न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

दिल दहला देने वाली है रेल में रेप की वारदातें

देश के हर एक कोने में आये दिन हो रही रेप की वारदातें लड़कियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती दिख रही हैं। देश में महिला सुरक्षा को लेकर किये जा रहे तमाम दावे खोखले साबित हुए है। महिला सुरक्षा को लेकर देशभर से रोजाना अलग-अलग खबरें सामने आती रहती हैं। महिलाओं की सुरक्षा के तमाम दावों और वादों के बाद भी उनकी हालत जस की तस है। रोज दुष्कर्म, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और अत्याचार से रूबरू होती है हमारे देश की महिलाएं। आठ मार्च को हम सदा की तरह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मानते है। गोष्ठी, रैली और सेमीनार का आयोजन कर महिला अधिकारों और सशक्तिकरण की जोर शोर से चर्चा करते है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सन्देश आ जाते है। औपचारिकताएं पूरी हो जाती है। मगर आज महिलाओं के समक्ष जो वास्तविक चुनौतियां है उस पर गंभीरता से मंथन करने की जरुरत है। इसी बीच ट्रेनों और रेल परिसरों में महिलाओं से बलात्कार और छेड़छाड़ की दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यह खबर जानकर पूरा देश हिल गया है। सुनसान सड़कों की तो बात छोड़िए भीड़भाड़ वाली ट्रेनों और रेलवे परिसर में रेप की वारदातों की संख्या शर्मसार करने वाली है। देश में रेप की बढ़ती घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है. यहां तक की रेप की घटना रेल परिसरों और चलती ट्रेन में भी काफी बढ़ गई है। भारतीय रेलवे को लेकर चैंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमें खुलासा हुआ है कि 2017 से लेकर 2019 के बीच रेलवे परिसर और चलती ट्रेनों में बलात्कार के 160 से अधिक मामले सामने आए हैं।
सूचना के अधिकार के तहत ट्रेनों और रेलवे परिसर में हुए अपराध के आंकड़े चैंकाने वाले हैं। महज तीन साल में 4,718 मामले लूट के सामने आए तो 542 लोगों की हत्या कर दी गई। एक आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि 2017-2019 के बीच रेप की 136 वारदातों को रेलवे परिसर में अंजाम दिया गया, जबकि 29 महिलाओं के संग घिनौना अपराध चलती ट्रेन में हुआ। 2017 में सामने आए 51 केसों के मुकाबले 2019 में कुछ कम 44 मामले सामने आए, जबकि 2018 में 70 महिलाओं को शिकार बनाया गया। इसी अवधि में रेप के अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध के 1672 केस दर्ज हुए। इनमें से 802 रेलवे परिसर में हुए तो 870 महिलाओं के खिलाफ चलती ट्रेन में अपराध के मामले आए।
समाज के नजरिए में भी महिलाओं के प्रति अब तक कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। ऐसा लगता है जैसे हमारा देश भारत धीरे-धीरे बलात्कार की महामारी से पीड़ित होता जा रहा है। यौन अपराध चिंताजनक रफ्तार से बढ़ रहे हैं। पिछले चार दशकों में अन्य अपराधों की तुलना में रेप की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और दोषियों को सजा देने के मामले में हम सबसे पीछे हैं।
आजकल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ की खबर रोज दिखाई जाती है परंतु इसकी रोकथाम के उपाय पर चर्चा कहीं नहीं होती है। इस तरह के अत्याचार कब रुकेंगें। क्या हम सिर्फ मूक दर्शक बन खुद की बारी का इंतजार करेंगे। लड़कियों पर अत्याचार पहले भी हो रहे थे और आज भी हो रहे हैं अगर इसके रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं किये गये। आज भी हमारे समाज में बलात्कारी सीना ताने खुले आम घूमता है और बेकसूर पीड़ित लड़की को बुरी और अपमानित नजरों से देखा जाता है । न तो समाज अपनी जिम्मेदारी का माकूल निर्वहन कर रहा है और न ही सरकार। ऐसे में बालिका कैसे अपने को सुरक्षित महसूस करेगी यह हम सब के लिए बेहद चिंता की बात है।
सच तो यह है कि एक छोटे से गांव से देश की राजधानी तक महिला सुरक्षित नहीं है। अंधेरा होते-होते महिला प्रगति और विकास की बातें छू-मंतर हो जाती हैं। रात में विचरण करना बेहद डरावना लगता है। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित घर पहुँचने की चिंता सताने लगती है। देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कमी नहीं आरही है। भारत में आए दिन महिलाएं हिंसा और अत्याचारों का शिकार हो रही हैं। घर से लेकर सड़क तक कहीं भी महिला सुरक्षित नहीं है। बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, अपहरण, खून, हत्या जैसी कितनी ही वारदातें पुलिस तक पहुँचती ही नहीं है। बसों और ट्रेनों में गुंडे-लफंगे लड़की को छेड़ते हैं तो उन्हें डाँटना-डपटना तो दूर, सहयात्री तमाशबीन बने मजे लेते रहते हैं

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
9414441218

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar