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टाइम इज ब्रेनजानना है जरूरी

उच्च रक्तचाप, मधुमेह साथ ही साथ अनियमित और तनावपूर्ण जीवन के कारण जीवन शैली की महामारी में अचानक से रोगों में वृद्धि हो रही है। उन रोगों के बीच स्ट्रोक या मस्तिष्क अटैक शायद सबसे घातक है, लेकिन दुख की बात है कि लगातार इसके भयानक परिणाम बढ़ते जा रहे है। दुनिया भर में स्ट्रोक मौत और विकलांगता का तीसरा सबसे आम कारण है। हर 6 सेकंड में एक व्यक्त की स्ट्रोक के कारण मृत्यु होती है। स्ट्रोक एक ऐसा रोग है जो मस्तिष्क में जा रहे रक्तवाहिकाओं का प्रभावित करता है। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में जा रही रक्तवाहिका क्लाट या बस्र्ट द्वारा अवरुद्ध हो जाए, जिसके कारण रक्तस्राव होने लगें। इसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क को उतना ऑक्सीजन और रक्त नहीं मिल जितनी उसकी जरूरत होती है, जिससे कारण भी हो सकता है। डब्ल्युएचओ ने अनुमान सुझाव है कि 2050 तक, 80 प्रतिशत स्ट्रोक के मामलें दुनियाभर के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में घटित होगें मुख्य रूप से भारत और चीन में।
आमतौर पर एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक या पेरेलाइटिक अटैक से पीडि़त रोगियों को निर्भरता के साथ एक विशाल मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और वित्तीय बोझ के साथ जीवन का सामना करना पड़ता है। दुर्भाग्य से स्ट्रोक और मस्तिष्क अटैक के प्रति लोगों में बहुत ही कम जागरूकता है। इसलिये यह लोगों के लिए जानना आवश्यक है कि टाइम इज ब्रेन हर दूसरे सैंकड काउंट होता है। हर मिनट यदि स्ट्रोक अनुपचारित है, तो पराजित होने वाले रोगियों की औसत 1.9 मिलियन न्यूरॉन्स है, 13.8 अरब सूत्रयुग्मन और 12 किलोमीटर (7मील) एक्सोनल फाइबर है। अगर समय पर उपचार नहीं किया जाए तो मस्तिष्क में प्रत्येक एक घंटे इतनी न्यूरॉन्स खोता रहता है जितना एक सामान्य मस्तिष्क को बनने में लगभग 3.6 वर्ष लगते है। और पहले कुछ घंटों में जल्दी उपचार करवाने से कई मरीजों में स्ट्रोक रिवर्स हो जाता हैं।
इस्केमिक स्ट्रोक के प्रकार
बड़ी धमनी ऐथिरोएमबोलिज्म
कार्डियोएमबोलिज्म,
छोटे पोत रोग,
स्ट्रोक के वैकल्पिक एटियलॉजी और स्ट्रोक के अन्य अनिर्धारित एटियलॉजी शामिल हैं।
स्ट्रोक एक आपातकालीन क्यों है?
विकलांगता होने का सबसे आम कारण
लगभग 4 में 1 व्यक्ति इससे 1 साल के भीतर मर जाते है। 30-50 प्रतिशत व्यक्ति कार्यात्मक स्वतंत्रता फिर से हासिल नहीं कर पाते है।
भारत में स्ट्रोक की वार्षिक घटना की दर वर्तमान में 100000 जनसंख्या में से प्रति 145 है।
10-15 प्रतिशत लोगों में 40 वर्ष की आयु से कम में पाए जाते हैं।
ब्रेन अटैक के लक्षण- ब्रैन अटैक के लक्षण को समझने के लिए फास्ट एक सरल और प्रभावशाली तरीका है, जिसे हर व्यक्ति के लिए जानना आवषयक है.
फ. आ .स. ट
फ – फेस ड्पिंग यानी चेहरे का एक तरह से झुकाव या सुन्न हो जाना.
आ- आर्म वीकनेस यानी हाथों में अचानक से सुन्नपन. यदि व्यक्ति से दोनों हाथों को उठाने के लिए कहा जाएगा तो उसका एक हाथ नीचे की तरफ झुका रहेगा.
स- स्पीच डिफिकलटी यानी अचानक से बोलने या समझने में दिक्क्त. इसमें व्यक्ति को सरल से सरल वाक्य को भी बोलने और दोहराने में परेशानी होती है.
ट- टाइम यानी बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर को फोन करें.
फास्ट के अतिरिक्त वे लक्षण जिन्हें जानना जरूरी है:- अचानक से दोनों आंखों से साफ देखने में तकलीफ व अचानक से चलने, या बैलेंस करने में परेशानी, चक्कर आना और अचानक से बिना कारण सिर में तेज दर्द.

क्या करें जब अटैक हो- जनरल फिजिशियन के पास ना जाकर न्यूरो विभाग से संपर्क करें व बीपी की दवाई ना खाए.और सही होने का इंतजार ना करें, तुरंत अस्पातल जाए

उपचार-
एक्युट स्ट्रोक रक्त प्रवाह में ब्लॉकेज होने के कारण होता है। बहरहाल कुछ मस्तिष्क कोशिकाएं तुरंत खत्म हो जाती है, आमतौर पर वहां मस्तिष्क का एक हिस्सा होता है जो अभी भी पुनर्जीवित किया जा सकता है, यदि अगले कुछ घंटों में रक्तकी आपूर्ति को स्टोर कर लिया जाए। यह थ्रांबोलिटिक (अंत:शिरा थ्रंबोलाइसिस) दवाएं देने के द्वारा किया जा सकता है जो क्लाट बस्टर के रूप में कार्य और धमनियों में मौजूद ब्लॉकेज को खोलता है। इस दवा को स्ट्रोक होने के 4.5 घंटे तक में दिया जाता हैं और इसका परिणाम स्ट्रोक में परिवर्तन और बेहतर रीकवरी कर सकता हैं। लेकिन इन दवाओं को 4.5 घंटे बाद नहीं दिया जा सकता है साथ ही साथ निश्चित मरीजों के अत्यधिक रक्तरीडक्शन दवाओं और प्रभावी नहीं होती है, जब बहुत बड़ी मात्रा में रक्तवाहिका अवरोधित हो गई हो। इन मामलों में न्यूरोइंटरवेशन तकनीक द्वारा क्लाट को रक्त की पुन: आपूर्ति के लिए हटाया जा सकता। यह एक कैथिटर (एक छोटी सी ट्यूब) के द्वारा किया जाता है। जिसके अंतगर्त उस छोटी सी ट्यूब को किसी एक पैर की रक्तवाहिकाओं के भीतर जाकर अवरुद्ध नाव को ध्यान से स्टेंट-रिट्रिवर डिवाइस का उपयोग करके क्लाट को मस्तिष्क से निकालकर रक्तवाहिकों को खोला जाता है। तब से रक्तरीडक्शन ड्रग्स का उपयोग किसी भी कम खून बह रहे खतरे में नहीं किया जाता है और प्रक्रिया के बाद शरीर से डिवाइस निकाल दिया जाता है। इस चयनात्मक उपचार कम से कम 8 घंटे तक या अधिक ब्रैन अटैक के बाद दिया जा सकता है। सभी स्ट्रोक के रोगियों को तुरंत मूल्यांकन सीटी एंजियोग्राफी और पफ्र्यूशन(मस्तिष्क रक्त प्रवाह आकलन)इमेजिंग का उपयोग कर 256 स्लाइस सीटी स्कैन से रोगियों का पता लगाया जाता है जो मस्तिष्क को पुनर्जीवित करता है और तत्काल उपचार के साथ लाभ हो सकता है।

 

डा.आदित्य गुप्ता
(डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी, अग्रिम इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस, आर्टेमिस हॉस्पिटल गुरूग्राम)

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