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सीएए-एनपीआर विरोध के पीछे की वजह धर्मांतरण के खेल के खुलासे की चिंता तो नहीं

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के बाद अब एनपीरआर का भी जिस तरह विरोध हो रहा है। उसके कई निहितार्थ हैं। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि क्यों लोग अपने माॅ-बाप का नाम और जन्म स्थान बताने का विरोध कर रहे हैं। कहीं इसके पीछे की वजह के तार देश में चल रहे धर्मांतरण के ‘धंघे से तो नहीं जुड़े हैं। पिछले कुछ दशकों सेे हिन्दुओं के धर्मांतरण का खेल बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है। दरअसल, किसी की आस्था बदलना और उसके चलते धर्म परिर्वतन कर लेना कोई बड़ी बात नहीं है,लेकिन जब इसके पीछे ‘स्वार्थ’ खड़ा दिखाई देता है तो सवाल भी उठने लगते हैं। बड़ी संख्या में कथित प्यार (लव जेहाद) में फंस कर हिन्दू लड़कियों का मुस्लिम धर्म अपनाना हो या फिर छूआछूत के चलते कुछ दलित और पिछड़े समाज के लोगों का धर्म परिर्वतन किया जाना, सब कुछ इसी में आता है,जिस पर बवाल भी होता है,लेकिन बाद में सब कुछ ठंडा पड़ जाता है। होता यह है कि धर्म परिर्वतन करके कोई भी इंसान अपना नाम तो आसानी से बदल लेता है, लेकिन माॅ-बाप का नाम बदलना संभव नहीं होता है। बस यही एक पेंच विरोध की वजह बताई जा रही है।
दरअसल, एनपीआर में लोगों को अपने माॅ-बाप का नाम और जन्म स्थान बताना पड़ा तो कोई आसानी से झूठ नहीं बोल पाएगा,वहीं एनपीआर से सरकार के पास देश में कितनी आबादी है, इसके साथ-साथ इस बात के भी पुख्ता आंकड़े पहंुच जाएंगे कि पिछले कुछ दशकों में कितनी तादात मे लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है। यह सच आने के सामने आने के बाद धर्मांतरण का धंधा चलाने वालों की पोल ही नही खुल जाएगी, इस पर लगाम लगाना भी आसान हो जाएगा।
बात इससे आगे की कि जाए तो जब यह बात सार्वजनिक हो जाएगी कि किस-किस ने धर्मांतरण किया है तो कुछ हिन्दूवादी संगठन जो धर्म परिर्वतन कर चुके लोगों की घर वापसी का अभियान छेड़े हुए हैं, वह भी सक्रिय हो सकते हैं। इसी भय के कारण कुछ कट््टरपंथी शक्तियों और धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं के बहकावे में आकर मुट्ठी भर लोगों द्वारा देश में सीएए-एनआरपी और एनसीआर के विरोध का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। इस साजिश को अंजाम देने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।
बता दें पिछले वर्ष नवंबर में उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमे जबरन धर्मान्तरण जैसे गंभीर मसले पर नया कानून बनाने की सिफारिश की गई थी। तब आयोग की सचिव सपना त्रिपाठी ने बताया था कि धर्म की स्वतंत्रता (विधेयक के मसौदे सहित) उत्तर प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2019 नामक रिपोर्ट आयोग ने मुख्यमंत्री को दी गई है, योगी को यह रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल और सपना त्रिपाठी ने सौंपी थी। आयोग का मत था कि मौजूदा कानूनी प्रावधान धर्मान्तरण रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इस गंभीर मसले पर दस अन्य राज्यों की तरह नये कानून की आवश्यकता है।
आजादी के पहले और बाद, देश और पड़ोसी देशों मसलन नेपाल, म्यामांर, भूटान, श्रीलंका और पाकिस्तान के कानूनों के अध्ययन के बाद रिपोर्ट को राज्य सरकार के विचारार्थ भेजा गया था। रिपोर्ट 268 पृष्ठ की थी। इसमें धर्म क्या है, क्या इसकी व्याख्या की जा सकती है, जबरन धर्मान्तरण पर हाल की अखबारी खबरें, पड़ोसी देशों के धर्मान्तरण विरोधी कानून जैसे विषय शामिल किये गए थे।
रिपोर्ट में धर्म से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों और नये कानून की आवश्यकता को रेखांकित किया गया था। आयोग ने मसौदा विधेयक के साथ अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि मध्य प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जबरन धर्मान्तरण को प्रतिबंधित करने के विशेष कानून बना हुआ है,जिससे उक्त राज्यों में धर्मांतरण की घटनाओं में कमी आई है।
खैर, यहां कथित प्यार या लव जेहाद की भी चर्चा जरूरी है। देश में हिन्दू लड़कियों के ‘लव जिहाद’ में फंस कर अपनी जिंदगी बर्बाद कर देने के किस्से अक्सर सुनने को मिल जाते हैं, लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो लव जेहाद को इस्लाम को बदनाम करने की साजिश बताते रहते हैं, लेकिन जब तीन वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने लव जेहाद को मान्यता प्रदान की, तब से ये शब्द चारों तरफ चर्चा और बहस का ज्वलंत विषय बना हुआ है,लव जिहाद का ये जिन्न केरल में एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के के प्रेम विवाह से पैदा हुआ था, जिसकी जांच देश में आतंकवादी घटनाओं की पड़ताल करने वाली नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए को सौंपी गई थी,जिसमें लव जेहाद का खुलासा हुआ था।
लव जिहाद अंग्रेजी और अरबी के दो शब्दों से बना है। लव यानी प्यार, मोहब्बत, इश्क अंगे्रजी का शब्द है और जिहाद अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है किसी मकसद को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देना। यानी जब एक धर्म विशेष को मानने वाले दूसरे धर्म की लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उस लड़की का धर्म परिवर्तन करवा देते हैं तो इस पूरी प्रक्रिया को ‘लव जिहाद’ कहा जाता है।
अगस्त 2017 से पहले तक लव जेहाद शब्द को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं थी. लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि लव जिहाद होता है और मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करवाकर लव जेहाद करते हैं तो इसमें कोई गंुजाइश नहीं रह गई। आतंकवादी घटनाओं की जांच करने वाली एजेंसी के केरल की अखिला उर्फ हादिया और शफीन के प्रेम विवाह में लव जेहाद और टेरर कनेक्शन का जिम्मा सौंपते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की, वो भी गौर करने लायक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था,’जिस तरह इंटरनेट गेम ब्लू व्हेल में किसी लड़के या लड़की को टास्क दिए जाते हैं और जिसमें उसे आखिर में सुसाइड करना होता है, उसी तरह आजकल किसी को भी खास मकसद के लिए राजी करना आसान हो गया है।’

अजय कुमार, लखनऊ

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