न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

भूजल का गिरता स्तर चिंता का सबब

तेजी से गिरता भूजल स्तर दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। भूजल का अनियंत्रित और अंधाधुंध दोहन होने से स्थिति और भी भयावह हो गई है। भारत में भी स्थिति बेहद चिंताजनक और दुरूह होती जा रही है। ऐसे में भूजल संरक्षण और संवर्धन के प्रति आम आदमी कितना गंभीर है, यह विचारणीय और महत्वपूर्ण है। नीति आयोग ने जल की स्थिति को लेकर कई बार चेताया है। सच तो यह है जीवन की अमूल्य निधि बने जल के प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर ही हमने कब्जा कर लिया। कुओं का अस्तित्व नष्ट हो चुका है और तालाबों पर अंट्टालिकाएं खड़ी हो गईं। नदी क्षेत्रों में भी भवनों की श्रृंखला बन गईं। जल के हर स्रोत को अपने निहित स्वार्थों की बलि पर चढ़ा दिया है और अब त्राहि त्राहि की स्थिति उत्पन्न होने पर जागरण के शंखनाद का दिखावा कर रहे है।
इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट के मुताबिक देश में औसतन 135 लीटर पानी प्रतिदिन प्रति व्यक्ति देने की बात कही जाती है लेकिन यह औसत 69 लीटर पर ही अटक जाती है। भारत में करीब 54 फीसदी हिस्सा ऐसा है जहां भू-जल तेजी से नीचे जा रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया जाए कि एक बूंद पानी भी अनावश्यक व्यर्थ न हो, उसका सदुपयोग किया जाए।
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 6584 भूजल ब्लॉकों में से 1034 ब्लॉकों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। इन ब्लॉकों के भूजल का वार्षिक उपभोग इनके पुनर्भरण से ज्यादा रहा। इसे डार्क जोन कहा जाता है। इसके अलावा 934 ब्लॉक ऐसे हैं जिनमें पानी का स्तर कम हो रहा है, लेकिन उनका पुनर्भरण नहीं किया जा रहा। ऐसे ज्यादातर ब्लॉक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में हैं।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन और बेतहाशा पानी के दोहन की मौजूदा आदत से, बहुत जल्द देशभर के 60 फीसदी वर्तमान जलस्रोत, सूख जाएंगे। खेती तो दूर की कौड़ी रही, प्यास बुझाने को पानी होना, नसीब की बात होगी। नीति आयोग ने भी जल की उपलब्धता के आसन्न संकट से देश और सरकार को कई बार चेताया है। अपनी हालिया एक रिपोर्ट में आयोग ने साफतौर पर कहा की देश के 21 महानगरों में 2020 तक जल संकट उत्पन्न हो जायेगा। यह संकट भूजल खत्म होने के कारण होने की आशंका प्रकट की गयी मगर विडंबना यह है सरकार अभी भी इसे स्वीकारने को तैयार नहीं है। सरकार कह रही है नीति आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित 21 शहरों में पानी की उपलब्धता भूमिगत जल स्रोतों के अलावा भूजल स्रोतों पर आधारित होने के कारण जलसंकट चिंता की बात नहीं है जिनमें 2020 तक भूजल खत्म होने की आशंका जतायी गयी है।
गौरतलब है देश के 256 जिलों के 1500 ब्लॉक को जलस्रोतों के जरूरत से ज्यादा दोहन या अन्य कारणों से जलसंकट के लिहाज से गंभीर श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों में भूजल को रीचार्ज करने के लिये जलशक्ति अभियान शुरु किया गया है। अभियान के तहत संबद्ध जिलों में वाटर हार्वेस्टिंग के 99.76 पॉकिट बनाये गये हैं। इन जिलों में जलसंकट की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान के लिये देशव्यापी स्तर पर ‘एक्विफर मैपिंग’ भी करायी जा रही है। इन क्षेत्रों में अब तक 10 लाख वर्ग किमी क्षेत्र की मैपिंग हो चुकी है और शेष 15 लाख वर्ग किमी क्षेत्र की मैपिंग अगले दो साल में कर ली जायेगी। जलसंकट के लिहाज से 256 जिलों का भूजल का गिरता स्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है क्योंकि पानी की 65 प्रतिशत जरूरत भूजल से ही पूरी हो रही है। यही नहीं देश के अधिकतर जलस्रोत सीवर ट्रीटमेंट के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण दूषित हुये हैं।
भूगर्भ जल प्रकृति में विद्यमान जल चक्र का महत्वपूर्ण अंग है। डायनामिक स्त्रोत की प्रतिपूर्ति वर्षा जल एवं अन्य स्त्रोतों से होती है। प्रृकृति में उपलब्ध जल का मात्र तीन प्रतिशत भाग ही फ्रेश वाटर के रूप में उपलब्ध है। मानव उपयोग के लिए प्रकृति में उपलब्ध जल का यह मात्र एक छोटा सा अंश है। भूजल की वर्तमान स्थिति को सुधारने के लिये भूजल का स्तर और न गिरे इस दिशा में काम किए जाने के अलावा उचित उपायों से भूजल संवर्धन की व्यवस्था हमें करनी होगी। पानी की कमी के चलते निरन्तर खोदे जा रहे गहरे कुओं और ट्यूबवेलों द्वारा भूमिगत जल का अन्धाधुन्ध दोहन होने से भूजल का स्तर निरन्तर घटता जा रहा है। देश में जल संकट का एक बड़ा कारण यह है कि जैसे-जैसे सिंचित भूमि का क्षेत्रफल बढ़ता गया वैसे-वैसे भूगर्भ के जल के स्तर में गिरावट आई है। भूजल दोहन के अंधाधुंध दुरुपयोग को यदि समय रहते रोका नहीं गया, तो आने वाली पीढियों को इसके भयानक परिणाम भुगतने होंगे। सरकार को जनता में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रबन्ध और उपाय करने होंगे। है। आम आदमी को जल संरक्षण एवं समझाइश के माध्यम से पानी की बचत का सन्देश देना होगा। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझे और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।

 

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
D-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar