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    74 वें स्वतंत्रता दिवस  का थीम “आत्म निर्भर भारत “”

दोस्तों लगभग हम लोगों ने दो सदियों के कठोर संघर्ष के बाद आजादी पाई और हमारी अपनी सरकार सत्ता में आई। 15 अगस्त 1947 की सुबह का जो सूरज निकला, वह हमारी देश की आजादी का सुरज था । दोस्तों इस समय  कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में है, इसीलिए भारत सरकार ने इस साल स्वतंत्रता दिवस 2020 का थीम “आत्म निर्भर भारत अभियान “रखा है । इस वर्ष कोरोना संक्रमण काल में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां भी कुछ अलग तरह से चल रही है। इस वर्ष हमारे प्रधानमंत्री जी अपने भाषण में कोरोना की वैक्सीन निर्माण पर भारत की भूमिका पर रोशनी डाल सकते हैं। इस वर्ष हम देख रहे हैं कि मनाया जा रहा कोरोना काल में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आम जनमानस में उत्साह का संचार करने के लिए ऑनलाइन भारत पर्व और माय -जीओवी -डॉट – इन  पर ऑनलाइन क्विज का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही सूत्रों के मुताबिक  राष्ट्रवादी एवं देशभक्ति की भावना को जगाए रखने के लिए फिल्मों की स्क्रीनिंग स्वतंत्रा दिवस के उपलक्ष में की जा सकती है। भारत की आजादी के साथ ही भारत का नया भाग्य भी लिखा गया इस कार्य में भारत के लोगों ने अपनी एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की और कर रहे है। हमारा भारत ने अपने निर्माण के लिए निव रखा जिसमें प्रेम ,त्याग , अहिंसा , एकीकरण सबको साथ लेकर चलना साथ ही सभी धर्मों का आदर करना और अपनी इस नीति के साथ आगे बढ़ता रहा अपना भारत और अपने गुलामी के जख्मों पर मरहम लगाते हुए नव भारत का निर्माण अपना भारत कर रहा है। देखा जाए तो आज अपना भारत पूरे दुनिया के नक्शे में अपनी मजबूत और अलग छवि बना लिया है और आने वाले समय में हमारा भारत फिर से विश्व गुरु बनेगा।
मेरे आत्मीय मित्रों अगर हम भारत के स्वतंत्र दिवस का इतिहास देखें तो 17 वीं शताब्दी के दौरान में कुछ यूरोपीय व्यापारियों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप की सीमा चौकी में पहले प्रवेश किया। उस वक्त देखें तो भारत में मुगल साम्राज्य का शासन था। उन्होंने भारत को बड़े करीब से जाना और धीरे-धीरे उन्होंने व्यापार के बहाने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाया और फिर अपने विशाल सैन्य  शक्ति  की वजह से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत को अपना गुलाम बना लिया और 18वीं शताब्दी के दौरान पूरे भारत में अंग्रेजों ने अपना स्थानीय साम्राज्य और असरदार ताकत स्थापित कर लिया था।।
आज दोस्तों भारत अपना 74 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। ऐसे में नजर डाले तो इन 73 वर्षों में अपना भारत ने आर्थिक और तकनीकी रूप से तरक्की किया है। लेकिन मुझे दुख इस बात की है कि आज भी अपना भारत विकसित देशों में शामिल नहीं हो पाया है। कहीं ना कहीं इसका कारण मुझे लगता है घटिया राजनीति और भाई भतीजावाद ही है।
देखे तो आज भी हमारे देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई  बहुत ही चौड़ी है, मतलब की आर्थिक विकास का फल सभी को समान रूप से नहीं मिला। हमारे संविधान के अनुच्छेद 14 में सभी के बराबरी की बात कही गई है ,लेकिन दोस्तों आज देखा जाए तो देश के 90 फ़ीसदी संसाधनों पर 10 फीसदी लोगों का कब्जा है वहीं दूसरी तरफ देखें तो 90 फीसदी देश के वंचित तबका  10 फीसदी संसाधनों पर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। मेरा कहने का मतलब है कि जो हमारे देश के संसाधन और धन हैं कुछ लोगों के हाथों में ही केंद्रित होता गया और हो रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्नति बहुत हुई है और भारत के कुछ शिक्षा संस्थान दुनिया भर में अपने उच्च स्तर के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बहुत कुछ अभी सुधार करने की जरूरत है जो की नई शिक्षा नीति जो आई है इससे हम उम्मीदें लगाए हुए हैं अगर इसका क्रियान्वयन इमानदारी पूर्वक किया गया तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता ।
दोस्तों आज भी आजादी के 73 वर्षों के बाद भी  देखा जाए तो जातिवाद ,धार्मिक असहिष्णुता , आर्थिक और सामाजिक असमानता, अशिक्षा, अनियंत्रित जनसंख्या जैसी अनेक भीषण समस्याएं हमारे सामने एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। अगर हम पिछले वर्ष यानी कि 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर क्या-क्या हुआ तो आपको बता दें कि जम्मू और कश्मीर में सभी ग्राम सरपंचों ने अपने घरों पर तिरंगा फहराया था। भारत सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 73 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जम्मू और कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से हटा दिया। हमने यह भी देखा कि 73 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके  पर 8 अगस्त को ही हमारे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को भारत रत्न से नवाजे थे। अगर हम देखे  तो भारत के 73 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ही पहली बार जम्मू और कश्मीर के कई इलाकों में तिरंगा फहराया गया और स्वतंत्रता दिवस मना कर इतिहास रच दिया गया।
(विक्रम चौरसिया)
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