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कन्या राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: इस वर्ष आपको स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। आपको वातशूल एवं मानसिक अशान्ति की समस्या हो सकती है। हृदयरोग की आशंका रहेगी। सम्बन्धियों से वियोग हो सकता है। 13 अप्रैल से 15 मई तक आपको यात्रा के समय सचेत रहने होगा। मस्तिष्क में चोट लग सकती है। उदर एवं नेत्र सम्बन्धी रोगों से समस्या बढ़ेगी। 23 सितम्बर से आपको स्वास्थ्य में सुधार प्रतीत होगा। प्रतिदिन प्रातः सूर्य की किरणों का आनन्द लें, सूर्य नमस्कार करें, सम्भव हो तो थोड़ा टहलने जायें।

आर्थिक स्थिति: आर्थिक क्षेत्र की दृष्टि से यह वर्ष आपको मिश्रित फल प्रदान करेगा। कभी आर्थिक उन्नति तो कभी आर्थिक अवनति की परिस्थिति बनी रहेगी। 30 मार्च से 30 जून के मध्य के समय में धन प्राप्त होने की विशेष सम्भावना है। स्वयं द्वारा किये गये परिश्रम का आपको उचित फल प्राप्त हो सकता है। जीवनसाथी की ओर से आर्थिक लाभ होगा। धनलाभार्जन हेतु विदेश यात्रा सम्भव है। आर्थिक क्षेत्र में सुद्रढ़ बनने हेतु आपको अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है। कर्म करें, फल भी प्राप्त होगा।

व्यवसाय: व्यवसायिक दृष्टि से यह वर्ष मध्यम हो सकता है। 24 जनवरी से शनि महाराज पञ्चम स्थान में आने के कारण आपके व्यवसाय में बाधायें उत्पन्न हो सकती हैं। यदि आप किसी नवीन व्यापार के सन्दर्भ में योजना बना रहे हैं, तो सभी प्रकार से विचार-विमर्श करने के उपरान्त ही आगे बढ़ें। 19 सितम्बर से निम्न-स्तरीय एवं अनैतिक व्यक्तियों के माध्यम से व्यवसाय में सफलता प्राप्त हो सकती है। अपनी कार्य कुशलता एवं दक्षता के बल पर आप उनकी समस्याओं का समाधान भी कर लेंगे।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: आपका पूर्ण ध्यान इस वर्ष अपने घर परिवार की देख-रेख में होगा। सामाजिक क्षेत्र में भी आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी। सामाजिक रूप से एक सम्मानदायक स्थिति रहेगी एवं विभिन्न प्रकार के कार्यो एवं संस्थानों में आप व्यस्त रहेंगे। पिता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। वर्ष के उतरार्ध में सन्तान के जन्म का शुभ समाचार प्राप्त होगा। वृद्ध व्यक्तियों को पौत्रिक सुख प्राप्त होगा। पत्नी से सम्बन्ध अनुकूल होंगे एवं सहपरिवार किसी पर्वतीय क्षेत्र की यात्रा भी करेंगे।

प्रणय जीवन: इस वर्ष दाम्पत्यजीवन में नई उमंग आ रही है। भौतिक सुखों को लेकर सम्बन्धियों से अनबन रहेगी। पत्नी व सन्तान सुख सामान्य रहेगा। पत्नी का स्वास्थ्य दुर्बल रहेगा। दाम्पत्यजीवन मधुर बना रहेगा। अविवाहितों के विवाह की चर्चा आगे बढ़ेगी। आपकी मनोकामना पूर्ण होती प्रतीत होगी। अज्ञात व्यक्ति से प्रेम-सम्बन्धों में एक-दुसरे के मध्य दूरी रखना आपके लिये हितकर होगा। व्यवहारिक वार्तालाप में क्रोध कम करें तथा शान्त रहें।

स्त्री जातक फल: वर्ष के प्रारम्भ में ही आपके जीवनसाथी के साथ छोटे-मोटे वाद-विवाद हो सकते हैं। वाद-विवाद न करें एवं सन्तान व पति को महत्व एवं सम्मान दें। आपके शत्रुओं में वृद्धि हो सकती है, सावधान रहें। निम्नकक्षा की स्त्रियों से सम्पर्क के कारण मानसिक कष्ट हो सकता है। केतु आपकी राशि से चतुर्थ स्थान में होने से स्त्रियों को हिस्टीरिया एवं मानसिक भ्रम जैसे रोग हो सकते हैं। भाग्य में उतार-चढ़ाव हो सकता है। गर्भपात के योग बन सकते हैं।

राजकीय स्थिति: उच्च स्तरीय व्यक्तियों से मेल-मिलाप, उच्च विचार, उन्नति, उपलब्धी, अधिकार प्राप्ति एवं पैतृक सम्पत्ति आदि इस वर्ष आपको प्राप्त होने वाली है। इस वर्ष आपको उच्च कोटि की क्षमता प्राप्त होने वाली है। स्वयं को इसके लिये तैयार करें। अनेक समय परिस्थितियाँ विपरित भी होंगी, किन्तु संयम व धैर्यपूर्वक कार्य करना होगा। इतना निश्चित है, की इस बार विजय आपकी होगी। आप प्रचार-प्रसार एवं यात्रा आदि करें। आपके परिणाम सम्पर्क, संचार, मानसिक उर्जा व प्रतिभा के अनुरूप होंगे।

विद्यार्थी जीवन: इस वर्ष 19 सितम्बर से आपको अभ्यास के समय विशेष ध्यान रखना होगा। किन्हीं कारणवश व्यय होगा। अध्यापकगण या सहपाठियों से मतभेद हो सकता है। यदि आप महाविद्यालय के छात्र हैं, तो अपनी वाणी पर पूर्ण नियन्त्रण रखना होगा। लेखन एवं वाचन में परिश्रम न करने के कारण, अनिच्छित परिणाम मिल सकता है। निरन्तर परिश्रम करें, फल अवश्य प्राप्त होगा।

सारांश: वर्ष 2020 के समग्र अवलोकन के अनुसार इस वर्ष आपका जीवन उतार-चढ़ाव युक्त रहेगा। वर्ष के आरम्भ की स्थिति सर्वाधिक चिन्तनीय रहेगी। आर्थिक व्यवहार एवं व्यापार सिमित ही रखें। वर्ष के मध्य में अधिक लाभदायक व्यापार के सन्दर्भ में विचार करें। शारीरिक एवं मानसिक स्थिति अनुकूल रहेगी, किन्तु पुराने रोगों का ध्यान रखें तथा दिनचर्या का पूर्ण पालन करें। नौकरीपेशा वाले जातक वर्ष के मध्य में किसी विश्वासपात्र व्यक्ति की साहयता से उच्च पद प्राप्त कर सकते हैं। प्रणयजीवन थोड़ा कठिन रहेगा। दाम्पत्य जीवन आनन्दमयी व्यतित होगा। विधार्थी जीवन में परिश्रम को प्राधान्यता दें, एकाग्रता अनिवार्य होगी। स्त्रियाँ इस वर्ष अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। आर्थिक परिस्थिति उतार-चढ़ाव युक्त होगी। पूर्व से ही योजनायें बना लें। उधारी किसी के साथ न करें।

मर्यादा: –

  1. वर्ष के प्रारम्भ में 24 जनवरी तक आप पर शनि की चतुर्थ ढैया (लघु कल्याणी) लोहे के पद में है, जो पारिवारिक चिन्ता एवं अप्रत्याशित समस्या उत्पन्न कर सकता है। 24 जनवरी से कण्टक शनि होगा, जो अशुभ फलदायक हो सकता है। यदि जन्म का शनि शुभ है, तो अशुभफल कम ही प्राप्त होगा।
  2. आप किसी अन्य के कार्यो में आलस्य करने वाले तथा अपने कार्य को शीध्र करने वाले हैं, अपनी इस आदत को सुधारें।
  3. आप में आत्मविश्वास का आभाव है जिसे पूर्ण करें। आपके व्यक्तित्व में शान्ति, धैर्य एवं सहनशीलता अत्यधिक है।
  4. लोकतान्त्रिक नेतृत्व के गुण आप में है। सामान्यत:सामूहिक नेतृत्व पद्धिति में आप आगे आते हैं, किन्तु इस वर्ष सतर्कता से कार्य करें।
  5. यद्यपि आप स्पष्टवादी हैं, परन्तु वार्तालाप में विनम्रता का अधिक ही उपयोग करते है, परिणामस्वरूप विनम्रता का अनुचित लाभ आपके विरोधी उठाते हैं, कभी-कभी क्रोध भी कर लिया करें।
  6. आप कोई भी कार्य करने से पूर्व एक योजना बना लें तथा उस कार्य को पूर्ण करने का प्रयत्न सदैव योजनानुसार ही करें।
  7. मित्रों, सम्बन्धियों तथा अपरिचित व्यक्तियों के लिये भी आप सहयोग एवं उदारतापूर्ण द्रष्टिकोण रखते हैं, इनमे थोडा परिवर्तन करें तथा अच्छे व बुरे की पहचान रखें।

समाधान: –

  • शनिवार का व्रत करें, व्रत के दिन आसन पर बैठ कर सन्ध्याकाल ही भोजन करें।
  • शनिवार के दिन सायंकाल श्री हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  • शिवजी के समक्ष श्री रुद्राभिषेक का पाठ पण्डितजी से करवायें, पण्डितजी को दान-दक्षिणा से सन्तुष्ट करें।
  • परस्त्रीगमन तथा मांस-मदिरा का त्याग करें।
  • छल-कपट से दूर रहें।
  • अपने से बड़े-वृद्ध एवं पूजनीय व्यक्तियों का आशिर्वाद प्राप्त करें।
  • नेत्रहीन एवं दिव्यांग भिक्षुकों को भोजन करायें व दक्षिणा दें।
  • शनिवार के दिन तेल, उड़द एवं काले कपड़े किसी निर्धन व असहाय को दान करें।
  • शनिवार के सायंकाल में पञ्चमुखी हनुमानजी के दर्शन करें एवं आसन लगाकर हनुमानजी के समक्ष मनोवांछित फल प्राप्ति हेतु एक ही बैठक में 100 बार हनुमानचालीसा का पाठ करें।

-निम्न मन्त्र की शनिवार के दिन सायंकाल 1 माला-108 बार मन्त्र का पाठ करे-

ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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