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मस्तिष्क के सबसे नाजुक हिस्से में मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया से इलाज

माइक्रोकैथेटर और 3डी इमेज गाइडेंस समेत आधुनिक तकनीकों से मस्तिष्क की रक्तनलिकाओं में होने वाली ज्यादातर बीमारियों का इलाज कर सकते हैं

गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस हॉस्पिटल के अग्रिम इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस के डायरेक्टर डॉ. विपुल गुप्ता

नई दिल्ली। बारहवीं में पढऩे वाली लडक़ी अचानक बेहोश हो गई थी। जब उसे अस्पताल लाया गया तो वह गहरी बेहोशी की हालत में थी और उसकी नाड़ी या ब्लड प्रेशर बिल्कुल शांत था। आपात टीम ने तत्काल तत्परता दिखाई और मरीज को होश में लाया गया। एडवांस्ड टेक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन का इस्तेमाल करते हुए आर्टेमिस अग्रिम इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस की न्यूरोइंटरवेंशन टीम ने कोमा में गई 18 साल की लडक़ी का इलाज किया और उसे सफलतापूर्वक सामान्य जिंदगी में लौटने में मदद की। विस्तृत जांच के दौरान मस्तिष्क का सीटी स्कैन करने पर पता चला कि उसके मस्तिष्क के सबसे महत्वपूर्ण और अंदरूनी हिस्से यानी ब्रेन स्टेम में रक्तस्राव हो रहा है। ब्रेन स्टेम मस्तिष्क का सबसे नाजुक हिस्सा होता है, जिससे मस्तिष्क शरीर के अन्य हिस्सों से जुड़ा होता है। हेमरेज (मस्तिष्क में रक्तस्राव) बढऩे के कारण मस्तिष्क का स्राव निकालने के लिए आपात सर्जरी कराई गई, ताकि कपाल का दबाव कम किया जा सके। इस प्रक्रिया के बाद एंजियोग्राफी की गई जिसमें आटेरियोवेनस मलफॉर्मेशन (एवीएम) का पता चला। यह आर्टरी (मस्तिष्क तक रक्त ले जाने वाला) और नसों (जिसमें मस्तिष्क का रक्त बाहर निकलता है) के बीच गलत कनेक्शन के कारण सूजी हुई रक्त नलिकाओं का समूह था। विकृत हुई इन नसों में रक्त का तेज प्रवाह हो रहा था और इस कारण मस्तिष्क में ये फट भी सकती थीं।
मरीज को आईसीयू में लंबे समय तक रखना पड़ा और धीरे-धीरे वेंटिलेटर से निकाला गया। अगले दो महीने में ही वह होश में आ गई और बहुत हद तक उसके अंगों की क्रियाएं सामान्य हो गईं। हालांकि एक साल बाद उसे सिर में फिर दर्द उठा और जांच से दोबारा हेमरेज होने का पता चला। आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस अग्रिम इंस्टीट्यूट में न्यूरो-इंटरवेंशन के निदेशक डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा, ब्रेन स्टेम क्षेत्र में किसी तरह के इलाज में बहुत जोखित रहता है क्योंकि इसके टिश्यू बहुत जटिल होते हैं। टांग की रक्तनली के जरिये माइक्रोकैथेटर नामक एक बहुत पतली ट्यूब (आधा एमएम से भी कम मोटा) असामान्य रक्तनली के केंद्र में डालकर देखा गया। इसके बाद सामान्य रक्तनलियों में रक्तप्रवाह बरकरार रखते हुए लीकेज बंद करने के लिए ऐसा लिक्विड मैटेरियल दिया गया, जो रक्त के संपर्क में आने के बाद ठोस हो जाता है। इस जटिल प्रक्रिया के बाद भी मरीज को कोई समस्या नहीं हुई।
मरीज सकारात्मक सोच वाली थी और कठिन समस्याओं के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और सकारात्मक सोच रखते हुए जीवन में कुछ करना चाहती थी। डॉक्टर ने बताया, माइक्रोकैथेटर और 3डी इमेज गाइडेंस समेत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए आप अत्यंत सुरक्षित तरीके से मस्तिष्क की रक्तनलिकाओं में होने वाली ज्यादातर बीमारियों का इलाज कर सकते हैं। मरीज की सकारात्मकता और दृढ़निश्चय ने उसे आश्चर्यजनक तरीके से रिकवर होने में मदद की और असल में उसने अपने हावभाव से पूरी चिकित्सा टीम को प्रेरित किया। एवीएम का इलाज एंबोलाइजेशन, रेडियोसर्जरी या ओपन सर्जरी से किया जा सकता है और डॉक्टरों की टीम को सफलतापूर्वक इसका इलाज करने के लिए इन विशेषज्ञताओं और उपकरणों से लैस होना जरूरी होता है।

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