National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

राजस्थान के चिड़ावा के पास है ये वृंदावन धाम

  • एक वृन्दावन यहां बुलाता….
  • राजस्थान के चिड़ावा के पास है ये वृंदावन धाम
  • सालभर में लाखों भक्त आते हैं इस वृंदावन में भी
  • बिहारीजी राधा संग विराजते हैं यहां
  • बाबा पुरुषोत्तमदास 1 हजार साल पहले वृंदावन से लेकर आये थे राधा-बिहारीजी की मूर्ति
  • पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा ये वृंदावन

वृंदावन का नाम सुनते ही मथुरा के पास स्थित भगवान कृष्ण की क्रीड़ा स्थली वृंदावन का ध्यान आपको आया होगा। लेकिन शीर्षक के अनुरूप ही एक ओर वृंदावन भी है जो कान्हा के भक्तों को अपनी ओर खींचा ले जाता है। जी हां राजस्थान में झुंझुनूं जिले की चिड़ावा तहसील में सुलताना कस्बे के समीप शेखावाटी की भागीरथी कही जाने वाली काटली नदी के पाट के पास बना है ये वृंदावन धाम। इस धाम में भी भगवान कृष्ण का मनमोहक स्वरूप बिहारीजी के रूप में राधा जी के साथ विराजते है।

संत पुरुषोत्तम दास ने बसाया वृंदावन
वृंदावन के संत हरिदासजी ने अपने शिष्य पुरुषोत्तम दास को भगवान राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप को भेंट कर योग्य तपोस्थली पर जाकर तपस्या करने का आदेश दिया। इसके बाद संत पुरुषोत्तमदास भड़ौंदा में काटली नदी के मुहाने पर पहुंचे। यहां का वन उन्हें वृंदावन के समान ही निधि वन प्रतीत हुआ। उन्होंने इसी स्थान पर एक ऐसे पेड़ को देखा जिसमें एक तने से पांच शाखाएं निकली थी। वो मंदिर के प्रारुप जैसा प्रतीत हो रहा था। उन्हीं पांच शाखाओं के मध्य बैठकर वे तप करने लगे। तप पर संतुष्ट होकर भगवान ने उन्हें युगल बिहारी के रूप में दर्शन दिए। अब तो पुरुषोत्तम दासजी को यहां हर तरफ भगवान की छवि नजर आने लगी। उन्होंने इस स्थान का नाम वृंदावन रखा। यहां पर ही भगवान राधा-कृष्ण की अष्ट धातु की प्रतिमाओं को स्थापित कर वे यहां पूजा करने लगे। वर्तमान में यहां आस्था का बड़ा केंद्र विकसित हो चुका है। लोगों की आस्था है कि यहां श्रद्धा के मांगी गई मनौती अवश्य पूर्ण होती है।

पर्यटन स्थल के रूप में हुआ विकास
इस धाम को पर्यटन स्थल के रुप मे विकसित करने में यहां की सेवाभावी संस्थाएं लगी हुई है। निधिवन के रूप में यहां पिलानी की पंचवटी की तरह ही जीव- जंतुओं के स्टेच्यू लगाकर और बगीचे स्थापित कर मनमोहक स्थान बनाया जा रहा है। पँचपेड़ के आगे से लेकर बिहारी जी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर फव्वारें लगाकर धाम को सुंदरता प्रदान की गई है।

हर साल लाखों भक्त करते हैं दर्शन
वैसे तो यहां साल में दो बार भाद्रपद में जन्माष्टमी और बाबा पुरुषोत्तम दास के जन्मोत्सव पर फाल्गुन में बड़े आयोजन होते हैं । लेकिन इसके इतर भी सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। प्रवासी राजस्थानी श्रद्धालु पँचपेड़ पर ना केवल पूजा करते हैं बल्कि बड़ी संख्या में परिवार इन्हें कुलदेवता मानते हुए अपने बच्चों के जात जडूले भी यहां करते है। लोगों का विश्वास है कि यहां आने से सब मनोकामना पूरी होती है। ये आस्था और विश्वास का बेजोड़ मिलन ही भक्तों और भगवान को ऐसे रमणीय स्थलों पर मिलाता है। भक्ति की असीम शक्ति और श्रद्धा का अद्भुत शगल ही दूर दूर से भक्तों को यहां खींच कर ले आता है। आप भी एक बार इस शेखावाटी के वृंदावन में पधारिएं और हमें विश्वास है कि यहां आकर आपको भी ना केवल यहां ईश्वरीय अनुभूति होगी बल्कि दिल को सुकून भी मिलेगा। आस्था का ये स्थल आपके मन में भी श्रद्धा के भाव जागृत करता नजर आएगा। तो पधारिए एक बार इस वृंदावन की ओर….

चन्द्रमौलि पचरंगिया (नोट- लेखक रसमुग्धा पत्रिका के सम्पादक हैं)

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar