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दिल को सुकून देते हैं बांसुरी के मधुर स्वर

संगीत के सात सुर होते हैं। सा, रे, गा, मा, पा, धा और नि। इन सात सुरों के इर्दगिर्द ही संगीत की कहानी बुनी हुई है। जब ये सात सुर एक बांस से बनी बांसुरी से निकलते हैं तो दिल के तार भी झंकृत हो उठते हैं। बांसुरी में छिद्र होते हैं। ये सात छिद्र सात सुरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन पर जब तान छेड़ी जाती है तो ये दिल को काफी आल्हादित करती है। ये सुर की बेला संगीत थैरेपी देती है। इस थैरेपी का कई बार प्रत्यक्ष प्रमाण भी देखने को मिलते हैं।

बांसुरी के फायदे-
एक विशेष बात ये भी है कि बांसुरी बजाने के भी काफी फायदे हैं। बांसुरी वादन के दौरान लगातार सांस का प्रयोग होता है। ये प्रयोग आपकी श्वसन प्रक्रिया को भी काफी मजबूत करते हैं। यहां तक कि हृदयरोग जैसी गम्भीर बीमारियों के अलावा दमा जैसी बीमारी में इसके प्रयोग से लाभ हासिल किया जा सकता है। वहीं बांसुरी के स्वर जब वातावरण में फैलते हैं तो ये वातावरण को भी शुद्ध करते हैं।

बांसुरी और श्रीकृष्ण लीला-
बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थी। कृष्ण भगवान जब बांसुरी की तान छेड़ते तो गोपियां और ग्वाले सब अपनी सुधबुध खो देते थे। बांसुरी की सुरों पर कालिया नाग के फनों पर कृष्ण ने जो नृत्य किया। उसे तो धार्मिक धारावाहिकों और फिल्मों में सबने देखा होगा। श्रीकृष्ण ने बांसुरी वादन कर अपनी मधुर धुनों से कालिया के अहंकार का मर्दन तो किया ही, साथ ही उन्होंने मानव मात्र को प्रेम का पाठ भी बांसुरी के सुरों के मध्य ही पढ़ाया।

पाठ पढ़ाते सात स्वर-
बांसुरी की स्वरलहरी के सात स्वर संयम, शांति, ईमानदारी, मधुरता, दृढ़ता, विश्वास और श्रद्धा का पाठ पढ़ाते हैं। हर के स्वर का अपना आधार है। इन स्वरों की सच्ची साधना मनुष्य के जीवन को उन्मुक्त करती है।

निरोगी काया की स्वरलहरी-
निरोगी काया बनाने में ये संगीत की स्वरलहरी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। आंख बंद कर मधुर बांसुरी के स्वरों को लगातार सुना जाए तो रोगों के इलाज में काफी फायदा हो सकता है। इसको लेकर कई शोध हो चुके हैं। जीवन में सरसता और मधुरता भरने का काम करने वाली बांसुरी से हमेशा नाता जोड़े रखिये।

चंद्रमौलि पचरंगिया
लेखक रसमुग्धा पत्रिका के सम्पादक हैं।

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