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यूरोलॉजिकल कैंसर का इलाज अब एडवांस रोबोटिक सर्जरी से संभव

विजय न्यूज़ ब्यूरो
प्रोस्टेट और किडनी की बीमारियों सहित यूरोलॉजिकल कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि, ये बीमारियां दुर्लभ होती हैं, लेकिन वर्तमान में ये बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हमारी बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, मोटापा, धूम्रपान इत्यादि कैंसर के बढ़ते मामलों के मुख्य कारणों में शामिल हैं। यूरोलॉजी कैंसर से बचाव के लिए जागरुकता और एडवांस इलाज एक मुख्य भूमिका निभाते हैं, जिससे शुरआत में ही बीमारी की पहचान की जा सकती है। कैंसर की मुश्किलों, लंबे इलाज और मंहगे इलाज से बचने के लिए बीमारी का शुरुआती निदान आवश्यक है।
गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट यूरोलॉजी ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के हेड व निदेशक डॉ.राजीव यादव ने बताया कि, “प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम कैंसर है, जो आमतौर पर 50 की उम्र के बाद नजर आता है। प्रोस्टेट से पीड़ित पुरुषों को पेशाब की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे पेशाब की धीमी गति, पेशाब के समय में गड़बड़ी, पेशाब के साथ खून आना आदि। समय पर निदान के साथ, प्रोस्टेट कैंसर का सफल इलाज संभव है। पीएसए जैसे सामान्य बल्ड टेस्ट की मदद से समय पर बीमारी का निदान किया जा सकता है। रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में प्रगति के साथ, सर्जरी के बाद मरीज को अस्पताल से जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाता है, मरीज जल्दी रिकवर करता है और न के बराबर दर्द का अनुभव करता है।”

इन कैंसरों में शामिल किडनी का कैंसर भी आज के समय में आम हो गया है। प्रोस्टेट कैंसर से विपरीत, किडनी के कैंसर के कोई लक्षण नहीं नजर आ सकते हैं। केवल बाद के चरणों में मरीज की हड्डियों में दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में खून, भूख न लगना और बेवजह वजन कम होना आदि लक्षण नजर आ सकते हैं। किडनी के कैंसर के लिए सफल इलाज और सर्जरी के लिए इसकी पहचान शुरुआत में करना बहुत जरूरी है। डॉ. राजीव यादव का कहना है कि “नियमित हेल्थ चेकअप और अल्ट्रासाउंड की मदद से किडनी के कैंसर की पहचान शुरुआत में ही की जा सकती है। कैंसर के लिए सबसे एडवांस रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी सर्जरी से जहां किडनी को बिना नुकसान पहुंचाए ट्यूमर को किडनी से अलग कर दिया जाता है। किडनी के ट्यूमर के लिए इस अनूठी रोबोटिक सर्जरी का यह फायदा है कि ट्यूमर को निकालते वक्त किडनी को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचता है। इसलिए इस प्रक्रिया के साथ सर्जन केवल एक छोटे से चीरे की मदद से मरीज को पूरी तरह से ठीक कर सकता है, जिसमें खून न के बराबर बहता है और मरीज को अस्पताल से जल्द ही डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है।”

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