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तेजस्वी यादव के ए टू जेड नीति अन्य दलों के नींद हराम कर रही है

बिहार राजनीति के सबसे मजबूत स्तंभ राष्ट्रीय जनता दल अपनी ए टू जेड नीति के तहत समाज के सभी तबकों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व देने को प्रतिबद्ध दिख रही है।जिस तरह से राजद ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के निर्देशानुसार राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया।अभी तक जो राजनीतिक दल अपने आप को एक खास तबके का रहनुमा कहते आ रही थी उनका नींद हराम हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के काट के लिए उसने भी उसी समुदाय के एक व्यक्ति को राज्यसभा के लिए नामित किया उसे डर सताने लगा अगर राष्ट्रीय जनता दल हर समाज के प्रतिभाशाली और प्रभावशाली लोगों को इसी तरह प्रतिनिधि तो देते रही तो वह दिन दूर नहीं जब एक-एक वोट के लिए तरसना पड़ेगा।राष्ट्रीय जनता दल द्वारा यह निर्णय बहुत सोच-विचार के बाद लिया गया क्योंकि जिस तरह से कुछ वर्ष पूर्व से राष्ट्रीय जनता दल के आधार वोटरों को बांटने के लिए कुछ लोगों को पार्टी के महत्वपूर्ण पद के साथ-साथ विधानसभा और लोकसभा में टिकट दिया गया उससे सबक लेते हुए यह कार्य किया गया है।जिस तरह से बिहार में पिछले 15 वर्षों से सरकार चलाई जा रही है उससे बिहार के एक बहुत बड़े तबके और खासकर के युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोष पल रहा है उसे देखते हुए हर राजनीतिक दल उसे साधने में लगे हुए हैं। बिहार के युवा किसान शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी रोजगार वेतन पेंशन एवं सुविधाओं के लिए लगातार सरकार के खिलाफ आंदोलनरत हैं।इससे सरकार के जान सांसत में पड़ी हुई है।इस स्थिति में राष्ट्रीय जनता दल द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारी एवं पार्टी के संगठनात्मक पदों पर सभी जाति धर्म और समुदाय के लोगों के समानुपातिक प्रतिनिधित्व देना एवं आने वाले दिनों में युवा किसान और शिक्षकों की मांगों को सरकार बनते ही लागू करने की घोषणा करना सत्ताधारी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ा कर दिया है।

वैसे तो हमेशा से राष्ट्रीय जनता दल समाज के सभी तबकों को साथ लेकर चलने की दावा करते रही है।लेकिन इस पर कुछ लोगों द्वारा जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया जाता रहा है।ऐसे आरोपों को राष्ट्रीय जनता दल हमेशा बेबुनियाद बताती रही है।विधान सभा राज्य सभा लोक सभा विधान परिषद के साथ-साथ पार्टी के संगठनात्मक पदों पर हमेशा से सभी लोगों को प्रतिनिधि देने की हर संभव कोशिश करने का द पार्टी द्वारा किया जाता रहा है।कभी-कभी इसमें कुछ कमी बेसी जरूर होता रहा है।राजद में अब 5 राज्यसभा सांसदों में एक मुस्लिम , एक यादव , एक बनिया , एक ब्राह्मण, एक भूमिहार जाति से प्रतिनिधि मिला है।
इस वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव निर्धारित है जिस के मध्य नजर सभी राजनीतिक दल चाहते हैं सबको साध कर चला जाए।इसके लिए इंक्लूसिव पॉलिटिक्स से इतर जाना किसी के हित में नहीं है।बिहार विधान परिषद में राष्ट्रीय जनता दल के अभी नौ एमएलसी है जिनमें से दो बनिया,दो मुस्लिम, दो यादव ,एक अतिपिछड़ा,एक राजपूत , एक भूमिहार।
वहीं बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल से कुल इक्कासी विधायक हैं जिनमेंमें तेरह एमएलए अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।कुल तेरह एमएलए अनुसूचित जाति से हैं।कुल चार एमएलए अतिपिछड़ा तबके से हैं। बाकी सभी सामान्य और पिछड़े तबके के विधायक हैं।
पार्टी संगठन में सभी को बराबर का तवज्जो दिया गया है किसी को शिकायत करने का मौका किसी स्तर पर नहीं मिला है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष- लालू प्रसाद,राष्ट्रीय प्रधान महासचिव- कमरे आलम,राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष- अश्फ़ाक करीम,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष -शिवानंद तिवारी,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- रघुवंश प्रसाद सिंह,प्रदेश अध्यक्ष- जगदानंद सिंह,प्रदेश प्रधान महासचिव- आलोक मेहता,राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता- ब्राह्मण,प्रदेश मुख्य प्रवक्ता- यादव,नेता प्रतिपक्ष- यादव,प्रदेश कोषाध्यक्ष- वैश्य।
राजद देश की एकमात्र ऐसी पहली पार्टी है जिसने अपने पंचायत स्तर के संगठन में अतिपिछड़ा और दलित की आनुपातिक भागीदारी देकर आरक्षण को लागू किया है। देश के अन्य पार्टियों को राष्ट्रीय जनता दल से सीख लेते हुए अपने संगठन में समाज के सभी लोगों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व देना चाहिए ताकि किसी भी समूह को शिकायत का मौका ना मिले और भारतीय लोकतंत्र समृद्ध हो सके।राष्ट्रीय जनता दल देश में कौमी एकता और सर्वधर्म समभाव के भारतीय परंपरा को और मजबूत करने तथा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के बनाए भारतीय संविधान में अलग-अलग सामाजिक एवं धार्मिक समूह में जन्मे भारतीय नागरिकों को मिले अधिकारों के रक्षा के लिए संप्रदायिक और सामंतवादी विचारधारा के खिलाफ मजबूती से लड़ते रहने के लिए कृत संकल्पित है।कल भी राष्ट्रीय जनता दल किसी जाति किसी धर्म के खिलाफ कोई बात नहीं करती थी और आने वाले समय में भी ऐसा नहीं करने के लिए प्रतिबद्ध। राष्ट्रीय जनता दल विचारधारा के खिलाफ लड़ाई जरूर लड़की है पर किसी जाति धर्म और समुदाय के खिलाफ नहीं और आज भी अपने उसी पुराने वसूल पर अनवरत आगे बढ़ने को तत्पर है।राष्ट्रीय जनता दल हमेशा से मनुवाद संप्रदायिकता सामंतवाद को महिमामंडित कर भारतीय संविधान को कमजोर करने वाले विचारधारा का विरोध करती रही है यह बात शाश्वत सत्य है।
राष्ट्रीय जनता दल को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा स्थापित सिद्धांत सामाजिक राष्ट्रवाद के मूल्यों पर चलना चाहिए जिससे राज्य और देश के प्रत्येक नागरिक को एक समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो।ना देश में कोई वंचित हो ना कोई दबंग देश के सभी लोग एक साथ एक समान राष्ट्रीय संसाधनों का सदुपयोग करें राज्य राष्ट्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।इस नीति पर चलना चाहिए। राजनीति सिर्फ जीतने के लिए नहीं राज और राष्ट्र लोगों में बदलाव दिखने के लिए किया जाना चाहिए।जो बिहार में 1990 के दशक से शुरू हुआ और दिखता भी है।जिस बिहार में 1990 के पहले समाज के बहुसंख्यक लोग मुट्ठी भर लोगों के सामने खाट पर बैठने का हिमाकत नहीं करते थे लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री बनते ही उनसे आंख से आंख मिलाकर बात करते हैं।उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर राज्य के सामाजिक आर्थिक राजनीतिक प्रत्येक गतिविधियों में भागीदारी कर रहे हैं जो किसी भी राज्य के लिए सौभाग्य की बात। पहले जिन सरकारी कार्यालयों में कुछ चुने हुए लोगों की ही पहुंची थी आज वहीं अधिकार के लिए हर बिहार वासी हक के साथ कार्यालय पहुंचता है।हालांकि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय से फिर सामंती प्रवृत्ति अफसरशाही बाबूशाही फन उठाना शुरू कर दिया है जिससे राज्य के प्रत्येक गरीब और खास करके बहुसंख्यक समाज के लोगों के सम्मान और अधिकारों में गिरावट आई है।
राष्ट्रीय जनता दल के द्वारा किया गया तत्कालिक निर्णयों का जिस तरह से राज्य के सभी तब को द्वारा स्वागत किया जा रहा है वह राष्ट्रीय जनता दल के लिए संजीवनी बूटी के समान साबित होगा।अगर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय जनता दल अपने वादे नीति और सिद्धांत पर प्रतिबद्धता से आगे बढ़ती है।राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव द्वारा लिया गया यह निर्णय बिहारी नहीं राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करेगा खास करके पंचायत स्तर और बूथ स्तर तक जिस तरह से राष्ट्रीय जनता दल ने सभी लोगों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व दिया है वह वाकई स्वागत योग्य कदम है और इसका प्रभाव आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दलों में भी देखा जाएगा।तेजस्वी यादव दिन-ब-दिन जिस तरह से परिपक्व राजनेता की तरह कार्य कर रहे हैं वह आने वाले दिनों में उनके लिए लाभदायक सिद्ध होगा उनके न्याय यात्रा में जिस तरह से भीड़ उमड़ रही है वह राष्ट्रीय जनता दल के प्रति लोगों का झुकाव स्पष्ट करता है।तेजस्वी यादव बिहार के युवाओं में काफी लोकप्रिय होते जा रहे हैं वे कभी युवाओं के साथ क्रिकेट खेलने लगते हैं तो कभी किसी ठेले खोमचे वाले के पास रुक कर उनसे फल और जूस खरीद कर खाते पीते और बातचीत करते हैं इससे उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है।वह युवाओं के साथ बहुत ही सहज ढंग से मिलते जुलते और लगातार उनसे संवाद बनाने की उनकी कोशिश करते हैं वह बहुत ही अनूठी है।अगर राजद के मुख्य विरोधी जनता दल यूनाइटेड और भाजपा समय रहते तेजस्वी यादव के काट खोजने में कामयाब नहीं होंगे तो उनके लिए अगले विधानसभा में काफी मुश्किलात खड़े होने वाले हैं।

गोपेंद्र कुमार गौतम
सामाजिक और राजनीतिक चिंतन

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