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दो मिनट का प्यार

राहुल हर बार की तरह इस बार भी धोखा खाता है। उसको प्यार करने का बहुत ही शौक है। लेकिन राहुल की उम्र प्यार करने के योग्य नहीं हुई है। तब भी वो कोशिश करता है। उनके पिताजी की नौकरी डाकघर में लगी हुई है। पिताजी तो हर रोज अपने समय पर ड्यूटी के लिए चले जाते हैं। और इधर राहुल के दिमाग पर प्यार का भूत सवार है। वह सही से दसवीं भी पास नहीं किया है। प्यार के चक्कर में इधर उधर घूम रहा है। और दिन रात प्यार के चक्कर में घर छोड़कर रेलवे प्लेटफार्म पर समय व्यर्थ करता है। इतना ही नहीं राहुल के दोस्त लोग भी तो एक नंबर आवारा है। न खुद पढ़ता है और न ही राहुल को पढ़ने देता है। राहुल की माँ समझा समझाकर परेशान हो गई हैं। कि बेटा तुम्हारी उम्र अभी नहीं हुई है। जब होगी तो प्यार करना। लेकिन राहुल मानने को तैयार ही नहीं है। जब राहुल के पिताजी डाकघर से आते हैं। और अपनी ड्रेस उतारकर घर में रख देते हैं। तो राहुल चुपके से घर के अंदर जाता है। और अपने पिताजी की जेब से पैसे चुराकर लड़की को खिलाने पिलाने निकल पड़ता है। और राहुल के पिताजी बोलते हैं अपनी पत्नी से मेरी आज तनख्वाह मिली है। पूरे के पूरे चालीस हजार। लेकिन राहुल तो पहले ही पांच हजार चुराकर प्यार में उड़ाने निकल पड़ा। जब राहुल की माँ अंदर जाती हैं तो देखती हैं कि जेब में से कुछ पैसे निकला हुआ है। तो आकलन करती हैं तो पाती हैं कि जेब से पांच हजार गायब है। तब वो समझ जाती हैं कि नहीं किसी का काम नहीं होगा सिवाए राहुल के अलावा। आने दो आज निकम्मे को खबर लेती हूँ। तब बोलती सुनते हैं जी आप तो बोले थें कि चालीस हजार है। इसमें तो पैंतीस हजार है। नहीं जी मैंने अपने हाथों से गणना किया था। पूरे के पूरे चालीस था। लगता है राहुल चुराकर भाग गया। हाँ तो किसका काम हो सकता है। आप तो अपनी ड्यूटी पर नित्य चल जाते हैं। मैं राहुल से परेशान आ चुकी हूँ। ऐसा करिए कि आप राहुल को बाहर भेज दीजिए पढ़ने के लिए शायद वो सुधर जाए। नहीं जी जो घर पर बिगड़ा रहता है वो कहीं भी सुधर नहीं सकता। क्यों पैसे को बर्बाद करुं। अरे वो बहुत ही छोटा बच्चा है जाने दो। अभी उसकी क्या उम्र हुई है अभी नहीं मौज मस्ती करेगा तो कब करेगा। और राहुल पैसे चुराकर रेलवे स्टेशन पर दोस्त लोग में पैसे को बर्बाद कर रहा है। राहुल आइस्क्रीम दोस्तों के साथ खाने जाता है। तो वहाँ एक सौंदर्य लड़की को देखता है। उसकी टी शर्ट पर नाम लिखा रहता है। पापा की परी। राहुल देखकर देखते ही रह जाता है। और एक दोस्त से बोलता है। अरे मैं कहीं सपना तो नहीं देख रहा हूँ। उसका दोस्त बोलता है। अबे नहीं यार सच है। वो हम सब की ओर देख रही है। और देखो वो हँस भी रही है। इसका मतलब हम सब की मेहनत बेकार नहीं गई। आखिरकार मेहनत में रंग आ ही गया। चलो चलो नाम पूछता हूँ। वो पापा की परी रेलवे स्टेशन पर लड़के लोग से पैसे लूटने नित्य आती थी। आज इसे ऊल्लू बनाती थी तो कल उसे ऊल्लू बनाती थी। रेलवे प्लेटफार्म पर लूटने की पेशा चला रही थी। लेकिन राहुल और उसके दोस्त के दिमाग पर जो प्यार का भूत सवार था। वो इतनी आसानी उतरने वाला कहाँ था। राहुल वही पापा की परी के पास जाता है। और बोलता है। हाय कैसी हो? मैं अच्छी हूँ तुम कैसे हो। यार तुम बहुत ही क्यूट लग रहे हो। क्या तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है कि नहीं। राहुल कुछ नहीं देखता और बोल देता है। नहीं है मेरी कोई जीएफ। मैं तुमसे कुछ बोलना चाहती हूँ। किंतु मुझे शर्म आती है। अरे किस बात की शर्म बोलो। नहीं मुझे बहुत जोड़ों की भूख लगी हुई है। राहुल बोलता है फिक्र मत करो। चलो तुम्हें खाना खिलाता हूँ। और पापा की परी तो यही चाहती थी। कि कब फ्री का माल मिल जाए। राहुल दोस्त लोग के साथ पापा की परी को खाना खिलाने फाईव स्टार होटल जाता है। जब वहाँ पहुँचता है राहुल। मन ही मन सोचता है। आज तो आई लव यूँ बोलकर ही छोड़ूँगा। इससे अच्छा मौका हाथ नहीं लगने वाला है। और होटल में दस्तक देता है। तो होटल वेटर बोलते हैं। क्या चाहिए आपको। तो राहुल पापा की परी को बोलता है। क्या सब खाओगी। तो बोलती है पिज़्ज़ा, बर्गर कोल ड्रिंक बस इतना ही राहुल बोलता है। अरे साहब जी होटल के सबसे महंगे खाने लाकर दीजिए। और राहुल जो जो बोलता है। होटल वेटर कई प्रकार के खाना लाकर रख देते हैं। औप पापा की परी खूब खाती है। और राहुल उसी के मुँह पर ताक रहा है। जब खाना खा लेती है। तो बोलती है तुम नहीं खाओगे। नहीं नहीं मेरा मुक्ष भड़ा हुआ है। तुम ही खाओ। ये होने के बाद तो राहुल जाता है काउंटर पर पैसे देने के लिए। साहब जी कितना पैसा हुआ। पूरे के पूरे आठ हजार। राहुल के पास तो पांच हजार ही है। और पापा की परी बिल बना दी। आठ हजार की। अब क्या करेगा राहुल। दोस्त से कुछ उधार पैसे लेता है। और होटल वाले को दे देता है। और होटल से निकल बोलती है चलो पार्क चलते हैं। वहीं बैठकर कुछ बातें होगी। राहुल को तो खुशी के मारे सिर्फ आखों पर वही पापा की परी रहती है। अब तो गया पार्क लूटने। वहाँ भी कहाँ छोड़ती है, उधर भी खूब लूटती है। कभी आइसक्रीम तो कभी फलूदा खाती है। और यह सब होने के बाद अब समय आता है पापा की परी को घर जाने की। और बोलती है तुम्हारा नाम क्या है। तो बोलता है मेरा नाम राहुल, और तुम्हारा मेरा नाम माजुली है। मेरे घर में मेरी माँ प्यार से पापा की परी बुलाती हैं। इसलिए टी शर्ट पर नाम लिखती हूँ पापा की परी। असल में तो मैं माजुली हूँ। सुनो ना तुम्हें राहुल नाम लेकर बुला सकती हूँ ना। अरे हाँ हाँ जो भी बोलो। सूनो मैं तुम्हें नंबर देती हूँ। राहुल सुनता है तो मन में बोलता है। मेरा प्रारब्ध कितना अच्छा है। अच्छा दो मैं लिख लेता हूँ। और मोबाइल में भी सेव कर लेता हूँ। हाँ लेकिन एक समस्या है क्या बोलो। मोबाइल में रिचार्ज खत्म हो गया है। तुम एक महीने का रिचार्ज करा दो। नहीं पूरे मैं तीन महीने का रिचार्ज करा देता हूँ। पापा की परी मन ही मन बोलती रहती है। आज तो मुर्गा अच्छा हाथ लगा है। ठीक है तुम्हारी मरजी जो भी करो। अच्छा चलो अब हम सब को घर चलना चाहिए। पापा की परी तो घर चली जाती है। और इधर राहुल भी दोस्त लोग के साथ घर आता है। अब तो राहुल के पास कुछ नहीं बचा। पूरे पांच हजार गया प्यार के पानी में। जब राहुल घर के अंदर दस्तक देता है। तो उस दिन राहुल के पिताजी की छुट्टी रहती है। वो घर पर ही रहते हैं। जब राहुल को देखते हैं। तो बोलते हैं कि राहुल बेटा कहाँ गया था। नहीं पापा आज एक दोस्त का जन्मदिन था। उसी की पार्टी में गया था। तुम पैसे चुराकर क्यों भागा था। नही पापा कहाँ चुराया था। आज पैसे का बहुत ही जरुरी काम था। इसलिए मैं आपकी जेब से पांच हजार चुरा लिया। लेकिन राहुल कहाँ असलियत को बताना चाहता है। अच्छा बेटा ऐसा करो खाना खाकर सो जाओ। टाइम भी काफी हो गया है। राहुल अपने कमरे में वही पापा की परी के फोन का इंतेजार कर रहा है। राहुल को तो उस दिन कहाँ नींद आने वाली। बहुत देर के बाद फोन की घंटी बजती है। तो राहुल पापा की परी के चक्कर में घर की अलमारी के सीसे को फोड़ डालता है। और फोन रिसिव करता है। मैं माजुली बोल रही हूँ। क्या तुम अभी तक सोया नहीं। अरे तुम्हारे बिना मुझे चैन कहाँ आती है। क्या कर रहे हो अभी कुछ नहीं। और तुम माजुली अरे यार आज मैं बहुत थक गई हूँ। कल बात करती हूँ। राहुल फिर फोन क्यों किया। मैं यहीं जानने के लिए की तुम क्या कर रहे हो। गुड नाईट सो जाओ राहुल। अब क्यों नहीं बोलोगी गुड नाईट। राहुल तो सो जाता है। जब सवेरा होता है तो राहुल की माँ राहुल के रुम में जाती हैं तो और देखती हैं अलमारी का सीसा फुटा हुआ है। अरे निठल्ले तू ने अलमारी के सीसे को भी फोड़ डाला। नहीं माँ रात में एक बिल्ली मेरे रुम में घूस गई थी। शायद वही फोड़ी होगी। ओ मुझे सिखा रहे हो। रात में तू फोन पर किससे बातें कर रहा था। बता दो नहीं तो मैं तुम्हारे पिताजी को कह दूंगी। नहीं माँ किसी से भी बात नहीं कर रहा था। वो मेरा दोस्त था अच्छा। राहुल तो बहाना बनाने में बहुत ही माहिर था। अब हर बार की तरह इस बार भी पापा की परी से मुलाक़ात करने रेलवे प्लेटफार्म पर जाता है। इस बार तो दोस्त लोग को भी नहीं बोलता है चुप्पे चाप एकांत ही जाता है पापा की परी से मिलने। जब राहुल रेलवे प्लेटफार्म पर पहुँचता है। और फोन करता है पापा की परी को। तो पापा की परी बोलती है नहीं आ रही हूँ आज स्टेशन पर। मेरे घर में कुछ काम है। ऐसे करो अगले दिन आना। तब राहुल सब समझ जाता है कि ये प्यार नहीं कृतघ्न मिला है। ये तो खाने पीने और मोबाइल रिचार्ज कराने से मतलब रखती है। लेकिन माजुली जी को तो बारह बॉयफ्रेंड है। क्या राहुल को भाव देगी। अब बेचारा राहुल रेलवे प्लेटफार्म पर प्यार के अश्क को बहा रहा है।

मो. जमील
अंधराठाढ़ी, मधुबनी (बिहार)

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