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व्यंग : गुजराती अमिरी का दीवार

बुझावन पांडे अउरी मंगरू काका भोर में ही मोदी ब्रांड कुर्ता पजामा पहनकर ट्रंप के झलक पाने को सड़क किनारे उसी दीवार से अडकर जमे थे जो गुजरात के अमीरी पर ट्रंप की साम्राज्यवादी निगाह न पड़ जाए से बचाने के लिए बनाया गया है।अभी ट्रंप के आने में देर था बहुत देर से मंगरू काका के बक बक सुनते सुनते बुझावन पांडे बोले का ये मर्दे मंगरू काका एकदम नहीं बुझाता है।जो लगातार आठ दिन से आपके पेट में मरोड़ उठ रहा है।दीवार बना दिया,दीवार बना दिया।अरे कोई यह चीन का दीवार है जो आपको डर है कि आने वाले समय में आपके नाती पोते देखने के जिद करने लगेंगे।कभी तो अपने खोपड़ी से सोचिए सिर्फ हारे हुए विपक्षी की तरह टपर टपर करते हैं।अब आप ही बताइए गुजरात मॉडल अंकल सैम देख लेंते तो गौतम बुध के जैसा ज्ञान प्राप्त करने का जिद नहीं करने लगते। काहे एक ही राम धुन गुनगुना रहे हैं। स्विट्जरलैंड से आए काले धन का करोड़ों रुपया का बंदरबांट कर दिया।वह आपके कमाई का था अमीरों का था और अमीरों को छुपाने के लिए दीवार बना दिया। अगर यह बर्बादी है तो कऊनो पहली बार है,नोटबंदी से जो बर्बादी हुआ याद नहीं है जो अब दोष दे रहे हैं?झुग्गी झोपड़ी में छुपे अमिरी को दीवार से ढक रहे हैं कोई बुर्का थोड़ी ही ना है।
देखिए काका एक बात याद रखिए ज्यादा बोलने पर अंध राष्ट्रवादी आपको कहां भेजेंगे।भले उहवां से आवे वाले लोगन को अपने देश में नागरिकता दिया जा रहा है क्योंकि उनके बिना भारत विकास निजी ट्रेन की स्पीड से नहीं कर पा रहा।तो आ रहे हैं उनके बदले यहां के कुछ लोगों को तो भेजना पड़ेगा।वाजिब है न मंगरु काका।कहीं आपको भी ललित मोदी नीरव मोदी की तरह विदेश निर्वासित कर दिया गया तो मत कहना।अगर मेक इन इंडिया में रहना है तो मुंह पर नकाब नहीं टेप साटकर रहिए।अब देखिए ना हमारे प्रधानमंत्री के सूट बूट पहनने पर कुछ लोग सवाल उठाते हैं क्या आज गांधीजी की तरह धोती कुर्ता पहनते तो सूट बूट वाले देश के राष्ट्रपति भारत आते।दुनिया के सबसे बड़े पार्टी के तमगा प्राप्त नेता अपनी और अपने सांसदों के गोद लिए गांव अंकल सैम को दिखाना चाहते थे पर उन्होंने तो शाहजहां के बनाए ताजमहल और चुनावी मंच द्वारा घोषित आतंकवादी मुख्यमंत्री के बनाए विद्यालय का दीदार करना पसंद किया।तो इसमें उनकी गलती कैसे ठहरा सकते हैं।काका हमारे यहां अतिथि देवो भव: का संस्कार है।तो भला उनके इच्छा का सम्मान क्यों न किया जाए।
वैसे दीवार सिर्फ अमीरी छिपाने के लिए नहीं एक और बात है आप यह बखूबी जानते हैं यदुकुल नरेश द्वारिकाधीश कृष्ण की भूमि गुजरात पड़ोसी देश से सटा हुआ राज्य है,अगर वह दीवार नहीं बनाया गया तो अंकल सैम कहीं गड़बड़ा कर पड़ोसी देश का रास्ता पकड़ सकते थे तो उनके स्वागत पर जो अरबों रुपया हर दिन सस्ते हो रहे पेट्रोलियम की तरह बहाया जा रहा है सब फील गुड हो जाता। वैसे भी इसी वर्ष अमेरिका में चुनाव होने वाला है और चुनावी समय में नेता का दिमाग कुछ सनका हुआ रहता है। कहीं चुनावी दबाव में कुछ ऊंच नीच कर बैठे तो हमारे मुल्क की बदनामी सारी दुनिया में हो जाती।आप देखे ना दिल्ली के चुनाव में नेता लोग अपनी जुबान से किस तरह मधु टपका रहे थे। चुनावी मंचों से कितने देशभक्ति नारे लगाए जा रहे थे। कई लोगों को तो चुनाव आयोग ने इसके लिए उन्हें पुरस्कृत कर आराम से घर बैठाने का काम भी किया है। और शायद उसी पुरस्कार के लोभ में लोग अति उत्साहित हो बैठे जिसका खामियाजा उन्हें चुनावी हार के रूप में मिला।सोचिए जो दीवार बनाने का काम सतर साल में नहीं हुआ वह चंद दिनों में अपने यार के लिए बना दिया गया।यही स्टैंड अप इंडिया का कमाल है।अब दुनिया भारत की गरीबी नहीं अमीरी छुपाने वाला दीवार देखेगा।आप कहना क्या चाहते हैं हम अंकल सैम को इधर-उधर देखने दे,ताकि वे गोधरा दंगा के सबूत इकट्ठा करने लगे यह हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं होगा।
तब तो आप एकदम नहीं बोले थे जब हमारे ही देश के एक राज्य के मुख्यमंत्री को अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देशों ने अपने देश में लाख कोशिश के बाद कदम तक नहीं रखने दिया था बेचारे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अपने लोगों से बात करना पड़ता था।आप यह क्यों भूल जाते है कुछ सत्ता विरोधी लोग सीएए जैसे क्रांतिकारी कानून जिसके बदौलत देश में रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी जैसे बुनियादी सुविधा बढ़ने की अपार संभावना है के खिलाफ शहर शहर में हंगामा कर रहे हैं कहीं वे सड़क पर आ गए तो झूठ मुठ की बदनामी झेलना पड़ेगा।वैसे भी हमारे देश समाज में पर्दा नशी की रवायत पुरानी है और अगर अमीरी छिपाने के लिए पर्दा नशी किया जा रहा है तो अच्छी बात है।यही तो सबका साथ सबका विकास है।दुनिया सबको एक नजर से देखेगी भारत में कोई अमीर कोई गरीब नहीं है सब एक समान।चलिए अब गाइए मेरे साथ होली भारतीय सब एक समान होलिया में लगा ल हो अमेरिकी अबीर गुलाल।

गुस्ताखी माफ बुरा न मानो होली है

गोपेंद्र गौतम
व्यंग्यकार
औरंगाबाद बिहार

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