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इलाहाबाद के रोशनबाग की आवाज, बोल के लब आजाद हैं तेरे

शाहिद नकवी
प्रयागराज। दिल्ली के शाहीनबाग की तरह इलाहाबाद के रोशनबाग मे सीएए और एनआरसी के खिलाफ महिलाएं लगातार 23 वें दिन भी सत्याग्रह पर डटी हैं।’मंसूर अली पार्क मे चल रहे आन्दोलन की शुरुआत प्रतिदिन जन मन गण के गायन के साथ होती है।फिर लगता है हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद का नारा।दिन भर लोग आज़ादी के तरानों के साथ देश की आज़ादी में बलिदान हुए लोगों का ज़िक्र करते हैं ।गाँधी जी के पाँच मूलमंत्र पर यह आन्दोलन आगे बढ़ रहा है।महिलाएं ये भी कहती हैं कि बोल के लब आज़ाद हैं तेरे।अपने पल्लू को परचम बना चुकी धरने पर बैठी इन महिलाओं को न्यायपालिका के अलावा सिर्फ़ प्रधानमंत्री पर भरोसा है कि वो उनकी बात सुन सकते हैं और मान सकते हैं। प्रयागराज में इस समय हर साल संगम किनारे लगने वाला माघ मेला अब समाप्त हो रहा है और पांच दिवसीय गंगा यात्रा खत्म हो गई है।इस लिए उनको शिकायत है कि इस दौरान प्रदेश सरकार के तमाम मंत्री और ओहदेदार लोग इलाहाबाद आयें लेकिन उनकी आवाज सुनने रोशनबाग कोई नही आया। धरने में शामिल महिलाओं को जितनी आपत्ति सीएए और एनआरसी से है,उससे ज़्यादा हैरानी इस बात पर भी है कि उनकी बात सुनने के लिए कोई नहीं आ रहा है।कालेज की छात्रा परवीन रुंधे गले से बोलीं,आख़िर क्या ये हमारे नुमाइंदे नहीं हैं,जो वो हम लोगों के लिए ऐसी बात कह रहे हैं। रैली करके लोगों को समझा रहे हैं लेकिन हमारे पास आने का भी तो वक़्त निकाल सकते हैं।आंदोलन के समर्थन में जुटी महिलाओं के साथ आए पुरुषों ने पतली रस्सी से बनी बैरिकेडिंग के बाहर डेरा डाल रखा है। पुरुषों को वहां आने की इजाज़त नहीं है। लेकिन बाहर से उन्हें समर्थन देने आए लोगों को इस नियम में ढील देदी जाती है।धरने में शामिल तमाम महिलाओं के साथ उनके छोटे बच्चे भी हैं,बच्चों को वहां लाने की बड़ी उचित वजह भी इन महिलाओ के पास है।वह कहती हैं कि बच्चों को हम कहां छोड़कर आएं? और फिर क्यों छोड़कर आएं? आख़िर हम लोग इन्हीं बच्चों के भविष्य के लिए ही तो रात-दिन धरने पर बैठे हैं।सत्याग्रह मे घरेलू महिलाओं के अलावा छात्राएं भी यहां काफ़ी संख्या में हैं।

धरने के दौरा एक खास बात देखने को मिली कि रोशनबाग की महिलाओं ने दिल्ली के शाहीनबाग और जामिया मे फायरिगं करने वाले दोनों युवकों की तस्वीर भी लगा रखी थी।लेकिन उस पर लिखा था कि भाईयों अल्लाह तुमको बुरी संगत से बचाये,महिलाओं ने कहा कि ये उनलोगों के लिए संदेश है जो इस शांतिप्रिय आंदोलन को बदनाम कर धार्मिक रूप देना चाह रहे हैं।वह गर्व से भारत माता की जयकार कर के कहती हैं कि हमारी पूजा की प्रक्रिया अलग जरूर है लेकिन हम एक हैं और एक रहेगें।आन्दोलन के लगातार तेईसवें दिन दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता,वैज्ञानिक,शायर गौहर रज़ा ने आनदोलनरत महिलाओं व नौजवानों को सम्बोधित करते हुए धैर्य एवं शांतिपूर्वक गाँधी जी के पाँच मंत्र उपहास, उपेक्षा, तिरिस्कार,दमन को बर्दाश्त करते हुए सम्मान से आगे बढ़ने की बात कही।कहा गाँधी जी की वाणी थी के अगर सम्मान तक पहोँचना है तो उपहास और उपेक्षा को नज़र अन्दाज़ करो तिरिस्कार और दबाव के चंगुल से निकलो तो सम्मान तुमहारे क़दम चूमेगा।जब से शाहीन बाग़ का आन्दोलन शुरु हुआ तब से यही हो रहा पहले उपहास उड़ाया गया की यह बिल तो संसद से पास हो गया अब क्या करोगे।उसके बाद उपेक्षा की बारी आई ।कहा गया उन्की परवाह न करो हमारे पास धनबल,जनबल की शक्ति है।फिर तिरिस्कार किया गया की यह सब बाग़ी हैं ,गालियाँ दी गईं।लेकिन हमे विचलित होने की ज़रुरत नहीं।फिर आई दबाव बनाने के बारी।हमारे आन्दोलन को क्रश करने के लिए पावर से दमन किया जाने लगा है।लेकिन हमारे हक़ की लड़ाई अब अन्तिम दौर में पहोँच चूकी है।अब हमे गाँधी जी का पाँचवाँ मंत्र सम्मान मिलने वाला है।इसके लिए हमें धैर्य और संयम से अपनी लड़ाई को अहिंसात्मक तरीक़े से आगे बढ़ाना होगा।हमे कामयाबी ज़रुर मिलेगी।तेईसवें दिन भी लगातार लोगों का आना जारी रहा तमाम सामाजिक कार्यकर्ता ,राजनितिक दलों के लोग, बुद्धिजिवियों ने भी एनपीआर एनआरसी और सीएए के खिलाफ आवाज़ बुलन्द की।धरने में सबीहा मोहानी,सायरा अहमद,ज़ीशान रफत, नेहा यादव, सै०मो०अस्करी, इरशाद उल्ला, तारिक़ खान, अफसर महमूद, खालिद, अब्दुल्ला तेहामी, रमीज़ अहसन, मुशीर अहमद, मोईन सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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