tag: vikram kumar

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तीन मुक्तक

तीन मुक्तक इच्छाशक्तियों का भाव मन में खास इतना हो हारेंगे कभी न हम, सदा आभास इतना हो चाहे दूर जितना हो, चाहे हो कठिन जितना हम मंजिल को पाएंगे

कविता : देखा मिसाल दुनिया ने

 देखा मिसाल दुनिया ने संकल्प, इच्छाशक्ति की राशि विशाल दुनिया ने एकता के हिंद की, देखा मिसाल दुनिया ने विश्वास की परिधि ने हर मन को था घेरा हुआ लग

कविता : चिंता नहीं किसी की भी

 चिंता नहीं किसी की भी चिंता नहीं किसी की भी नहीं कोई परवाह कर्म बुरे करके करते अच्छे फल की चाह एक हाथ से जस करें, पाएं दूजे हाथ कर्म

कविता : मां के महिमा की गाथा

मां के महिमा की गाथा रुप सलोना माता का है महिमा अपरम्पार मां के महिमा की गाथा गाता पूरा संसार दुर्गा अम्बे और भवानी माता के ही नाम एक नाम

कविता : चैत्र नवरात्र

चैत्र नवरात्र सुख समृद्धि जग की खातिर लेकर आई अम्बे मां चैत्र मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां चंद्र मुकुट माथे पर सागर चरण रहे पखार

कविता : हे ईश्वर इस जहां से कीजै, कोरोना को दूर

 हे ईश्वर इस जहां से कीजै , कोरोना को दूर हाहाकार हर ओर मचा है , हुए हैं सब मजबूर हे ईश्वर इस जहां से कीजै , कोरोना को दूर

कविता : कोरोना पर देश से अपील

कोरोना पर देश से अपील देश को बचाने का प्रयोग मिलके कीजिए विपदा की घड़ी है ये सहयोग मिलके कीजिए ना कोई गुमराह हो , ज्ञान के अभाव में बदलाव

कविता : देर से सही मगर, हुआ इंसाफ आज है

देर से सही मगर, हुआ इंसाफ आज है करनी से भरनी का, हुआ मिलाप आज है देर से सही मगर, हुआ इंसाफ आज है हैवानियत के लिए यह, संदेश साफ

कविता : लक्ष्मण

लक्ष्मण त्याग और तप में हैं,सबसे विशाल लक्ष्मण जग में भाईयों के लिए हैं मिसाल लक्ष्मण शब्द सारे कम हैं उनके, गुणों के बखान में उनके त्याग गूंजते हैं धरती

नारी दिवस पे दुनिया की हर नारी को नमन

उनसे ही मिली जिंदगी है , और ये जीवन उनसे ही गुलजार यहां , ममता का चमन त्याग से उनके बड़ा न, कुछ जहां में है नारी दिवस पे दुनिया

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