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तेजस्वी यादव का बेरोजगारी हटाओ यात्रा युवाओं के हित में

तेजस्वी यादव द्वारा बेरोजगारी को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मध्य नजर मुद्दा बनाया जाना बिहार के लिए सकारात्मक है।अगर इसी तरह तेजस्वी यादव सकारात्मक मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष करते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका लाभ उन्हें जरूर मिलेगा।बिहार जैसे सघन जनसंख्या वाले राज्य में बेरोजगारी एक आम समस्या है। जिससे हर घर के लोग प्रभावित है।बिहार के लोग देश में सबसे अधिक रोजगार के लिए पलायन करते हैं।आज बिहार शिक्षित और प्रशिक्षित बेरोजगारी की मार झेल रहा है।इसमें हर वर्ष लाखों की बढ़ोतरी भी हो रहा है।पर इसका समाधान अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है। शिक्षित बेरोजगारी बढ़ने के पीछे 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के सत्ता में आने के बाद बहुसंख्यक लोगों में आत्मसम्मान के चेतना जागृत होना और लोगों को पहली बार समझा आना कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है जो उन्हें देश और समाज में उनके हक और अधिकार को दिला सकता है। क्योंकि उनके सामने लालू प्रसाद यादव खुद प्रत्यक्ष उदाहरण थे वह एक सामान्य क्लर्क के बेटे थे जिन्होंने शिक्षा के बदौलत ही राजनीति का वह मुकाम हासिल किया था जो किसी गरीब के बेटे के लिए आसमान से तारे तोड़ने के समान था।लालू प्रसाद यादव द्वारा चरवाहा विद्यालय खोला जाना सबसे सकारात्मक बात रही।चरवाहा विद्यालय खुलने के बाद तमाम गरीब वंचित पीड़ित दबे कुचले लोगों में यह पैगाम पहुंचा की अपने घरेलू कामों को करते हुए,मवेशियों को चराते हुए भी हम पढ़ लिख सकते हैं।इसके लिए हमारी सरकार लगातार प्रयास कर रही।
चरवाहा विद्यालय का उद्घाटन करते हुए उस वक्त के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने एक बहुत चर्चित नारा दिया था “गईया भैंसिया चरती जाए मुनिया बेटिया पढ़ती जाए”,उसी समय से गरीब और वंचित समुदाय के बच्चों में शिक्षा के प्रति नवचेतना का संचार हुआ और बच्चे विद्यालय की ओर आकर्षित हुए। देखा जा सकता है उसके बाद से ही बिहार में लगातार साक्षरता दर में बढ़ोतरी त्वरित गति से होने लगा,पर उसमें उनकी गरीबी हमेशा आड़े आते रहा।जिसके कारण जिस परिणाम की उम्मीद लालू प्रसाद यादव ने किया था वह प्राप्त नहीं किया जा सका।

तेजस्वी यादव द्वारा बेरोजगारी को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मध्य नजर मुद्दा बनाया जाना बिहार के लिए सकारात्मक है

अंग्रेजी विषय में पास करने की अनिवार्यता खत्म किया जाना बिहार के नौनिहालों के हित में रहा।क्योंकि अधिकतर बच्चे मैट्रिक परीक्षा में अंग्रेजी में फेल होने के डर मात्र से ही पढ़ाई से दूर रहते थे और जब यह समाप्त किया गया तो विद्यालयों में और मैट्रिक परीक्षा में शामिल और उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या में जोरदार बढ़ोतरी हुई।इसके बाद बिहार में प्रतिवर्ष लगातार विद्यालयों और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही थी।जब नीतीश कुमार ने बिहार में नेतृत्व संभाला तो बिहार के सुदूरवर्ती गांव में भी विद्यालय खोले गए नए नए विद्यालय भवन बनाए गए और बच्चों को छात्रवृत्ति पोशाक मध्यान भोजन की सुविधा मिलने लगा इससे काफी तादाद में बच्चे प्रत्येक वर्ष मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं जिसके कारण बिहार में आज करोड़ों युवा शिक्षित बेरोजगार के अभिशाप से ग्रसित है।इस लांछन से वे मानसिक रूप से कुंठित रहते हैं।लेकिन जब तेजस्वी प्रसाद यादव ने बिहार में बेरोजगारी हटाओ यात्रा की शुरुआत की तो आज हर गांव में और नुक्कड़ पर यह चर्चा का विषय बन गया है।युवाओं को कहते आसानी से सुना जा सकता है कि अगर आने वाले दिनों में बिहार के युवाओं के हाथ काम और रोजगार होगा तो बिहार की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगा और हमारा बिहार भी देश के सबसे विकसित श्रेणी के राज्य में अग्रणी होगा।
इस यात्रा से युवाओं के रोजगार के प्रति उम्मीद में पंख लग गए हैं वह भी सपने संयोजन लगे हैं आने वाले दिनों में उन्हें किसी न किसी प्रकार से रोजगार की प्राप्ति होगी।उनके पास उनके योग्यता के अनुसार काम होगा। फिर उनके बटुए में अपने जरूरत को पूरी करने और अपने परिवार के ऊपर खर्च करने के लिए पैसे होंगे।
लेकिन केवल बेरोजगारी हटाओ यात्रा और नारा लगा देने मात्र से युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा। इसके लिए स्पष्ट रूप से राज्य के सामने एक कार्य योजना तेजस्वी प्रसाद यादव को पेश करना चाहिए कि वह किस प्रकार से बिहार के युवाओं को आने वाले दिनों में काम और रोजगार से जोड़ने वाले हैं?इसके लिए उनके पास कौन सी कार्यनीति है?कहां से संसाधन आएंगे? किन क्षेत्रों में रोजगार दिया जाएगा स्पष्ट किया जाना चाहिए।वैसे कुछ भी असंभव नहीं है यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार से सीखा जा सकता है कि उन्होंने किस तरह से दिल्ली के सरकारी विद्यालयों का कयाकल्प कर डाला।अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो और कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो हिमालय जैसे चुनौती का भी आसानी से सामना किया जा सकता है। बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है बिहार ही देश में सबसे अधिक आईएएस इंजीनियर और डॉक्टर प्रतिवर्ष देता है।लेकिन बिहार के अंदर अवसर के कमी के कारण आज भी हर माह लाखों युवा रोजगार की खोज में राज्य से बाहर जाने को मजबूर है।इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए ताकि युवाओं के हुनर कौशल बुद्धि विवेक और श्रम का सकारात्मक प्रयोग बिहार के विकास में किया जा सके।
हालांकि तेजस्वी यादव ने बिहार के युवाओं के रोजगार के लिए अपने 10 सूत्री एजेंडा सामने रखी है जिसमें से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार है बीपीएससी बीएसएससी द्वारा आयोजित होने वाले परीक्षाओं को निर्धारित कैलेंडर के अनुसार समय पर आयोजित किया जाएगा।ताकि युवाओं को अधिक समय तक इंतजार ना करना पड़े। विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को जल्द भरने की बात करते हैं। बिहार वासियों को अधिक से अधिक रोजगार मिले इसके लिए डोमिसाइल नीति लाने की बात भी कर रहे हैं।बिहार में इंडस्ट्री लगाने के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित करेंगे,आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे।
बिहार में अधिक से अधिक कृषि महाविद्यालय और विवि खोलेंगे। इससे बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में युवाओं को कृषि से आसानी से जोड़कर रोजगार प्रदान किया जा सकेगा।फूड़ प्रोसेसिंग यूनिट,चिप्स की फैक्ट्री,मुर्गी पालन,मछली पालन, गो पालन को बढ़ावा देकर रोजगार के मौके बढ़ाने की बात करते हैं।इरादे तो नेक है पर ऐसा होता कहां है अगर सच में इन बातों को धरती पर उतार दिया जाए तो काफी हद तक बेरोजगारी की समस्याओं को खत्म किया जा सकता है।जो भी हो आने वाले विधानसभा चुनाव में शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी रोजगार सामाजिक धार्मिक सौहार्द आदि सकारात्मक मुद्दे अगर चुनावी चर्चा के विषय बनते हैं तो यह बिहार और देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत होगा। यही नहीं सबसे बढ़कर लालू प्रसाद यादव के द्वारा बिहार के वंचित वर्ग के उत्थान के जो सपना देखा गया है उसे पूरा करने का रास्ता भी हर हाथ में काम और हर घर में रोजगार देकर ही पूरा किया जा सकता है।इसके बदौलत थी राज्य और देश में सामाजिक राष्ट्रवाद का सपना सच किया जा सकता है।आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हार जिसकी भी हो अगर बेरोजगारी मुख्य मुद्दा बनता है तो यह बिहार के करोड़ों युवा बेरोजगारों की जीत होगी।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
सामाजिक और राजनीतिक चिंतक
देवदत्तपुर दाउदनगर औरंगाबाद बिहार
व्हाट्सएप नंबर 950 734 1433

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