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दिलशाद गार्डन में का नजारा देखने लायक था, तालियों एवं थाली की आवाज से गूंज उठा आकाश

डॉ. शंभू पंवार
नई दिल्ली . आज जनता कर्फ्यू के दौरान दिलशाद गार्डन के पॉकेट A में सांय 5 बजते ही अचानक चारो तरफ मकानों की बाल्कोनियो से एक साथ तालियों की गड़गड़ाहट व थालियों की बजने की आवाज गूंजने लगी।
सभी फ्लैट की बालकोनी में बच्चे,महिलाये,वृद्ध बड़े जोश और उत्साह से ताली बजा रहे थे।एक बारगी देख कर ऐसा लगता था जैसे कोई जश्न मनाया जा रहा हो। फ्लैट्स की बालकोनी में खड़े लोग चारो तरफ एक साथ बजा रहे थे।तो नजरा अद्भुत था।प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय कवयित्री डॉ.पूनम माटिया उनके वृद्ध सास -ससुर, पति,पुत्री सभी के साथ बालकोनी से तालिया ओर थाली बजा रहे थे। और सभी को उत्साहित कर रही थी।

डॉ. माटिया ने जनता के नाम संदेश में कहा की कर्फ्यू स्वयं पर लगाया प्रतिबंध,अभी कसरत के तौर पर किया गया है।सरकार की घोषणाओं से यह प्रतीत होता है कि यह लम्बा चलेगा। लेकिन इससे घबराए नही।आवश्यक है की भारतीय संस्कृति में अंतर्निहित ,अनुशासन, स्वच्छता, संयम , दृढ़ता, पारिवारिक जुड़ाव, संवेदनशीलता , प्रकृति के प्रति लगाव , कर्मकांड के पार्श्व में वैज्ञानिक तर्क इत्यादि हमें कोरोना जैसी भयावह महामारी से लड़ने की ऊर्जा,इच्छाशक्ति व् सामर्थ्य प्रदान करते हैं।सोशल दूरी बनाकर रखें , सफाई का ध्यान रखें और सजग रहें|उल्लेखनीय है कि डॉ माटिया एक प्रख्याय साहित्यकार होने के साथ एक अच्छी समाज सेविका भी है। राष्ट्रवादी सोच की पक्षधर होने के फलस्वरूप उनके पिता का निधन हुवे 20 दिन हुवे है फिर भी राष्ट्रहित के कार्यो में वो आगे रहती है।

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