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सच उगलते पाकिस्तान का असली चेहरा

सच्चाई बाॅल की तरह होती है। उसे जितना दबाएंगे उतना ही उछलेगी। जिस पुलमावा विस्फोट की साजिश के सच को पाकिस्तान दुनिया से छिपाता रहा वह उसी के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चैधरी ने उगल दिया है कि पुलवामा में हुए हमले के लिए उनका देश जिम्मेदार है। उन्होंने भरी संसद में पूरी निर्लज्जता के साथ इस आतंकी घटना के लिए इमरान सरकार का श्रेय दिया। फवाद चैधरी के इस खुलासे से अब विश्व समुदाय की आंखें खुल जानी चाहिए कि पाकिस्तान कोई देश नहीं बल्कि आतंकियों को अड्डा भर है जिसे नेस्तनाबूंद करने का वक्त आ गया है। उचित होगा कि आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) बिना देर किए पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी वित्तीय कार्रवाई करे। ऐसा इसलिए भी कि कड़ी हिदायत के बाद भी वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों और फलह-ए-इंसानियत व जमात-उद-दावा जैसे उनके मुखौटा संगठनों को वित्तीय मदद देने से बाज नहीं आ रहा है। अब एफएटीएफ को चाहिए कि वह उसे तत्काल ग्र्रे लिस्ट से हटाकर काली सूची में डाल दे ताकि उसके होश ठिकाने लग सके। विश्व बिरादरी को ध्यान देना होगा कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के किसी जिम्मेदार ने भारत में आतंकी घटनाओं के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराया है। दिसंबर, 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि 26 नवंबर, 2008 के मुंबई हमले को लश्करे तैयबा ने अंजाम दिया था। इमरान खान से पहले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी स्वीकार चुके हैं कि मुंबई हमला उनके ही देश के आतंकियों की काली कारस्तानी है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तारिक खोसा द्वारा भी कहा जा चुका है कि 26/11 मुंबई हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गयी और उसका संचालन कराची से किया गया। 2016 में लश्कर-ए-तैयबा के गिरफ्तार आतंकी बहादुर अली ने भी स्वीकारा कि उसे भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के लिए भेजा गया। पाक सेना के अधिकारी लश्कर-ए-तैयबा के कैंपों में आतंकियों को प्रशिक्षित करने के लिए आते थे। गत वर्ष पहले ंिजंदा पकड़े गए आतंकी नावेद ने भी कबूला कि वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का निवासी है और उसे गुलाम कश्मीर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कैंप से ट्रेनिंग मिली। उसने यह भी बताया कि ट्रेनिंग के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के आॅपरेशन कमांडर व मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के बेटे तल्ला हाफिज सईद ने जिहाद का पाठ पढ़ाया। पकड़े गए आतंकी अबू जुंदाल भी कह चुका है कि 26/11 आतंकी हमले के समय लखवी खुद पाकिस्तान स्थित कंट्रोल रुम से कसाब समेत 10 आतंकियों को निर्देश देने का काम किया। उसने यह भी बताया कि कंट्रोल रुम में जकीउर रहमान लखवी के अलावा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के आला अधिकारी मौजूद थे। शिकागों की अदालत में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली भी कह चुका है कि मुंबई आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ और उसकी पाल्य आतंकी संगठन लश्करे तैयबा द्वारा रची गयी। हेडली ने यह भी कहा कि हमले का मास्टरमाइंड हाफिज मुहम्मद सईद है। कारगिल युद्ध के लिए भी पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार हो चुका है। अब मौंजू सवाल यह है कि क्या फवाद चैधरी का कबूलनामा पाकिस्तान की घेराबंदी में सहायक होगा? क्या भारत दुनिया के सामने पाकिस्तान को नंगा कर पाएगा? क्या इस सच के बाद पाकिस्तान के रवैए में बदलाव आएगा? क्या वह शर्मसार होगा? क्या वह अपनी भूमि से भारत के विरुद्ध संचालित होने वाले आतंकवाद पर लगाम कसेगा? क्या अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी पाकिस्तान को डांट-डपट लगाएगी? इसमें संदेह है। ऐसा इसलिए कि वैश्विक बिरादरी पाकिस्तान को लेकर शुतुर्गमुर्गी रवैया अपनाए हुए है। जबकि वह अच्छी तरह अवगत हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों का सबसे बड़ा प्रश्रयदाता देश है। दुनिया भर के वांछित आतंकी उसकी शरण में हैं। याद करना होगा कि वह एक ओर दुनिया के मोस्ट आतंकी ओसामा-बिन-लादेन को पनाह दिए हुए था और दूसरी ओर आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से पैसा ऐंठ रहा था। उसकी पोल तब खुली जब अमेरिकी सैनिकों ने एबटाबाद में ओसामा-बिन-लादेन को मार गिराया। ओसामा के मार गिराए जाने के बाद भी अलकायदा के तीसरे नंबर का नेता शालिद शेख मुहम्मद, नेटवर्क व्यवस्था का देखरेख करने वाला अबु जुबैदिया, यासर जजीरी और अबु फरज सभी पाकिस्तान से ही पकड़े गए। इन गिरफ्तारियों से विश्व समुदाय अचंभित हुआ और भारत के कथन से सहमत भी कि भारत विरोधी आतंकी साजिश को पाकिस्तानी सरकार, सेना और आइएसआइ का संरक्षण हासिल है। दुनिया इस तथ्य से भी अवगत है कि भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी दाउद इब्राहिम करांची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी सेना के संरक्षण में है। दाऊद के अलावा भारत के मोस्ट आतंकी रियाज भटकल, इकबाल भटकल, आमिर रजा खान, अब्दुस सुभान कुरैशी, मुफ्ती सुफियान, अबु अयमान और मोहसिन चैधरी भी पाकिस्तान में ही छिपे हुए हैं। भारत इसका सबूत भी सौंप चुका है। लेकिन पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं है। दरअसल पाकिस्तान का हौसला इसलिए भी बुलंद है कि भारत के कई राजनीतिक दल उसके सुर में सुर मिलाते दिखते हैं। कभी सर्जिकल स्ट्राइक तो कभी एयर स्ट्राइक का सबूत मांगते हैं। देखा भी गया कि कुछ राजनीतिक दलों ने पुलवामा विस्फोट के लिए अपनी ही सरकार को जिम्मेदार ठहराए। एयर स्ट्राइक को जहां दुनिया ने सुरक्षात्मक कदम के तौर स्वीकार किया वहीं भारत के विपक्षी दलों ने सरकार से सबूत मांगा। भारत के साहस पर सवाल दागा। लेकिन अब जब पाकिस्तान के ही एक सांसद और पूर्व स्पीकर अयाज सादिक ने खुलासा कर दिया है कि पाकिस्तान ने भारत के दबाव और प्रतिक्रिया से डरकर विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को रिहा किया तो सवाल दागने वाले भारतीय राजनेता मुंह चुरा रहे हैं। पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक की मानें तो भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर बुलायी गयी बैठक में खुद प्रधानमंत्री इमरान खान ने आने से मना कर दिया। उसमें पाक आर्मी चीफ बाजवा आए तो मगर उनके पैर कांप रहे थे। उनके चेहरे पर पसीना था। उन्हें डर था कि कहीं भारत अटैक न कर दे। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि अगर अभिनंदन को सीमा पार नहीं जाने देंगे तो भारत रात 9 बजे पाकिस्तान पर हमला कर देगा। अयाज सादिक के मुताबिक इसी डर की वजह से पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन को वापस किया। इस खुलासे से एक बात साफ है कि पाकिस्तान को अपनी और भारतीय ताकत का एहसास हो गया है। वह समझ गया है कि अगर वह भावावेश में भारत से भिड़ता है तो फिर उसे दुनिया के नक्शे से मिटने के लिए तैयार होना होगा। पाकिस्तान को यह भी पता है कि वह कारगिल को मिलाकर अब तक चार बार भारत से युद्ध लड़ चुका है। हर बार उसे ही पराजय का मुंह देखना पड़ा। भारत ने उसे ऐसे गहरे जख्म दिए हैं कि उसकी पीढ़ियों को दशकों तक उसका दर्द सालता रहेगा। पूर्वी पाकिस्तान के रुप में बांग्लादेश के जन्म को पाकिस्तान को नहीं भूलना चाहिए। अगर वह पुनः भारत से युद्ध करने की हिमाकत करता है तो उसे अपने देश के कई टुकड़े देखना होगा। खौफ के साए में सिमटे पाकिस्तान को अब अच्छी तरह समझ में आ गया है कि कश्मीर में शांति के लिए भारत किसी भी हद तक जा सकता है। पाकिस्तान इस तथ्य से भी सुपरिचित है कि भारत से भिड़ने के लिए उसके पास न तो भारत जैसे विनाशक हथियारों का जखीरा है और न ही उसकी अर्थव्यवस्था ही युद्ध के लायक है। उसका कुल रक्षा बजट 11 अरब डाॅलर है वहीं भारत का रक्षा बजट उससे पांच गुना अधिक 58 अरब डाॅलर है। पाकिस्तान के पास कुल सक्रिय सैनिकों की संख्या 6.53 लाख है वहीं भारत के पास 14 लाख से अधिक हैं। अन्य मामलों में भी पाकिस्तान भारत की तुलना में बहुत पीछे है। ऐसे में अगर पाकिस्तान को भारत से डर लग रहा है तो उचित होगा कि वह भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश से बाज आए।

अरविंद जयतिलक

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